देश को अंग्रेजी शासन से आजाद हुए 79 साल होने को हैं. एक बार फिर इतिहास के पन्ने पलटे जा रहे हैं. हम सब जानते हैं कि भारत को आज़ादी 15 अगस्त 1947 को मिली. यह तारीख केवल कैलेंडर की एक तारीख मात्र नहीं है. इसके पीछे राजनीति, जल्दबाज़ी, ब्रिटिश साम्राज्य की कमजोरी और द्वितीय विश्वयुद्ध की यादें जुड़ी थीं. आजादी की वर्षगांठ के बहाने समझते हैं आखिर 15 अगस्त की तारीख क्यों चुनी गई? इसका जापान से क्या रिश्ता बना? आइए, विस्तार से समझते हैं.

द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 से 1945 तक चला. इस युद्ध ने ब्रिटेन को आर्थिक और सैन्य रूप से बहुत कमजोर कर दिया. ब्रिटिश सरकार पर कर्ज बढ़ गया. उसके लिए भारत जैसे विशाल देश को नियंत्रित करना कठिन होता जा रहा था. भारत में आज़ादी की मांग भी बहुत तेज हो चुकी थी. महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस और अनेक नेताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत बनाया. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेज़ी शासन की नींव को हिला दिया. युद्ध के बाद नौसेना विद्रोह, श्रमिक आंदोलनों और सैनिकों में असंतोष ने भी ब्रिटिश सरकार को चिंतित किया. ब्रिटेन समझ गया कि भारत पर लंबे समय तक राज चलाना अब संभव नहीं है.

माउंटबेटन भारत कब आए?

लॉर्ड लुई माउंटबेटन मार्च 1947 में भारत के अंतिम वायसराय बनकर आए. उन्हें ब्रिटिश सरकार ने एक कठिन काम दिया था. उन्हें भारत में सत्ता का हस्तांतरण कराना था. पहली योजना यह थी कि जून 1948 तक भारत को सत्ता सौंप दी जाएगी यानी ब्रिटेन के पास लगभग डेढ़ वर्ष का समय था. लेकिन भारत में उस समय हिंदूमुस्लिम तनाव बहुत बढ़ चुका था. कई जगह हिंसा हो रही थी. कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सत्ताविभाजन पर सहमति नहीं बन रही थी. माउंटबेटन ने जल्दी निर्णय लेने का रास्ता चुना. उन्होंने सोचा कि देर होने पर स्थिति और खतरनाक हो सकती है.

लॉर्ड माउंटबेटन.

क्या थी 3 जून योजना?

3 जून 1947 को एक बड़ी योजना घोषित की गई. इसे सामान्यतः 3 जून योजना या माउंटबेटन योजना कहा जाता है. इस योजना के अनुसार ब्रिटिश भारत को दो देशों में बांटा जाना था. भारत और पाकिस्तान. कांग्रेस ने इस योजना को भारी मन से स्वीकार किया. मुस्लिम लीग ने भी इसे स्वीकार किया. इसके बाद आज़ादी की तारीख जल्द तय करनी थी. ब्रिटिश संसद ने जुलाई 1947 में भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया. इस कानून में लिखा गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन बनेंगे.

15 अगस्त ही क्यों चुनी गई?

15 अगस्त की तारीख लॉर्ड माउंटबेटन ने चुनी थी. इसके पीछे जापान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण स्वीकार करने की घोषणा की थी. जापान के सम्राट हिरोहितो ने रेडियो संदेश के माध्यम से बताया कि जापान युद्ध रोक रहा है और पॉट्सडैम घोषणा को स्वीकार कर रहा है. इस घटना के साथ एशिया में द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत माना गया. कई देशों में इस दिन को विजय दिवस के रूप में याद किया गया. इसे कई जगह वीजे डे यानी विक्ट्री ओवर जापान डे भी कहा गया. माउंटबेटन द्वितीय विश्वयुद्ध में दक्षिणपूर्व एशिया क्षेत्र के मित्र राष्ट्रों के सर्वोच्च कमांडर रहे थे. जापान की हार उनके सैन्य जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी. इसलिए 15 अगस्त उनके लिए एक शुभ और यादगार तारीख थी.

आजादी मिलने के दौर तक अंग्रेजों के लिए भारत में शासन करना मुश्किल हो गया था.

