प्रदूषित हवा में सांस लेने से न सिर्फ सांस की बीमारियां होती हैं, बल्कि कई अन्य बीमारियां भी हमारे शरीर में अपना घर बना सकती हैं. नई स्टडी के मुताबिक, अगर कोई शख्स कई सालों तक प्रदूषित हवा में सांस लेता है तो उसे टाइप2 डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है.

दक्षिण कोरिया में की गई स्टडी से ऐसा होने के पीछे की वजह भी सामने आई है. यहां चूहों पर इसका प्रयोग किया गया. प्रयोग में देखा गया कि प्रदूषित हवा और डायबिटीज ने मिलकर बोन मैरो के स्टेम सेल्स को कमजोर कर दिया. बोन मैरो शरीर की वो जगह है, जो शरीर की मरम्मत करने और ब्लड बनाने का काम करती है.

भारत में प्रदूषण और डायबिटीज दोनों ही

सामने आई ये स्टडी भारत के लिहाज से काफी अहम है. भारत में डायबिटीज और प्रदूषण दोनों की ही समस्याएं पाई जाती हैं. यहां पहले से ही 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. सर्दियों की शुरुआत के साथ ही, उत्तर भारत के शहरों में बारीक कणों से भरा स्मॉग फिर से जमा होने लगा है.

भारत के नेतृत्व में हुई इस स्टडी में दुनिया भर के 20 करोड़ से ज्यादा लोगों पर की गई 13 पुरानी बड़ी रिसर्च के नतीजों को एक साथ जोड़कर देखा गया है. यह स्टडी 27 अक्टूबर को खून की नसों की बीमारियों से जुड़े एक नामी जर्नल में छपी है, जो पुरानी रिसर्च के नतीजों को मिलाकर एक अम्ब्रेला रिव्यू यानी ठोस निष्कर्ष बताती है.

चूहों पर रिसर्च ने बताया हड्डियों को भी कमजोर करता है प्रदूषण

दक्षिण कोरिया के जियोनबुक नेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा जर्नल ऑफ हैजर्डस मैटेरियल्स में प्रकाशित एक अलग स्टडी से यह समझने में मदद मिलती है कि डायबिटीज रोगियों पर इसका ज्यादा प्रभाव क्यों पड़ सकता है. शोधकर्ताओं ने स्टडी से पीड़ित और स्वस्थ चूहों को कृत्रिम PM2.5 के संपर्क में रखा. यह स्टडी एक ऐसे जगह पर की गई थी जो वास्तविक बाहरी हवा की नकल करता था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। डायबिटीज से पीड़ित चूहों में, प्रदूषण के कारण बोन मैरो स्टेम कोशिकाएं तेजी से बूढ़ी होने लगीं और ठीक से काम नहीं कर पाईं. ये इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि ये ब्लड बनाती हैं और हड्डियों की मरम्मत करती हैं.

इस नुकसान का कारण फेफड़ों में मौजूद एक सूजन संबंधी “स्विच” था, और इसे रोकने से काफी हद तक नुकसान कम हो गया. रिसर्चर ने कहा, “छोटे कण और टाइप 2 डायबिटीज एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं.”

जितने ज्यादा बारीक कण होंगे डायबिटीज का खतरा उतना ज्यादा

हवा में मौजूद बारीक और खतरनाक प्रदूषण जितना ज्यादा बढ़ता है, लोगों में ‘टाइप 2 डायबिटीज’होने का खतरा उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है. इस बड़ी स्टडी को देहरादून और मेरठ के मेडिकल एक्सपर्ट्स जैसे डॉ. यशेंद्र सेठी ने दिल्ली और अन्य संस्थानों के डॉक्टरों के साथ मिलकर पूरा किया है.

प्रदूषण की वजह से डायबिटीज बढ़ने का यह खतरा सिर्फ किसी एक देश में नहीं, बल्कि एशिया और पश्चिमी देशों, दोनों जगह के लोगों में बिल्कुल एक जैसा देखा गया. हवा में सूक्ष्म प्रदूषण की मात्रा जब भी थोड़ी सी बढ़ती है, तो लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 10% से 16% तक बढ़ जाता है. इस खतरनाक प्रदूषण की वजह से लोगों का खाली पेट वाला ब्लड शुगर बढ़ जाता है और डायबिटीज के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ जाता है.