आखिरकार IDBI बैंक पर पैसा लगाने वाला खरीदार मिल गया है. इसी के साथ IDBI बैंक देश का पहला ऐसा बैंक बन गया है जिसपर विदेशी निवेशक 53 हजार करोड़ लगाने को तैयार हुए है. दरअसल सरकार इस बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है. जिसके लिए खरीदार तलाशा जा रहा था. अगर .ये डील फाइनल हो जाती है तो माना जा रहा है कि IDBI बैंक का कायाकल्प हो सकता है. साथ ही निवेशकों को भी फायदा हो सकता है. वैसे अभी तक ना तो सरकार की ओर से ना ही फेयरफैक्स की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा हुई है. सरकार आईडीबीआई बैंक के लिए काफी दिनों से खरीदार की तलाश कर रही थी. वहीं दूसरी ओर आईडीबीआई बैंक सरकार के डिस्इंवेस्टमेंट प्लान का भी हिस्सा है. ऐसे में आईडीबीआई की सेल सरकार के विनिवेश टारगेट को पूरा करने में काफी मदद करेगी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस डील को लेकर किस तरह की खबर सामने आई है.

किस तरह की हो सकती है डील
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार फेयरफैक्स अब 81 रुपए प्रति शेयर का ऑफर दे रही है, जो पिछले साल दिए गए 75 रुपए के ऑफर से ज्यादा है. इस कीमत पर, सरकार बैंक में अपनी 45.48 फीसदी हिस्सेदारी में से 30.48% हिस्सेदारी बेचकर लगभग 26,620 करोड़ रुपए जुटा सकती है. सरकारी कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन , जिसके पास बैंक की 50 फीसदी से थोड़ी कम हिस्सेदारी है, वह भी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इससे डील का कुल साइज 53,000 करोड़ रुपए हो जाएगा और यह किसी भारतीय बैंक में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा. प्रेम वत्सा की फेयरफैक्स होल्डिंग्स को पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर भी देना होगा.
कई मंजूरियों की जरूरत होगी
ईटी रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि काफी बातचीत के बाद, सरकार और फेयरफैक्स डील के लिए सहमत हो गए हैं और इसकी आधिकारिक घोषणा कभी भी हो सकती है. मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि मंत्रियों के एक अधिकारप्राप्त समूह को, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल हैं, संशोधित बोलियों और उसके बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई है. जल्द ही एक औपचारिक नोटिफिकेशन आएगा और उसके बाद ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ जारी किया जाएगा, जिसके बाद शेयरखरीद समझौते पर हस्ताक्षर होंगे.
शेयरों में करीब 3 फीसदी का इजाफा
देर शाम स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में BSE के एक सवाल का जवाब देते हुए बैंक ने कहा कि वह अपने विनिवेश से जुड़ी खबर की “न तो पुष्टि करने और न ही खंडन करने की स्थिति में” है. वहीं दूसरी ओर फेयरफैक्स की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है. मंगलवार को NSE पर बैंक के शेयर 86.54 रुपए पर बंद हुए, जो पिछले बंद भाव से 2.9 फीसदी ज़्यादा थे. 31 मार्च को 61.01 रुपए के 52हफ़्ते के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद से शेयरों में लगभग 42 फीसदी की बढ़त हुई है.
उस समय रिजर्व प्राइस से कम बोलियां आने के बाद सरकार ने बिक्री प्रक्रिया रोक दी थी. सफल बोली लगाने वाली कंपनी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा फाइनल वैल्यूएशन प्रोसेस से गुजरना होगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि वह रेगुलेटर के ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानकों को पूरा करती है. इसके अलावा, CCI समेत कानूनी और रेगुलेटरी अथॉरिटीज से मंज़ूरी लेनी होगी.
CSB बैंक में 40 फीसदी हिस्सेदारी
फेयरफैक्स की भारतीय यूनिट के पास अभी CSB बैंक में 40 फीसदी हिस्सेदारी है. बैंकिंग सेक्टर के एक एग्जीक्यूटिव ने कहा कि प्रमोटरों को इन दोनों बैंकों का मर्जर करना होगा, हालांकि RBI कुछ ज्यादा समय दे सकता है. किसी बैंक में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश एमिरेट्स NBD द्वारा 2025 में RBL बैंक में 2.75 अरब डॉलर में 60% हिस्सेदारी खरीदना रहा है. एमिरेट्स NBD ने फरवरी में फेयरफैक्स होल्डिंग्स के साथ IDBI बैंक के लिए भी बोली लगाई थी. मार्च में यह प्रक्रिया रोक दी गई थी क्योंकि ऑफर रिजर्व प्राइस से कम थे. मीडिया रिपोर्ट में पहले जानकारी दी गई थी कि सरकार कानूनी प्रावधानों की जांच कर रही थी और फाइनेंशियल बोलियां रिजर्व प्राइस से कम होने के बावजूद हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को कभी “रद्द” नहीं किया गया था.
एलआईसी ने खरीदी थी हिस्सेदारी
LIC द्वारा बैंक में 21,624 करोड़ में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद 2019 में IDBI को प्राइवेट सेक्टर बैंक का दर्जा दिया गया था. देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी को इस डील से लगभग 26,440 करोड़ रुपए मिलेंगे. सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर में एसेट मोनेटाइजेशन से 80,000 करोड़ रुपए का बजट रखा है. अब तक, उसने मुख्य रूप से कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर लगभग 20,272 करोड़ रुपए जुटाए हैं. सरकार LIC और कोल इंडिया समेत अन्य कंपनियों में भी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है.


