Friday, February 27, 2026
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दर्द से जूझता रहा ड्राइवर, फिर भी मौत से पहले दिखाया साहस, चलती बस में बचाई 18 जिंदगियां

दर्द से जूझता रहा ड्राइवर, फिर भी मौत से पहले दिखाया साहस, चलती बस में बचाई 18 जिंदगियां
दर्द से जूझता रहा ड्राइवर, फिर भी मौत से पहले दिखाया साहस, चलती बस में बचाई 18 जिंदगियां

Driver: हैदराबाद से विजयवाड़ा जा रही आंध्र प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (APSRTC) की एक बस में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ड्राइवर (Driver) के सीने में तेज दर्द उठा। मियापुर से विजयवाड़ा जा रही एपीएसआरटीसी बस में सवार 18 यात्रियों की जान उस वक्त खतरे में आ गई, लेकिन दिल का दौरा पड़ने के बावजूद ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए बड़ा हादसा होने से रोक लिया।

Driver ने दिखाया साहस

Driver

दरअसल, विजयवाड़ा के गोल्लापुड़ी निवासी 39 वर्षीय कटरापु नागराजू रोज (Driver) की तरह ड्यूटी पर निकले थे और अमरावती एसी बस चला रहे थे। व्यस्त हैदराबाद-विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर चौटुप्पल इलाके के पास पहुंचते ही उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सीने में असहनीय दर्द के बावजूद नागराजू घबराए नहीं। उन्होंने पूरी सूझबूझ के साथ स्टीयरिंग पर नियंत्रण बनाए रखा और चलती बस को सुरक्षित रूप से सर्विस रोड की ओर मोड़ दिया।

18 जिंदगियों की बचाई जान

नागराजू (Driver) ने समझदारी दिखाते हुए बस को सड़क किनारे सुरक्षित तरीके से रोक दिया, जिससे उसमें सवार सभी 18 यात्रियों की जान बच गई। इसके बाद वह बस से उतरकर पास के एक निजी क्लिनिक की ओर मदद लेने बढ़े, लेकिन कुछ ही पलों में बेहोश होकर गिर पड़े। यह देख बस में सवार यात्री और स्थानीय लोग तुरंत उनकी मदद के लिए दौड़े। पहले उन्हें ऑटो-रिक्शा से एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इसके बाद लोगों ने बिना देर किए उन्हें यादद्री भुवनगिरी जिले के चौटुप्पल सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां ईसीजी जांच होने के बाद लोगों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बस में सवार यात्री ने कही ये बात

आपको बता दें, बस में सवार एक यात्री ने बताया कि, “अपने आखिरी पलों में ड्राइवर (Driver) नागराजू किसी हीरे से कम नहीं थे। वह चाहें तो अपनी जान बचाने के लिए बस को सीधे किसी अस्पताल की ओर ले जा सकते थे, लेकिन उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हम सभी पूरी तरह सुरक्षित रहें। अगर उस वक्त वह हिम्मत हार जाते, तो नेशनल हाईवे पर दौड़ रही बस के कारण 18 यात्रियों की जान के साथ-साथ सड़क पर चल रहे दूसरे वाहनों को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता था।”

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