Wednesday, February 25, 2026
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टमाटर से आएगी ‘मक्खन वाले पॉपकॉर्न’ की खुशबू! चीनी वैज्ञानिकों ने लैब में किया करिश्मा!..

टमाटर से आएगी ‘मक्खन वाले पॉपकॉर्न’ की खुशबू! चीनी वैज्ञानिकों ने लैब में किया करिश्मा!..
टमाटर से आएगी ‘मक्खन वाले पॉपकॉर्न’ की खुशबू! चीनी वैज्ञानिकों ने लैब में किया करिश्मा!..

नई दिल्ली: टमाटर हमारी रसोई का एक ऐसा हिस्सा है जिसके बिना सब्जी का स्वाद अधूरा लगता है. लेकिन अक्सर ग्राहकों की एक शिकायत रहती है कि बाजार में मिलने वाले टमाटरों में वो पुरानी महक और स्वाद नहीं मिलता. इस समस्या को दूर करने के लिए चीनी वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. उन्होंने जीन एडिटिंग तकनीक की मदद से दुनिया के पहले ऐसे टमाटर विकसित किए हैं, जिनमें से ‘बटर वाले पॉपकॉर्न’ (Buttered Popcorn) जैसी दिलकश खुशबू आती है. यह रिसर्च मुख्य रूप से इसलिए की गई है ताकि ट्रांसपोर्ट और लंबे समय तक स्टोरेज के दौरान टमाटरों का जो स्वाद और खुशबू फीकी पड़ जाती है, उसे बरकरार रखा जा सके.

क्यों खो जाती है टमाटर की असली खुशबू?
दुनियाभर में टमाटर सबसे ज्यादा उगाई और खाई जाने वाली सब्जियों में से एक है. इसके चटक लाल रंग और पोषक तत्वों के साथ-साथ इसकी सुगंध भी बहुत अहम होती है. रिसर्च बताती है कि जैसे ही टमाटर को पौधे से तोड़ा जाता है, उसमें मेटाबॉलिक बदलाव शुरू हो जाते हैं. इसके चलते ट्रांसपोर्टेशन के दौरान इसकी सुगंध धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जब तक टमाटर खेत से आपकी थाली तक पहुंचता है, तब तक इसकी वो खास महक काफी कम हो चुकी होती है. इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए वैज्ञानिकों ने ‘क्रिस्पर’ (CRISPR/Cas9) तकनीक का सहारा लिया.

वैज्ञानिकों ने टमाटर के दो मुख्य जीन्स में बदलाव करके यह कामयाबी हासिल की है. ‘जर्नल ऑफ इंटीग्रेटिव एग्रीकल्चर’ में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने ‘बेटााइन एल्डिहाइड डिहाइड्रोजनेज 2’ (BADH2) नाम के एक खास जीन की कार्यप्रणाली में बदलाव किया. उन्होंने पाया कि इस जीन को ब्लॉक करने से टमाटर में ‘2-एसिटाइल-1-पायरोलाइन’ (2-AP) नाम के ऑर्गेनिक कंपाउंड की मात्रा बढ़ जाती है. यही वो केमिकल है जो पॉपकॉर्न जैसी लाजवाब खुशबू के लिए जिम्मेदार होता है.

क्या इस बदलाव से टमाटर की क्वालिटी पर असर पड़ा?
अक्सर लोगों को डर रहता है कि जीन एडिटिंग से फल की पैदावार या सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. लेकिन डॉक्टर शेंगचुन जू और उनकी टीम ने अपनी रिसर्च में पाया कि इन म्यूटेंट टमाटरों में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं हुआ है. इन टमाटरों के पौधों की लंबाई, फूलों का समय, फलों का वजन और पोषक तत्व जैसे विटामिन-C बिल्कुल सामान्य थे. इतना ही नहीं, ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और ऑर्गेनिक एसिड (सिट्रिक और मेलिक एसिड) की मात्रा भी वैसी ही रही जैसी सामान्य टमाटरों में होती है. इसका मतलब यह है कि वैज्ञानिकों ने टमाटर की पैदावार से समझौता किए बिना उसके स्वाद और खुशबू में सुधार करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है.

क्या अब मार्केट में मिलेगा पॉपकॉर्न वाला टमाटर?
रिसर्च टीम के एक सदस्य पेंग झेंग का कहना है कि अब उनका अगला लक्ष्य इस खुशबू को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली किस्मों में शामिल करना है. जिस तरह बाजार में खुशबूदार चावल (जैसे बासमती) की अपनी एक अलग वैल्यू और पहचान होती है, ठीक उसी तरह ये सुगंधित टमाटर भी भविष्य में मार्केट की डिमांड और कीमत बढ़ा सकते हैं. यह तकनीक न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव देगी, बल्कि किसानों और विक्रेताओं के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है क्योंकि अब टमाटर की महक स्टोरेज में भी सुरक्षित रहेगी.

me.sumitji@gmail.com

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