स्पेन के शहर सेउटा में हाल ही में कई हजार प्रवासी मोरक्को से पहुंचे हैं. ये सभी प्रवासी अवैध रास्तों से यहां पहुंचे हैं. इससे सेउटा की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है. स्थानीय प्रशासन ने स्पेन से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के साथ ही सेना भेजने की मांग की है. स्पेन ने आपातकाल की मांग नामंजूर कर दी है. इससे स्पेन लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा है. वे सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ लिख रहे हैं. बोल रहे हैं. सेउटा शहर को लेकर लम्बा विवाद रहा है जो आज भी जारी है.

मोरक्को की धरती पर बसा यूरोपीय देश स्पेन का शहर सेउटा को लेकर चल रहा विवाद क्या है? आखिर यह खत्म क्यों नहीं हो रहा? विवाद की असली वजह क्या है? आइए, अवैध प्रवासियों की वजह से उपजे ताजे विवाद के बाद इस पूरे मामले को समझते हैं.
सेउटा कहां स्थित है?
सेउटा भूमध्य सागर के किनारे स्थित है. इसके चारों ओर लगभग मोरक्को का क्षेत्र है. शहर की जमीन पर मोरक्को के साथ सीमा लगती है. समुद्र के पार स्पेन का मुख्य भूभाग है. सेउटा का क्षेत्रफल बहुत छोटा है. यहां करीब 85 हजार लोग रहते हैं. शहर में ईसाई, मुस्लिम, यहूदी और अन्य समुदायों के लोग रहते हैं. स्पेनिश और अरबी संस्कृति का प्रभाव यहां साफ दिखाई देता है. सेउटा के साथ मेलिला नाम का दूसरा शहर भी है. वह भी अफ्रीका में स्थित स्पेन का क्षेत्र है. सेउटा और मेलिला ही यूरोप और अफ्रीका के बीच दो प्रमुख स्थलीय सीमाएं बनाते हैं.
सेउटा का ऐतिहासिक महत्व
सेउटा का इतिहास बहुत पुराना है. यह शहर समुद्री व्यापार और सैन्य दृष्टि से हमेशा अहम रहा है. यहां फोनीशियाई, रोमन, बाइजेंटाइन और अरब शासकों का प्रभाव रहा. 15वीं सदी में पुर्तगाल ने सेउटा पर कब्जा किया. साल 1415 में पुर्तगाली सेना ने इस शहर को अपने नियंत्रण में लिया. बाद में स्पेन और पुर्तगाल के राजतंत्र एक समय के लिए एक साथ आ गए. इस दौर में सेउटा का संबंध स्पेन से मजबूत हुआ. वर्ष 1668 में पुर्तगाल ने औपचारिक रूप से सेउटा पर स्पेन के अधिकार को स्वीकार कर लिया. इसके बाद से सेउटा स्पेन के प्रशासन में है. स्पेन इसी लंबे प्रशासनिक इतिहास को अपने दावे का मुख्य आधार बताता है.
प्रवासी तैरकर सेउटा पहुंचे. फोटो: AP/PTI.
मोरक्को का दावा क्या है?
मोरक्को का तर्क भूगोल और उपनिवेशवाद से जुड़ा है. उसका कहना है कि सेउटा अफ्रीकी भूमि पर स्थित है. यह मोरक्को के उत्तरी तट का स्वाभाविक हिस्सा है, इसलिए इसे मोरक्को को वापस मिलना चाहिए. मोरक्को सेउटा और मेलिला को यूरोपीय उपनिवेशवाद का बचा हुआ निशान मानता है.
मोरक्को का कहना है कि जब कई देशों को उपनिवेशवाद से आजादी मिल चुकी है, तो अफ्रीकी जमीन पर यूरोपीय नियंत्रण क्यों बना हुआ है? मोरक्को अक्सर यह भी कहता है कि स्पेन का दावा जिब्राल्टर पर उसके रुख से मेल नहीं खाता. स्पेन जिब्राल्टर को ब्रिटेन से वापस लेने की मांग करता है. वहीं, वह सेउटा और मेलिला पर अपना अधिकार बनाए रखना चाहता है. मोरक्को इस स्थिति को दोहरा मानदंड बताता है.
बड़ी संख्या में लोग काम, व्यापार और परिवार से जुड़े कारणों से सीमा पार करते हैं. फोटो: AP/PTI.
स्पेन का पक्ष क्या है?
स्पेन का कहना है कि सेउटा कोई उपनिवेश नहीं है. यह देश का स्थायी और संवैधानिक हिस्सा है. शहर में रहने वाले लोग स्पेनिश नागरिक हैं. वे स्पेन के चुनावों में भाग लेते हैं और स्पेनिश कानूनों के तहत रहते हैं. स्पेन यह भी कहता है कि सेउटा का मोरक्को के आधुनिक राष्ट्र बनने से बहुत पहले से अलग प्रशासनिक इतिहास रहा है. उसके अनुसार, सेउटा पर स्पेन का नियंत्रण किसी अस्थायी सैन्य कब्जे जैसा नहीं है. स्पेन के लिए सेउटा केवल एक छोटा शहर नहीं है. यह उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ा प्रश्न है. इसलिए स्पेन इस मुद्दे पर किसी तरह की बातचीत या क्षेत्रीय बदलाव के संकेत नहीं देता.
