मेरठ में एक पाकिस्तानी ISI एजेंट की बेटी और उसकी मां ने 34 साल तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रहकर सुरक्षा जोखिम पैदा किया. पड़ोसी की शिकायत के बाद जांच में फर्जीवाड़ा और संवेदनशील स्थानों की यात्राओं का खुलासा हुआ.

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में करीब 34 साल पुराना उलझा हुआ मामला सामने आया है. जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. आरोप है कि एक पाकिस्तानी ISI एजेंट की बेटी और उसकी मां 34 साल तक भारत में रहकर फर्जी दस्तावेजों और पहचान के सहारे न केवल सामान्य जीवन जी रही थीं, बल्कि देश की संवेदनशील सुरक्षा जानकारी तक पहुंच सकती थीं.
यह मामला तब सामने आया जब पड़ोसी की शिकायत पर पुलिस और LIU की जांच शुरू हुई. जांच में खुलासा हुआ कि मां-बेटी ने बर्थ सर्टिफिकेट, आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसी फर्जी IDs बनवाकर अपने निवास और यात्राओं को वैध दिखाया. मेरठ में रहकर उन्होंने विभिन्न देशों की यात्राओं और आर्मी हेडक्वार्टर की विजिट भी की.
ISI एजेंट की बेटी क्यों भारत में आई?
1992 में पाकिस्तानी ISI एजेंट हनीफ अहमद ने अपनी बेटी नाजिया उर्फ सबा को भारत भेजा. सबा की शादी मेरठ के ब्रासबैंड व्यवसायी फरहत मसूद से कराई गई. सबा ने पाकिस्तान में जन्मी अपनी बेटी एमन को भारत लाकर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, वोटर ID और पासपोर्ट बनवाया. जांच में यह भी सामने आया कि सबा के पास दो नामों से दो वोटर IDs थी. सबा और उसकी बेटी ने भारत में आर्मी हेडक्वार्टर, विभिन्न मंत्रालयों और विदेशी एंबेसीज़ का दौरा किया. इसके अलावा दोनों ने विदेश यात्राएं भी की.
34 साल तक कैसे छुपी रहीं मां-बेटी?
सबा और उसकी बेटी तीन दशकों तक पुलिस, LIU और इंटेलिजेंस की निगरानी से बचते रहे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उनका रहस्य तब उजागर हुआ जब पड़ोसी की शिकायत पर जांच शुरू हुई और फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई. दिल्ली गेट, मेरठ में सबा फरहत और उसकी बेटी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता के नियमों का उल्लंघन करते हुए फर्जी दस्तावेजों के जरिए 34 साल तक भारत में रहकर संवेदनशील स्थानों का दौरा किया.




