
वॉशिंगटन: दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिक और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले साल के पहले सूर्यग्रहण को देखने की तैयारी कर रहे हैं। यह दुर्लभ खगोलीय घटना इसी महीने होने वाली है जब सूरज कुछ देर के लिए धुंधला हो जाएगा। इसके चलते दुनिया के कुछ हिस्सों में यह आसमान में आग के छल्ले की तरह नजर आएगा। इसे रिंग ऑफ फायर इफेक्ट कहा जाता है।
सूर्यग्रहण का यह प्रकार तब होता है, जब चांद पृथ्वी से अपने सबसे दूर वाले बिंदु पर या उसका आस-पास होता है। आइए साल के पहले सूर्यग्रहण के बारे में अहम बातें जानते हैं।
1- साल का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी को होने जा रहा है। उस दिन जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से होकर गुजरेगा, तो हमारे सूरज का बड़ा हिस्सा ढंक जाएगा।
2- यह एक वलयाकार सूर्यग्रहण होगा, जो रिंग ऑफ फायर का शानदार नजारा दिखाएगा। दरअसल चंद्रमा पृथ्वी के सबसे दूर बिंदु पर होने के चलते सूरज को पूरी तरह नहीं ढंक पाएगा। इसके सूर्य की डिस्क का बाहरी हिस्सा जलता हुआ दिखाई देगा।
3- नासा की रिपोर्ट के अनुसार, रिंग ऑफ फायर का समय सुबह 7.12 बजे (अमेरिकी समयानुसार) शुरू होगा और 1 मिनट 52 सेकंड तक चलेगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद चांद की छाया सोलर डिस्के से धीरे-धीरे हट जाएगी।
4- साल के पहले सूर्यग्रहण को सिर्फ कुछ ही लोग देख पाएंगे। रिंग ऑफ फायर इफेक्ट का मार्ग अंटार्कटिका के हिस्से से होकर गुजरेगा। हालांकि, यह नजारा बर्फीले महाद्वीप पर रहने वाले लाखों पेंगुइन को कन्फ्यूज कर सकता है।
5- इसके अलावा दक्षिणी अमेरिका के सबसे दक्षिणी छोर और दक्षिण अफ्रीका के साथ प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को काटता हुए जाएगा।
6- भारत से इस शानदार घटना को नहीं देखा जा सकेगा क्योंकि सूर्यग्रहण का मार्ग अंटार्कटिका से होकर गुजर रहा है।
7- अंटार्कटिका में भी इसे देखने वाले बहुत कम लोग होंगे। ग्रहण के रास्ते में केवल दो रिसर्च स्टेशन हैं, जहां पर वैज्ञानिक रहते हैं।
सूर्यग्रहण क्या है?
सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो उस समय होती है जब धरती का चंद्रमा चक्कर लगाते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। यह आसमान की अनोखी ज्योमेट्री की वजह से होता है। पृथ्वी का चांद आकार में सूरज से 400 गुना छोटा है। वहीं, चांद की तुलना में सूरज पृथ्वी से 400 गुना ज्यादा दूर है। इस कॉस्मिक संयोग की वजह से दोनों पिंड आसमान में हमारी आंख से एक ही साइज के दिखते हैं। ऐसे में जब चंद्रमा सूर्य के सामने आता है तो उसकी डिस्क को ढंक लेता है। इस यह घटना ही सूर्यग्रहण कहलाती है।






