Deepak Sharma Gaya Bihar Fraudster: पहले गरीबी ने बढ़ई बनाया. फिर सूरत में मजदूरी करते हुए उसने मजदूरों के सपने पढ़े. उसे समझ में आया कि हर किसी को अपना घर चाहिए, अपनी गाड़ी चाहिए और हर कोई कम समय में अमीर बनना चाहता है. बस फिर क्या था इन्हीं सपनों को उसने अपनी ठगी का हथियार बना लिया. लोग जुड़ते गए, पैसा जमा करते गए और उसकी जिंदगी बदलती चली गई. कहानी है बिहार के गया जी जिले के 28 वर्षीय दीपर कुमार की. जिसने लोगों को झूठे सपने दिखाकर 500 करोड़ की ठगी की और अब फरार है.

कोंच थाना क्षेत्र अंतर्गत गरारी पंचायत के औहालचक गांव का रहने वाला 28 वर्षीय दीपक कुमार शर्मा गरीबी के कारण बढ़ई का काम करने सूरत जाता था. उसके पिता गांव में बढ़ईगिरी करते थे. सूरत जाकर दीपक ने देखा कि बिहार समेत देश के अलगअलग राज्यों से आए मजदूर वहां काम करते हैं. सभी के अंदर पैसे कमाने की ललक है. किसी को अपना घर बनाना है, किसी को गाड़ी खरीदनी है तो किसी का सपना कम समय में अमीर बनने का है. लोगों की इसी चाहत को दीपक ने अपना हथियार बना लिया और ऐसा कथित ठगी का षड्यंत्र रचा कि आज उसके बनाए नेटवर्क की जांच 11 राज्यों तक पहुंच गई है. करीब 500 करोड़ की ठगी करने वाला दीपक शर्मा आज फरार है.
मामला राधास्वामी संगठन से जुड़ा है. दीपक पर आरोप है कि उसने गाड़ियों, सामानों और फ्लैट पर 40 से 90 फीसदी तक सब्सिडी दिलाने, कन्या विवाह में सहायता, आवास और निवेश जैसी योजनाओं का लालच देकर बड़ी संख्या में लोगों से रकम जमा कराई. विभिन्न मामलों और शिकायतों में ठगी की रकम सैकड़ों करोड़ रुपये बताई जा रही है. अकेले पटना में 150 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप सामने आया है. आरोप है कि लोगों से जमा रकम के जरिए दीपक ने अकूत संपत्ति बनाई और आलीशान जिंदगी जीने लगा.
गुजरात के सूरत में पैदा हुआ था दीपक
दीपक की कहानी जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही दिलचस्प उसका अतीत भी है. उसके पिता विमल कुमार शर्मा करीब तीन दशक पहले परिवार का भरणपोषण करने के लिए गुजरात के सूरत चले गए थे. वहां वह पारंपरिक बढ़ईगिरी करते थे. दीपक का जन्म भी सूरत में ही हुआ. वो पिता के काम में हाथ बंटाता था और मजदूरी करता था. करीब दस साल पहले परिवार सूरत से पटना आकर बस गया. पैतृक गांव औहालचक से परिवार का संपर्क नाममात्र का ही रह गया. गांव में दीपक के घर के नाम पर सिर्फ एक पुराना पक्का कमरा बताया जाता है, जो हमेशा बंद रहता है.
लेकिन पिछले कुछ सालों में गांव में दीपक की पहचान पूरी तरह बदल गई. ग्रामीणों के मुताबिक, जब भी वो कुछ घंटों के लिए गांव आता था तो स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर या थार जैसी महंगी गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचता था. सामान्य परिवार से निकलकर अचानक इतनी महंगी गाड़ियों और आलीशान जिंदगी तक पहुंचे दीपक को देखकर गांव वाले भी हैरान रहते थे. लोगों के बीच अक्सर चर्चा होती थी कि आखिर एक सामान्य पृष्ठभूमि वाले युवक के पास इतनी महंगी गाड़ियों का खर्च और इतनी संपत्ति कहां से आ रही है.
ऐसे जीतता था भोलेभाले लोगों का भरोसा
इसी दौरान दीपक ने पटना में राधास्वामी संगठन का सेंटर खोला. वो इसे सामाजिक संगठन के तौर पर प्रचारित करता था. आरोप है कि किसी धार्मिक संगठन से मिलताजुलता नाम रखने के पीछे लोगों में भरोसा पैदा करने की रणनीति थी. इसके बाद कन्या दान योजना, वाहन योजना, आवास योजना और निवेश योजना के नाम पर लोगों को भारी छूट और लाभ का लालच दिया जाने लगा. जिन लोगों को गाड़ी चाहिए थी, उन्हें वाहन पर भारी सब्सिडी का भरोसा दिया गया. जिन्हें घर चाहिए था, उन्हें सस्ते में मकान या फ्लैट देने का सपना दिखाया गया. बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता और निवेश करने वालों को आकर्षक लाभ का भरोसा दिया गया. धीरेधीरे लोग जुड़ते गए और कथित तौर पर अपनी मेहनत की कमाई संगठन में जमा करते गए.
पटना के जक्कनपुर और हनुमान नगर में सेंटर खोलने के बाद दीपक ने अपना नेटवर्क जहानाबाद, अरवल, गया और नवादा तक फैलाया. इसके लिए बड़ी संख्या में एजेंट बनाए गए. संगठन की वेबसाइट के अनुसार, 11 राज्यों में उसके 50 हजार से अधिक एजेंट होने का दावा किया गया था. एजेंट गांवगांव और शहरशहर लोगों को संगठन की योजनाओं से जोड़ते थे. आरोप है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से संगठन का विस्तार होता गया और लोगों से बड़ी रकम जमा कराई गई.
