वॉशिंगटन। अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के पांच शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को निशाना बनाया गया। सीजफायर टूटने के बाद यह लगातार 11वीं रात है, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर ‘बहुत जल्द और बहुत भारी’ हमला कर सकता है। ट्रम्प की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने कहा कि यदि हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र में युद्ध का दायरा और बढ़ा सकता है।
इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया है कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. भारतचीन के टैंकरों ने रास्ता बदला: सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन जा रहे दो टैंकर हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद रेड सी में यूटर्न लेकर स्वेज नहर की ओर लौट गए।
2. अमेरिका ने माना ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल: पेंटागन ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई के बाद ईरानी हमलों में करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं।
3. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कतर ने ईरान से मुआवजा मांगा: कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर ईरान को हालिया हमलों और उनसे हुए सभी नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और पूरा मुआवजा देने की मांग की।
4. ट्रम्प ने माना जॉर्डन में एक ईरानी हमला सफल रहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने माना कि जॉर्डन में ईरान का एक हमला सफल रहा। हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी।
5. ईरानी गृह मंत्री पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी बातचीत की।
अमेरिकाईरान तनाव से कच्चा तेल 92 डॉलर के पार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 1 डॉलर की बढ़त के साथ 92.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 82 सेंट चढ़कर 85.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
एक दिन पहले मंगलवार को भी दोनों बेंचमार्क करीब 5 सप्ताह के उच्च स्तर पर बंद हुए थे। ब्रेंट 91.01 डॉलर और WTI 84.91 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।
ईरान युद्ध में मध्यस्थता की भूमिका निभाने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी मांगी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को भेजे प्रस्ताव में पांच साल तक की इस वित्तीय सुविधा का अनुरोध किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का मानना है कि ईरान युद्ध को लेकर बातचीत कराने में उसकी भूमिका से अमेरिका के साथ उसके संबंध मजबूत हुए हैं। इसी आधार पर इस्लामाबाद अब वॉशिंगटन से आर्थिक सहयोग बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है।
अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी, पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम होगा और IMF से मिलने वाली किस्तों पर उसकी निर्भरता घट सकती है।
ईरानी हमलों के बाद कुवैत में बिजली बचाने की अपील
ईरान के हमलों में बिजली ढांचे को निशाना बनाए जाने के बाद कुवैत में बिजली संकट की आशंका बढ़ गई है। संभावित बिजली कटौती से बचने के लिए सरकार ने लोगों से बिजली की खपत सीमित रखने और जरूरत पड़ने पर ही बिजली इस्तेमाल करने की अपील की है।
कुवैती अधिकारियों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है। ऐसे में पावर ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, आम लोगों द्वारा बिजली बचाने की अपील का पालन करने से फिलहाल ग्रिड पर दबाव कुछ हद तक कम हुआ है।
ईरान बोला कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया
ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने पश्चिमी कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे कैंप दोहा पर ड्रोन हमला किया है। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, ईरानी सेना ने कहा कि हमले में सैन्य अड्डे के गोलाबारूद डिपो और ग्राउंड फोर्सेज कमांड के लॉजिस्टिक्स उपकरणों को निशाना बनाया गया।
ईरानी सेना ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की बारबार की आक्रामक कार्रवाई के जवाब में की गई है। बयान में यह भी कहा गया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं दुश्मन की किसी भी नई साजिश या सैन्य कार्रवाई का निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार हैं।
रुबियो बोले ईरान बातचीत को तैयार है तो अमेरिका भी तैयार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत, समझौते और मतभेद सुलझाने के लिए तैयार है।
फिलीपींस की राजधानी मनीला में दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान रुबियो ने कहा, “अगर वे गंभीर हैं तो हम भी गंभीर हैं। अगर नहीं हैं तो अपने और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए जो जरूरी होगा, वह करेंगे।”
रिपोर्ट अमेरिका ने सऊदी के साथ न्यूक्लियर डील को मंजूरी दी
अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते को मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल के इस समझौते के तहत अमेरिका सऊदी अरब के साथ परमाणु तकनीक साझा करेगा। अमेरिकी कंपनियां सऊदी के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में भी भाग लेंगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समझौता भविष्य में सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन सुविधा स्थापित करने का रास्ता खोल सकता है। इसके लिए दोनों देशों की संयुक्त स्टडी के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन आने वाले दिनों में इस समझौते को अमेरिकी कांग्रेस में ‘123 एग्रीमेंट’ के रूप में पेश करेगा। इस पर अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समझौते में वे सुरक्षा शर्तें शामिल नहीं हैं, जिन्हें अमेरिका पहले परमाणु सामग्री को हथियार कार्यक्रम में इस्तेमाल होने से रोकने के लिए जरूरी बताता रहा था।
अमेरिका ने जंग में ₹3.6 लाख करोड़ खर्चे, ₹7.5 लाख करोड़ और मांगे
ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिका का खर्च लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को सीनेट की विनियोग समिति में बताया कि अब तक युद्ध पर 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं।
हेगसेथ ने साथ ही पेंटागन के लिए 87 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मांगी है। इसमें से 67 अरब डॉलर मिडिलईस्ट में चल रहे सैन्य अभियानों पर खर्च किए जाएंगे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर अतिरिक्त बजट नहीं मिला तो सैनिकों के वेतन, प्रशिक्षण, हथियारों और गोलाबारूद की आपूर्ति के साथ सैन्य अभियान प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि यह फंड अमेरिकी सेना की संचालन क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
ट्रम्प ने ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने को उड़ाने की धमकी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के संदिग्ध अंडरग्राउंड परमाणु ठिकाने ‘पिकऐक्स माउंटेन’ पर जल्द भारी हमला करने की चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना बहुत जल्द उस इलाके पर जोरदार हमला करेगी।



