इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण और भ्रष्टाचार पर सुनवाई के दौरान बेहद कड़ी टिप्पणियां करते हुए कहा कि देश में भ्रष्टाचार अब सामान्य बात बन चुकी है. कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर के लिए आए दान में चोरी का मामला भी लोगों को शर्मिंदा नहीं कर सका, जो ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दर्शाता है. यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहती है तो कानून में संशोधन कर गंभीर मामलों में मृत्युदंड तक का प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए.

जस्टिस अतुल श्रीधरन ने ये टिप्पणियां हमीरपुर के कैफुद्दीन समेत अन्य याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अपने फैसले में दर्ज कीं. याचिकाकर्ताओं ने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक और संरक्षण की मांग की थी. इस मामले की सुनवाई वाली खंडपीठ में जस्टिस सिद्धार्थनंद भी शामिल थे, जिन्होंने कुछ बिंदुओं पर अलग राय व्यक्त की.

रिश्वत लेकर आंखें बंद कर लेते हैं अफसरः HC

हाई कोर्ट ने कहा कि नगर निगम और अन्य प्राधिकरणों के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण खड़े हो जाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अधिकारी रिश्वत लेकर आंखें बंद कर लेते हैं और जब कार्रवाई होती है तो उसका खामियाजा आम खरीदार को भुगतना पड़ता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डरों के साथसाथ उन्हें संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को भी कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए.

भ्रष्टाचार से बढ़ रही अमीरगरीब की खाईः HC

भ्रष्टाचार से बढ़ रही असमानता का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण कुछ लोगों के हाथों में अवैध रूप से संपत्ति इकट्ठी हो रही है, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है. यदि समय रहते इस पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो भविष्य में सामाजिक असंतोष और गंभीर हालात पैदा हो सकते हैं.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का किया जिक्र

अपने 51 पेज के फैसले में जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि राम मंदिर में दान चोरी का विवाद ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका साबित हुआ. कोर्ट ने कहा कि यदि इतने संवेदनशील धार्मिक स्थल पर दान में हुई चोरी से भी समाज विचलित नहीं होता, तो यह ईमानदारी के गिरते स्तर का गंभीर संकेत है.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया और कहा कि 182 देशों में भारत 91वें स्थान पर है, लेकिन इसके बावजूद भ्रष्टाचार को लेकर समाज में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती.

जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से जुड़ा हाल का विवाद, सब्र का बांध टूटने जैसा है. उन्होंने यह चिंता भी जताई कि समाज में भ्रटाचार ने इतना जड़ जमा लिया है कि अब सरकार को इस तरह के मामले के दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक कानून1988 में संशोधन करने पर विचार करना चाहिए.

बुलडोजर कार्रवाई पर भी अहम निर्देश

कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद 2 साल तक उसका मकान ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति किसी मकान में 3 साल या उससे अधिक समय से रह रहा है, तो ध्वस्तिकरण से एक साल पहले नोटिस देकर वैकल्पिक व्यवस्था का अवसर दिया जाना चाहिए.

हालांकि, इस बिंदु पर जस्टिस सिद्धार्थनंद ने असहमति जताते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट किसी निश्चित समयसीमा, जैसे 2 साल, तय नहीं कर सकता. उनका मत था कि ऐसा प्रावधान भविष्य में आरोपी द्वारा कार्रवाई से बचने के लिए एफआईआर का दुरुपयोग करने का माध्यम बन सकता है.