राजनीति में ली एंट्री, लेकिन हार गया चुनाव
दीपक ने संगठन के जरिए अरवल में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई. यहां हजारों लोगों को कथित तौर पर लोन और योजनाओं से जोड़ा गया तथा सैकड़ों लोगों को एजेंट बनाया गया. इसके बाद साल 2024 में उसने राजनीति में भी कदम रखा. दीपक ने जहानाबाद लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. हालांकि, चुनाव में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा. उसे महज 8,970 वोट मिले और उसकी जमानत भी जब्त हो गई. चुनावी हलफनामे में उसने करीब 1.74 करोड़ रुपये की चल संपत्ति घोषित की थी. इसमें फॉर्च्यूनर कार और दो महंगी बाइक का भी उल्लेख था. अचल संपत्ति के नाम पर उसने कुछ नहीं बताया था.
चुनाव हारने के बाद भी दीपक की आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं हुई. वर्ष 2025 में उसने अपने पैतृक गांव औहालचक में करीब 20 लाख रुपये का भुगतान कर एक बीघा कृषि भूमि खरीद ली. महंगी गाड़ियों में चलने और अब गांव में लाखों रुपये की जमीन खरीदने के बाद उसकी आय के स्रोत को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल और गहरे हो गए. लोगों को लगने लगा था कि उसकी कमाई का कोई बड़ा स्रोत जरूर है.
दूसरे राज्यों से भी आने लगीं शिकायतें
इस बीच राधास्वामी संगठन के कथित नेटवर्क की शिकायतें दूसरे राज्यों से भी सामने आने लगीं. झारखंड के गिरिडीह जिले में भी संगठन से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए. पचंबा पुलिस ने राधास्वामी संगठन के झारखंड प्रभारी बताए जा रहे मुकेश सिन्हा को उसके घर से हिरासत में लिया. आरोप है कि मुकेश सिन्हा ने राधास्वामी योजना के नाम पर हजारों लाभुकों से करोड़ों रुपये लिए और बाद में फरार हो गया. मुकेश के पकड़े जाने की खबर मिलते ही अपने कथित तौर पर डूबे पैसे वापस मिलने की उम्मीद में बड़ी संख्या में लाभुक पचंबा थाना पहुंचने लगे.
मुकेश सिन्हा को लेकर भी स्थानीय लोगों ने कई सवाल उठाए हैं. लोगों के मुताबिक, वो कभी एक क्लीनिक में पर्ची काटने का काम करता था. बाद में उसने ट्रैक्टर भी चलाया. इसके बाद वो राधास्वामी संगठन से जुड़ा और आरोप है कि देखते ही देखते करोड़ों रुपये की संपत्ति बना ली. स्थानीय लोगों का ये भी दावा है कि फरार होने से कुछ महीने पहले उसने जन्मदिन की पार्टी में ही कई लाख रुपये खर्च किए थे. अब पुलिस उसकी संपत्ति और आय के स्रोत की भी जांच करने की बात कह रही है.
गिरिडीह में लाभुकों की शिकायतों के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया. दर्जनों लाभुकों ने थाने में लिखित शिकायत देकर कथित ठगी की जानकारी दी. शिकायतों में आरोप लगाया गया कि वाहन, मकान और दूसरी योजनाओं के नाम पर उनसे रकम ली गई. कई लोगों का कहना है कि उन्होंने संगठन के एजेंटों पर भरोसा करके अपनी जिंदगी की जमापूंजी तक लगा दी, लेकिन बाद में न तो योजना का लाभ मिला और न ही रकम वापस हुई.
पुलिस ने किसकिस को किया गिरफ्तार
लिखित शिकायतों के बाद पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष बताए जा रहे मुकेश सिन्हा, उनकी पत्नी और संगठन की मीडिया प्रभारी बताई जा रही अनीशा सिन्हा, सुमित सिन्हा और सहयोगी सुबोध सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पुलिस अब संगठन से जुड़े दूसरे लोगों, एजेंटों, बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है.
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि राधास्वामी संगठन के नाम पर देश के अलगअलग हिस्सों में कितने लोगों से कितनी रकम जमा कराई गई और वह पैसा आखिर कहां गया. संगठन के 11 राज्यों में नेटवर्क और 50 हजार से अधिक एजेंट होने के दावे की वास्तविकता क्या है, इसकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी. इसके साथ ही दीपक कुमार शर्मा की संपत्ति, महंगी गाड़ियों, जमीन की खरीद और उसकी आय के वास्तविक स्रोत की जांच भी इस पूरे मामले की अहम कड़ी बन सकती है.
एक समय सूरत में मजदूरी और बढ़ईगिरी करने वाला दीपक कुमार शर्मा आज करोड़ों की कथित ठगी के आरोपों के बीच पुलिस की तलाश में है. जिस सपने को उसने सूरत में मजदूरों की आंखों में देखा था जल्दी अमीर बनने, घर और गाड़ी पाने का सपना. आरोप है कि उसी सपने को उसने अपने कथित नेटवर्क का सबसे बड़ा हथियार बना लिया. अब उन हजारों लोगों की नजर पुलिस की जांच पर है, जिन्होंने बेहतर जिंदगी के सपने के साथ अपना पैसा लगाया था और आज उसी पैसे की वापसी के लिए थाने के चक्कर लगा रहे हैं.



