बरसाने वाले रमेश बाबा आज 90 साल की आयु में ब्रह्मलीन हो गए. उनका अंतिम संस्कार बुधवार की सुबह 10 बजे गहवर में किया जाएगा. इस खबर से भगवान कृष्ण की क्रीणा स्थली ब्रजभूमि में वास कर रहे संत समाज को आज बड़ा आघात लगा है. इस खबर से ना केवल बरसाना, बल्कि पूरे ब्रज क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है. रमेश बाबा का पूरा जीवन ब्रज सेवा, गौसेवा, संत परंपरा और राधारानी की भक्ति को समर्पित रहा. उन्हें ब्रज में बड़ी श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था.

आज तक बरसाना छोड़कर बाहर नहीं जाने वाले रमेश बाबा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए देश के अलगअलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बरसाना पहुंचते रहे हैं. अब उनके देहावसान की खबर से उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई है. बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आश्रम पर पहुंच रहे हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं हजारों की तादात में सोशल मीडिया यूजर डिजीटल प्लेटफार्म पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे है.

विरक्त संत और पर्यावरणविद थे रमेश बाबा

रमेश बाबा के निधन से बरसाना के अलावा वृंदावन, गोवर्धन समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में उनके अनुयायियों में गहरी भावुकता देखने को मिल रही है. आश्रम से जुड़े सुनील कुमार के मुताबिक रमेश बाबा विरक्त संत और पर्यावरणविद थे. वह बरसाना स्थित गहवर वन के मान मंदिर में रहते थे. उनका जन्म 1938 में प्रयागराज में हुआ था और 15 साल की उम्र में वह ब्रज आ गए थे. यहांउन्होंने बरसाना के राधा रानी मंदिर में मृदंग बजा कर राधा नाम का प्रचार किया. इसी दौरान उन्होंने ब्रह्मांचल पर्वत पर मान मंदिर की स्थापना की. यहीं पर6 अक्टूबर 2026 को 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया.

इसलिए मिला था पद्म पुरस्कार

रमेश बाबा ने बरसाना में ‘माता जी गौशाला’ की स्थापना की. यह गौशाला ब्रज क्षेत्र ही नहीं देश की सबसे बड़ी गौशालाओं में गिनी जाती है. इसमें हज़ारों निराश्रित व वृद्ध गायों की सेवा होती है. रमेश बाबा ने ब्रज की पहाड़ियों को बचाने, वनों के संरक्षण और बदहाल हो चुकी यमुना नदी को शुद्ध करने के लिए कई बड़े आंदोलन व पदयात्राएं चलाईं. इसकी वजह से उन्हें साल 2019 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.