भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर इस वक्त बड़े बदलाव से गुजर रहा है. देश में कारों से लेकर बाइक, कमर्शियल व्हीकल और इलेक्ट्रिक वाहनों तक लगभग हर बड़े सेगमेंट में बिक्री बढ़ रही. महंगे पेट्रोलडीजल की वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भी तगड़ा उछाल आया है, लेकिन कंपनियों के लिए चुनौती खत्म नहीं हुई है.
कंपनियों के लिए सिर्फ बढ़ती बिक्री ही काफी नहीं है. उसली चुनौती कच्चे माल की बढ़ती लागत है.

HSBC के अनुसार, जुलाई में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में उनकी कुल बिक्री की हिस्सेदारी 11.2% रही. इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की हिस्सेदारी करीब 8% रही. दिलचस्प बात यह है कि जुलाई में PM EDRIVE सब्सिडी खत्म होने के बावजूद EV की बिक्री मजबूत रही. बढ़ती पेट्रोलडीजल कीमतों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने की एक वजह माना गया है. Tata Motors की EV बिक्री जुलाई में 114% बढ़कर 15,217 यूनिट पहुंच गई. कंपनी की कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में EV की हिस्सेदारी भी बढ़कर 23.9% हो गई, जो एक साल पहले 17.7% थी.

कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत है चुनौती

ब्रोकरेज कंपनी HSBC ने रिपोर्ट में कहा कि ऑटो कंपनियों की बिक्री में अच्छी रिकवरी दिखाई दे रही है, लेकिन कच्चे माल की बढ़ती लागत की वजह से कंपनियां इस बढ़ी हुई मांग को पूरी तरह मुनाफे में बदल नहीं पाएंगी. ऑटो कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं. HSBC के कमोडिटी कॉस्ट इंडेक्स के अनुसार, वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही में दोपहिया वाहनों के लिए लागत करीब 10% और पैसेंजर व्हीकल के लिए 12% बढ़ी. कमर्शियल व्हीकल और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए यह बढ़ोतरी करीब 13% रही. HSBC का कहना है कि कई बड़ी ऑटो कंपनियों के मार्जिन पर पहली तिमाही में ही दबाव पड़ा है. दूसरी तिमाही में भी कंपनियों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

Maruti से Tata तक कारों की मांग मजबूत

Maruti Suzuki की जुलाई में कुल बिक्री करीब 34% बढ़ी. Tata Motors के पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में तो 59% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह 62,611 यूनिट पहुंच गई. वहीं Mahindra & Mahindra की पैसेंजर व्हीकल बिक्री 20% बढ़कर 60,048 यूनिट रही. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। Hyundai Motor India की घरेलू बिक्री 23% बढ़कर 54,210 यूनिट हो गई. कंपनी का एक्सपोर्ट भी 81% बढ़ा. घरेलू बिक्री और निर्यात को मिलाकर Hyundai की कुल बिक्री 47% बढ़कर 75,360 यूनिट रही. हालांकि, कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक को लेकर स्थिति अलगअलग रही. Maruti ने अपना स्टॉक बढ़ाना जारी रखा. Mahindra की थोक बिक्री उसकी रिटेल बिक्री से थोड़ी ज्यादा रही. वहीं Tata Motors की Sierra को लेकर मांग मजबूत रही, लेकिन सप्लाई एक चुनौती बनी हुई है.

कुल मिलाकर क्या तस्वीर बन रही है?

जुलाई के आंकड़ों से साफ है कि भारतीय ऑटो सेक्टर में मांग मजबूत हो रही है. कार, SUV, बाइक, कमर्शियल व्हीकल और EV सभी में अच्छी बिक्री देखने को मिली है. लेकिन कंपनियों के लिए असली चुनौती अब बढ़ती लागत है. महंगे कच्चे माल, कुछ बाजारों में कमजोर एक्सपोर्ट, कमर्शियल व्हीकल की रिप्लेसमेंट डिमांड और ग्रामीण बाजार को लेकर अनिश्चितता यह तय करेगी कि बढ़ी हुई बिक्री का कितना फायदा कंपनियों की कमाई में दिखाई देता है. यानी फिलहाल ऑटो सेक्टर की गाड़ी तेज रफ्तार से दौड़ रही है, लेकिन मुनाफे की सड़क पर लागत और अनिश्चितता के कुछ स्पीड ब्रेकर मौजूद हैं.