Friday, March 13, 2026
Business

सेंसेक्स 1500 अंक टूटा, निफ्टी 23200 के नीचे फिसला; जानिए बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें!..

सेंसेक्स 1500 अंक टूटा, निफ्टी 23200 के नीचे फिसला; जानिए बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें!..
सेंसेक्स 1500 अंक टूटा, निफ्टी 23200 के नीचे फिसला; जानिए बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें!..

Stock Market Crash Today: मिडिल ईस्ट संकट ने भारत के शेयर बाजार में सबसे ज्यादा उथल-पुथल मचा कर रख दिया है. शुक्रवार को बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 और सेंसेक्स में गिरावट जारी रही. इस कारोबारी सेशन में भारी नुकसान हुआ है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बाजारों में बिकवाली जारी रही. क्योंकि शुक्रवार को मिडिल ईस्ट संकट बढ़ने से तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं. रुपया भी डॉलर के मुकाबले 92.39 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया है. ये बाजार के सेंटिमेंट पर दबाव डालने वाला एक और अहम कारण था. निफ्टी 50 में 1.79 फीसदी की गिरावट आई और यह 23,216.65 के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, सेंसेक्स में 1493.01 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई. ये 1.96 फीसदी गिरकर 74,541.41 के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गया है.

क्यों बढ़ीं तेल की कीमतें?
तेल की कीमतों में ये उछाल तब आया, जब शुक्रवार को ईरान के नेतृत्व ने अमेरिका के खिलाफ अपनी बयानबाजी तेज कर दी. ईरान ने खाड़ी के मिडिल ईस्ट देशों से इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने की अपील की है.

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर 92.3950 पर गिर गया. इसकी वजह मजबूत अमेरिकी करेंसी, कमजोर इक्विटी बाजार और कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें थीं. ये गिरावट तब आई जब डॉलर इंडेक्स तीन महीने के उच्चतम स्तर 92.85 पर पहुंच गया. जबकि ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, इससे आयात से जुड़े दबाव बने रहे.

FII ने की बिकवाली
विदेशी फंड का बाहर जाना बाजार के सेंटिमेंट पर एक बड़ा बोझ बना हुआ है. FIIs द्वारा लगातार बिकवाली का असर बाजार पर पड़ रहा है, क्योंकि वैश्विक निवेशक बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचने की कोशिश में भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम कर रहे हैं. एक्सचेंजों के डेटा से पता चला कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अपनी भारी बिकवाली जारी रखी है. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को स्थिर करने वाले खरीदारों के रूप में सामने आए.

तेल की कीमतें
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी बाजार के तनाव को और बढ़ा रही है. तेल की कीमतों में उछाल इसलिए आया है क्योंकि ये डर बढ़ रहा है कि ये ग्लोबल संघर्ष ग्लोबल सप्लाई चेन को बाधित कर सकता है और तेल की उपलब्धता पर और दबाव डाल सकता है. खास बात ये है कि शुक्रवार को ब्रेंट तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं हैं.

me.sumitji@gmail.com

Leave a Reply