यूरोपीय संघ से क्या है संबंध?
सेउटा स्पेन का हिस्सा है, इसलिए यह यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा भी है. कोई व्यक्ति मोरक्को से सेउटा में प्रवेश करता है, तो वह प्रभावी रूप से यूरोपीय संघ की सीमा में पहुंच जाता है. यही कारण है कि सेउटा प्रवासन के लिए एक प्रमुख रास्ता बन गया है. अफ्रीका के कई देशों से लोग बेहतर रोजगार, सुरक्षा और जीवन की उम्मीद में यूरोप पहुंचना चाहते हैं. कुछ लोग युद्ध, गरीबी, राजनीतिक दमन या जलवायु संकट से भी भागते हैं. सेउटा पहुंचना उनके लिए यूरोप तक पहुंचने का एक संभावित रास्ता दिखाई देता है, लेकिन यह रास्ता बेहद जोखिम भरा है.
बॉर्डर पर प्रवासियों को रोकने के लिए जवानों की तैनाती की गई. फोटो: AP/PTI.
प्रवासन संकट का बड़ा केंद्र है सेउटा
सेउटा की सीमा पर ऊंची बाड़, निगरानी उपकरण और सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. इसके बावजूद लोग सीमा पार करने की कोशिश करते हैं. कुछ लोग बाड़ पर चढ़ने का प्रयास करते हैं. कुछ लोग समुद्र के रास्ते तैरकर आने की कोशिश करते हैं. कई प्रवासी मोरक्को के नजदीकी शहर फनिदेक से सेउटा की ओर बढ़ते हैं. कुछ लोग पास के तटीय इलाकों से समुद्र पार करने की कोशिश करते हैं.
यह यात्रा जानलेवा हो सकती है. तेज लहरें, थकान और भीड़ के कारण कई लोगों की मौत की खबरें भी सामने आती रही हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वर्ष 2021 में यह मुद्दा बहुत चर्चा में आया था. उस समय बहुत कम समय में हजारों लोग मोरक्को से सेउटा में दाखिल हो गए थे. उस दौर में मोरक्को ने सीमा नियंत्रण ढीला किया था. यह स्पेन और मोरक्को के बीच पश्चिमी सहारा मुद्दे पर तनाव के समय हुआ था. इस घटना ने दिखाया कि सीमा नियंत्रण दोनों देशों के रिश्तों में दबाव बनाने का साधन भी बन सकता है.
सेउटा विवाद और पश्चिमी सहारा
सेउटा विवाद को पश्चिमी सहारा से अलग करके नहीं देखा जा सकता. पश्चिमी सहारा उत्तरी अफ्रीका का एक विवादित क्षेत्र है. मोरक्को इस पर अपना दावा करता है. वहां की स्वतंत्रता समर्थक राजनीति भी लंबे समय से सक्रिय है. स्पेन का पश्चिमी सहारा से ऐतिहासिक संबंध रहा है. जब भी स्पेन का रुख मोरक्को की अपेक्षा से अलग होता है, दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है. ऐसे समय में सेउटा सीमा और प्रवासन का मुद्दा ज्यादा संवेदनशील बन जाता है, इसलिए सेउटा केवल स्थानीय विवाद नहीं है. यह बड़े क्षेत्रीय और कूटनीतिक समीकरणों का हिस्सा है.
सीमा पर रहने वाले लोगों की मुश्किलें
सेउटा और मोरक्को के बीच रोजमर्रा का रिश्ता भी बहुत गहरा है. बड़ी संख्या में लोग काम, व्यापार और परिवार से जुड़े कारणों से सीमा पार करते हैं. मोरक्को के कई नागरिक सेउटा में काम करते रहे हैं. शहर की अर्थव्यवस्था भी आसपास के मोरक्को क्षेत्र से प्रभावित होती है. जब सीमा बंद होती है या नियंत्रण सख्त होता है, तो सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ता है. छोटे व्यापारी, दैनिक मजदूर और सीमा पार काम करने वाले लोग मुश्किल में आ जाते हैं. परिवारों के मिलनेजुलने पर भी असर पड़ता है.
क्या है आगे का रास्ता?
सेउटा विवाद का त्वरित समाधान आसान नहीं है. स्पेन अपने अधिकार से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता. मोरक्को भी अपना दावा छोड़ने के संकेत नहीं देता, इसलिए यह मुद्दा आने वाले समय में भी बना रह सकता है. फिर भी दोनों देशों के लिए संवाद जरूरी है. सीमा सुरक्षा, मानव तस्करी, प्रवासियों की सुरक्षा, व्यापार और स्थानीय लोगों की जरूरतों पर मिलकर काम करना होगा. प्रवासियों को केवल सुरक्षा समस्या मानना पर्याप्त नहीं है. उनके पीछे गरीबी, हिंसा और अवसरों की कमी जैसे बड़े कारण भी हैं. सेउटा एक छोटा शहर है, लेकिन इसका सवाल बहुत बड़ा है. यह बताता है कि इतिहास की पुरानी सीमाएं आज भी राजनीति और इंसानी जिंदगी को प्रभावित करती हैं. अफ्रीका की भूमि पर यूरोप का यह छोटासा हिस्सा आज भी भूगोल, इतिहास और भविष्य के बीच खड़ा है.



