भारत में फैटी लिवर के मरीजों की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसको लेकर एक मिथक ये बनी रहती है कि क्या फैटी लिवर वालों को कैंसर का खतरा रहता है. जानें इस पर एक्सपर्ट ने क्या कहा?

क्या होता है फैटी लिवर नाम से ही साफ है कि लिवर पर फैट जमा होने लगे तो इस समस्या को फैटी लिवर पुकारा जाता है. पहले ग्रेड 1 होता है, फिर ग्रेड 2, ग्रेड 3 और फिर लिवर सिरोसिस का होना. अगर लिवर सिरोसिस हो जाए तो इस कंडीशन में भी इस ऑर्गन की सेहत बहुत ज्यादा गंभीर हो जाती है.

फैटी लिवर से कैंसर का कनेक्शन राजीव गांधी हॉस्पिटल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अजय कुमार बताते हैं कि फैटी लिवर से लिवर का कैंसर हो सकता है, लेकिन यह हर मरीज में नहीं होता. शुरुआती फैटी लिवर सीधे कैंसर का कारण नहीं बनता, लेकिन समय के साथ लिवर की सूजन और नुकसान से सिरोसिस होने पर कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है.

कैंसर होने का बड़ा कारण ये कहना ठीक नहीं है कि फैटी लिवर है तो कैंसर हो ही जाएगा. लेकिन लंबे समय तक सूजन और सेल्स का नुकसान होना ठीक नहीं है. इसे MASH कहा जाता है. इसके लिए मरीज को कम ऑयल और फाइबर वाली चीजें खाने की सलाह दी जाती है.

फाइब्रोसिस और सिरोसिस अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे तो लिवर में निशान पड़ सकते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर किसी को लिवर सिसोसिक हो जाए तो कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने पर सेल्स में असामान्य बदलाव होते हैं. वैसे हर किसी की सिचुएशन एक सी नहीं है होती. कुछ लोगों को सिरोसिस से पहले भी लिवर कैंसर हो सकता है.

किन लोगों में कैंसर का डर ज्यादा जिन्हें ग्रेड 2 और ग्रेड 3 फैटी लिवर के साथ सूजन हो, टाइप 2 डायबिटीज, लिवर सिरोसिस वाले, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हेपेटाइटिस बी या सी की समस्या होना. इन हेल्थ प्रॉब्लम्स की चपेट में अगर कोई है तो लिवर कैंसर का खतरा इनमें ज्यादा हो सकता है.

गंभीर बीमारी से कैसे बचें डाइट में बदलाव करके ये तय नहीं हो सकता कि कैंसर नहीं होगा. फिर भी खानपान और लाइफस्टाइल में चेंज करके कुछ हद तक बचा जा सकता है. फाइबर वाली सब्जियां, रोजाना सैर या एक्सरसाइज, डायबिटीज है तो इसे कंट्रोल रखना, वेट मैनेजमेंट पर फोकस सबसे जरूरी है.