Varuna Riverfront Varanasi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को जल्द ही एक और विश्वस्तरीय सौगात मिलने जा रही है. साबरमती और गोमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर अब काशी में भी ‘वरुणा रिवर फ्रंट’ का निर्माण किया जाएगा. वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुलकित बोरा और ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख नीरज कुमार बंसल के बीच इस 260.61 करोड़ की बड़ी परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

वीडीए के वीसी पुलकित बोरा ने बताया कि वरुणा नदी काशी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा रही है. अब इसके तटों का सुनियोजित और आधुनिक विकास किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के तहत नदी के किनारों पर आधुनिक नगरीय सुविधाएं और खूबसूरत हरित क्षेत्र विकसित होंगे. सार्वजनिक उपयोग के लिए खुले स्थल, सुंदर पैदल पथ और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई नए एडवेंचर और मनोरंजन के साधन तैयार किए जाएंगे.
यह पूरा प्रोजेक्ट भारत सरकार के वॉटर बॉडी रिजुवेनेशन मिशन के उद्देश्यों के बिल्कुल अनुकूल है, जिसका मुख्य लक्ष्य जल संसाधनों का संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देना है.
चरणबद्ध तरीके से तैयार होगी DPR
इस परियोजना के तहत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने से लेकर निर्माण कार्यों के पूरा होने तक की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाएगा. ओएनजीसी के महाप्रबंधक अटल श्रीवास्तव ने इस मौके पर कहा कि यह साझेदारी काशी के सतत विकास और वाराणसी को एक आधुनिक, स्वच्छ, हरित और वैश्विक पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी.
पर्यावरणविदों ने कहा ‘वरुणा को पुनर्जीवन देने वाला प्रोजेक्ट’
नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे और प्रख्यात पर्यावरणविद प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए इसे वरुणा नदी के लिए संजीवनी बताया है. प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी ने बताया कि रिवरफ्रंट बनने से वरुणा नदी को कई बड़े फायदे होंगे.
बोले वरुणा पर रिवरफ्रंट बनने से इसके किनारों की मिट्टी को एक मजबूत बांध का रूप मिल जाएगा. इससे तटों का कटाव पूरी तरह रुकेगा और नदी में बहकर जाने वाली मिट्टी और गाद पर रोक लगेगी. सिल्टेशन रुकने से वरुणा नदी की गहराई स्वतः बढ़ेगी और उसकी वॉटर होल्डिंग कैपेसिटी में भी भारी इजाफा होगा. इसके अलावा, बड़े पैमाने पर होने वाले प्लांटेशन से पर्यावरण सुधरेगा और इंसानों द्वारा होने वाला प्रदूषण भी थमेगा.
प्रयागराज से शुरू होकर काशी में गंगा से मिलती है वरुणा
वरुणा नदी का भूगोल बेहद दिलचस्प है. यह नदी प्रयागराज के फूलपुर स्थित मेलहम से निकलती है. करीब 100 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय करने के बाद यह वाराणसी के रमईपुर और जगतपुर क्षेत्र से जिले में प्रवेश करती है. इसके बाद वाराणसी सदर इलाके से करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई यह सरायमोहना क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध आदिकेशव घाट पर जाकर पतित पावनी गंगा नदी में मिल जाती है. इसी 6 किलोमीटर के शहरी दायरे को अब एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन में तब्दील किया जा रहा है.



