
डॉलर सूचकांक में वृद्धि, घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली और एक ही दिन में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण सोमवार को रुपया गिरकर 92.36 रुपये प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।
डीलरों के अनुसार स्थानीय मुद्रा में 0.63 फीसदी की गिरावट आई और यह 92.33 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई जो एक नया निचला स्तर है। पिछला बंद भाव 91.75 रुपये प्रति डॉलर था। डीलरों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित डॉलर बिक्री से इसमें और अधिक गिरावट रोकने में मददगार रही होगी। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पिछला निचला बंद भाव 92.15 रुपये प्रति डॉलर था।
डॉलर सूचकांक पिछले कारोबारी दिन के 98.99 के मुकाबले बढ़कर 99.30 पर पहुंच गया। यह छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है। एक निजी बैंक के वित्त प्रमुख ने कहा, कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे और डॉलर सूचकांक में बढ़ोतरी के कारण रुपया दबाव में था। उन्होंने कहा, आरबीआई ने 92.35 प्रति डॉलर के स्तर पर डॉलर की बिक्री की।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। लेकिन बाद में गिरकर 104.52 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, तेल की ऊंची कीमतों के कारण इस जिंस की ज्यादा खरीदारी हो रही है, जिससे रुपया बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। उन्होंने कहा, पिछले सप्ताह और आज भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई की बिकवाली जारी रही जबकि आरबीआई ने डॉलर की बिक्री की।
चालू वित्त वर्ष में रुपये में 7.43 फीसदी की गिरावट आई है जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 2.66 फीसदी कमजोर हुआ था।
डीलरों ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण व्यापक बिकवाली के बीच सोमवार को शुरुआती कारोबार में सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी से बढ़ोतरी हुई। ट्रेडरों ने कहा कि तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि और रुपये के अवमूल्यन ने सत्र के दौरान घरेलू यील्ड पर दबाव डाला।
लेकिन, केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत बॉन्ड खरीद के बाद कारोबार के अंत में बॉन्ड यील्ड में नरमी आई। केंद्रीय बैंक ने बाजार के मौजूदा स्तर से अधिक कीमतों पर बॉन्ड खरीदे, जिससे बाजार का माहौल स्थिर हुआ। बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड दिन के दौरान बढ़कर 6.77 फीसदी तक पहुंच गई। लेकिन अंत में 6.72 फीसदी पर स्थिर हुई जबकि पिछले कारोबारी दिवस में यह 6.69 फीसदी पर बंद हुई थी।
केंद्रीय बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों की ओएमओ नीलामी आयोजित की, जिसमें बैंकिंग प्रणाली में टिकाऊ तरलता डालने के लिए सात प्रतिभूतियों में 50,000 करोड़ रुपये के मूल्य की बोलियां स्वीकार की गईं।
प्राइमरी डीलरशिप के एक डीलर ने कहा, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण आज बॉन्ड बाज़ार में भारी गिरावट आई। तेल की ऊंची कीमतों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बढ़ा दिया और रुपये पर दबाव डाला, जिसका असर घरेलू बॉन्ड बाज़ार पर पड़ा।




