हाल ही में ईरान की राजनीति से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यह रिपोर्ट ईरान के सर्वोच्च नेता के बेटे मुस्तबा खामेनेई की सेहत और निजी जीवन से जुड़ी बताई जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों में यह दावा किया गया है कि मोजतबा खामनेई को एक समय गुप्त रोग की समस्या का सामना करना पड़ा था। बताया जाता है कि इसी वजह से उनकी शादी भी काफी देर से हुई और उन्हें इलाज के लिए कई बार ब्रिटेन जाना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार मोजतबा खामनेई लंदन के प्रसिद्ध अस्पतालों में अपना इलाज भी करवाया था। कहा जाता है कि इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन की कई यात्राएं की और एक बार तो लगभग 2 महीने तक वहीं रहे। बताया यह भी जा रहा है कि परिवार की ओर से उन पर वारिस पैदा करने का दबाव था। कुछ लीक हुए दस्तावेज जिन्हें बाद में विकिलिक्स से जोड़ा गया। यह तक संकेत देते हैं कि उस समय परिवार चाहता था कि वह जल्द से जल्द पिता बने। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाज के बाद ही उनकी पत्नी गर्भवती हुई और उनके घर में बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम अली रखा गया।
अपने दादा और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नाम पर। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब सवाल उठता है कि यह गुप्त रोग समस्या थी क्या? मेडिकल भाषा में इसे एरेक्टाइल डिस्फंक्शनल कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या अक्सर 40 साल से अधिक उम्र के पुरुष में देखी जाती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे हाई ब्लड प्रेशर, अत्याधिक तनाव, हार्मोनल असंतुलन या ब्लड शुगर की समस्या। आज दुनिया भर के लाखों पुरुष इस समस्या से भी प्रभावित है। हालांकि सही इलाज और बेहतर जीवन शैली और मेडिकल सलाह से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीच यह भी खबर आई कि मुस्तबा अब सुप्रीम लीडर भी बन चुके हैं। खासकर अपने पिता के जाने के बाद अभी तक इसे कई बार अमेरिका का वॉर प्रोपोगेंडा भी बताया जा रहा है।
मोजतबा खामेनेई कौन हैं?
अली खामेनेई के निधन के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता बनने और सेना, न्यायपालिका और प्रमुख नीतिगत निर्णयों पर पूर्ण नियंत्रण संभालने के लिए तैयार हैं। मोजतबा खामेनेई अपने पिता के सभी दायित्वों को संभालेंगे। खबरों के अनुसार, अमेरिकी-इजराइल अभियानों के दौरान उन्हें सुर्खियों में लाने से संभावित जोखिमों को लेकर धर्मगुरुओं के बीच चिंताएं बनी हुई हैं, फिर भी आईआरजीसी (आंतरिक महाशक्ति आयोग) उनके उत्तराधिकार का समर्थन कर रहा है।




