डोनाल्ड ट्रंप दुनिया भर में अपनी आक्रामक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं, फिर चाहे बात मिडिल ईस्ट में युद्ध की हो या क्रिप्टोकरेंसी को सबसे बड़ा निवेश बताने की. लेकिन वॉल स्ट्रीट उनकी इस चाल की असलियत को अच्छी तरह समझ चुका है और इसे ‘TACO’ ट्रेड का नाम दिया है. इसका मतलब है कि ट्रंप बड़ीबड़ी धमकियां देते हैं या बड़ा जोखिम दिखाते हैं, लेकिन अंत में रिस्क लेने से पीछे हट जाते हैं. इसी ‘TACO’ रणनीति के दम पर जहां एक तरफ शेयर बाजार युद्ध के डर से क्रैश होने से बच रहा है, वहीं ट्रंप ने अपने जोखिम भरे क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स से 1.4 अरब डॉलर की रिकॉर्ड कमाई कर उसे सुरक्षित जगहों पर निवेश कर दिया है.

क्या है वॉल स्ट्रीट का ‘TACO’ ट्रेड?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 86.5 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. आम तौर पर ऐसी भूराजनीतिक उथलपुथल से शेयर बाजारों में हाहाकार मच जाता है और पैनिक सेलिंग शुरू हो जाती है. लेकिन इस बार निवेशक घबरा नहीं रहे हैं. कोटक म्यूचुअल फंड के एमडी नीलेश शाह जैसे दिग्गजों का मानना है कि बाजार इसी ‘TACO’ ट्रेड पर दांव लगा रहा है. निवेशकों को पता है कि ट्रंप नीतियां सख्त करने की धमकी देते हैं, लेकिन अंत में किसी बड़े युद्ध को भड़कने से रोक देते हैं. इसी भरोसे के कारण भारतीय शेयर बाजार में मामूली गिरावट ही आई है और कोई बड़ी बिकवाली नहीं देखी गई.
क्रिप्टो सिर्फ दूसरों के लिए, खुद चुना सेफ निवेश
ट्रंप की यह ‘पीछे हटने’ या ‘TACO’ वाली चाल सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वित्तीय फैसलों में भी साफ दिखती है. ट्रंप और उनके बेटों ने निवेशकों को ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ और ‘ट्रंप मीम कॉइन’ जैसे क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने के लिए खूब प्रोत्साहित किया. उनके बेटों ने तो बिटकॉइन को 10 लाख डॉलर तक पहुंचने का दावा कर दिया. लेकिन जब खुद के पैसे की बात आई, तो ट्रंप ने जोखिम भरे क्रिप्टो बाजार से दूरी बना ली. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डिजिटल एसेट्स पॉलिसी प्रोजेक्ट के निदेशक टिमोथी मसाद के अनुसार, ट्रंप की रणनीति क्रिप्टो से तुरंत पैसा बनाकर उस मुनाफे को सुरक्षित संपत्तियों में लगाने की है, क्योंकि वे खुद अपनी संपत्ति के लिए डिजिटल करेंसी पर पूरा भरोसा नहीं करते.
निवेशकों के डूबे अरबों, ट्रंप का पोर्टफोलियो हुआ चार गुना
आंकड़े इस दोहरी नीति की गवाही देते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप समर्थित क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स में दांव लगाने वाले आम खुदरा निवेशकों को अप्रैल तक करीब 2.3 अरब डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा. वहीं, दूसरी तरफ ट्रंप ने अपनी 1.4 अरब डॉलर की क्रिप्टो कमाई को शेयर और बॉन्ड जैसे पारंपरिक और सुरक्षित वित्तीय साधनों में निवेश कर दिया. उनके वित्तीय खुलासे बताते हैं कि पिछले दो सालों में उनके सुरक्षित निवेश का पोर्टफोलियो चार गुना बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने भी बयान जारी कर माना है कि उनकी बैलेंस शीट बेहद मजबूत और सुरक्षित संपत्तियों पर आधारित है.
भारतीय बाजार के लिए क्या हैं इसके मायने?
भारत के नजरिए से देखें, तो महंगे होते कच्चे तेल ने चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा फिर लौट रहा है. पिछले चार महीनों में 2.71 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली के बाद, जुलाई में विदेशी निवेशकों ने 11,605 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स का भी अनुमान है कि अगले साल जून तक निफ्टी 10 फीसदी उछलकर 26,500 के स्तर को छू सकता है. बाजार मानकर चल रहा है कि ट्रंप का ‘TACO’ ट्रेड काम करेगा, बड़ा युद्ध टलेगा और बाजार फिर से अपनी रफ्तार पकड़ेंगे. ताइवान और दक्षिण कोरिया से पैसा निकालकर अब विदेशी निवेशक भारत की ओर रुख कर सकते हैं.