माउंटबेटन की अपनी बात

माउंटबेटन ने बाद में कहा था कि उन्होंने 15 अगस्त इसलिए चुनी क्योंकि यह उनके लिए भाग्यशाली दिन था. यह जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ थी. इस बात का अर्थ यह नहीं है कि जापान ने भारत को आज़ाद कराया. भारत की आज़ादी भारतीय जनता के लंबे संघर्ष का परिणाम थी. जापान का संबंध केवल तारीख के चुनाव से जुड़ा था. माउंटबेटन ने अपने युद्धकालीन अनुभव और उस तारीख की प्रतीकात्मक महत्ता को ध्यान में रखा.

क्या जापान ने 15 अगस्त 1945 को औपचारिक दस्तखत किए थे?

15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण स्वीकार करने की घोषणा की थी. औपचारिक आत्मसमर्पणपत्र पर हस्ताक्षर 2 सितंबर 1945 को हुए थे. फिर भी 15 अगस्त को युद्ध समाप्ति की घोषणा का दिन माना गया. इसलिए इस तारीख का भावनात्मक और राजनीतिक महत्व बहुत बड़ा था. माउंटबेटन ने इसी तिथि को भारत की आज़ादी के लिए चुना.

माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख भारत की आज़ादी के लिए चुनी.

जल्दी आज़ादी देने का फैसला क्यों हुआ?

माउंटबेटन के सामने समय कम नहीं था. फिर भी उन्होंने जून 1948 की तय सीमा से बहुत पहले सत्ता हस्तांतरण कराया. इसके कई कारण थे. बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा इसकी प्रमुख वजहों में एक थी. पंजाब और बंगाल में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुं

च चुका था. ब्रिटिश प्रशासन कमजोर हो चला था. अंग्रेज़ अधिकारी भारत छोड़ने की तैयारी कर रहे थे. शासन व्यवस्था को संभालना कठिन हो रहा था. राजनीतिक दबाव भी एक महत्वपूर्ण वजह थी. कांग्रेस जल्दी सत्ता चाहती थी. मुस्लिम लीग पाकिस्तान के निर्माण को लेकर दृढ़ थी. माउंटबेटन का भी अपना एक आकलन था. उन्हें लगा कि देरी से गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है. लेकिन तेजी का एक दुखद परिणाम भी हुआ. बंटवारे की सीमाएं बहुत देर से घोषित हुईं. लाखों लोग अचानक अपने घरों से विस्थापित हो गए. हिंसा में बहुत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई.

आधी रात को आज़ादी क्यों मिली?

भारत में आज़ादी का मुख्य समारोह 14 और 15 अगस्त 1947 की आधी रात को हुआ. संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण दिया. उन्होंने कहा, नियति से भेंट का समय आ गया है. आधी रात का समय प्रतीकात्मक था. 14 अगस्त समाप्त हो रहा था और 15 अगस्त शुरू हो रहा था. उसी क्षण भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ. यह एक नया जन्म था. एक लंबे संघर्ष का परिणाम था.

मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के संस्थापक कहलाए.

पाकिस्तान 14 अगस्त को क्यों मनाता है?

ब्रिटेन के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम में भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए 15 अगस्त 1947 की तारीख थी. फिर भी पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है. इसका एक कारण समय और समारोहों का अंतर था. माउंटबेटन 14 अगस्त को कराची गए थे. वहाँ पाकिस्तान की सत्ताहस्तांतरण प्रक्रिया हुई. दूसरा कारण यह था कि कुछ क्षेत्रों में 15 अगस्त का आरंभ अलग समय पर माना गया. धीरेधीरे 14 अगस्त पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्थापित हो गया. भारत ने 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस बनाए रखा.

15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन है. यह दिन भारतीयों के संघर्ष, त्याग और उम्मीद का प्रतीक है. इस तारीख का जापान से संबंध जरूर है लेकिन सीधा नहीं. लॉर्ड माउंटबेटन ने इसे जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ के कारण चुना था. उनके लिए यह एक शुभ और ऐतिहासिक तारीख थी. लेकिन भारत की आज़ादी का असली कारण जापान नहीं था. असली कारण था भारत का लंबा स्वतंत्रता आंदोलन. लाखों भारतीयों का साहस, बलिदान और संघर्ष. इसलिए 15 अगस्त केवल माउंटबेटन की चुनी हुई तारीख नहीं है. यह भारत की आत्मा, स्वाभिमान और स्वतंत्रता का पर्व है.