देश में बिजली कंज्यूमर्स के घरों में स्मार्ट मीटर लग रहे हैं. इनका मकसद बिजली की खपत और खर्च की जानकारी लोगों तक आसानी से पहुंचाना, बिलिंग को बेहतर बनाना और बिजली सप्लाई से जुड़ी सेवाओं को ज्यादा सुविधाजनक बनाना है. बिजली मंत्रालय के मुताबिक, 15 जनवरी 2026 तक देश में अलगअलग योजनाओं के तहत 5.62 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे. इन मीटरों की मदद से आप मोबाइल ऐप के जरिए बिजली की खपत, प्रीपेड मीटर का बैलेंस और खर्च से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं.

हालांकि, स्मार्ट मीटर लगने के बावजूद इनसे जुड़ी डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल सीमित है. आकाशवाणी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्ट मीटर वाले 20% से भी कम कंज्यूमर संबंधित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी 80% से ज्यादा लोग इस सुविधा से दूर हैं. इससे सवाल उठता है कि जब बिजली की खपत और खर्च का हिसाब मोबाइल पर देखने की सुविधा उपलब्ध है, तो ज्यादातर कंज्यूमर इसका फायदा क्यों नहीं उठा रहे हैं?
स्मार्ट मीटर ऐप का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे लोग?
स्मार्ट मीटर लगाना और उसका डिजिटल इस्तेमाल करना दो अलगअलग बातें हैं. मीटर लगने से लोगों को अपने आप यह जानकारी नहीं हो जाती कि उसे मोबाइल ऐप कहां से डाउनलोड करना है, उसमें अपना कंज्यूमर नंबर कैसे जोड़ना है और बिजली की खपत का हिसाब कहां देखना है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मीटर लगवाने वाले लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनके बिजली कनेक्शन के लिए कोई आधिकारिक ऐप उपलब्ध है. कुछ लोगों को ऐप के बारे में जानकारी होने के बावजूद यह नहीं पता होता कि इससे बिजली की खपत, बैलेंस और बिलिंग की जानकारी मिल सकती है. खासकर उन लोगों के लिए यह परेशानी ज्यादा हो सकती है, जिन्हें स्मार्टफोन के ऐप इस्तेमाल करने का अनुभव कम है.
वहीं, डिजिटल जानकारी और तकनीकी दिक्कतें हैं. ऐप डाउनलोड करना, रजिस्ट्रेशन करना, मीटर को कंज्यूमर नंबर से लिंक करना और लॉगिन से जुड़ी समस्याओं को हल करना हर कंज्यूमर के लिए आसान नहीं होता. बुजुर्गों और डिजिटल सुविधाओं का कम इस्तेमाल करने वाले लोगों को इसमें परेशानी हो सकती है. इसके अलावा, इंटरनेट की उपलब्धता और स्मार्टफोन का इस्तेमाल भी ऐप तक पहुंच को प्रभावित कर सकता है.
इसके अलावा पुराने तरीकों पर भरोसा है भी मीटर पर भरोसे को एक कारण है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कई लोग बिजली का बिल आने के बाद ही अपना खर्च देखते हैं. कुछ लोग एसएमएस या बिजली वितरण कंपनी की ओर से मिलने वाली दूसरी सूचनाओं पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में अगर ऐप से मिलने वाली जानकारी आसानी से समझ न आए या उसे बारबार खोलने की जरूरत महसूस न हो, तो उसका इस्तेमाल नहीं करते.
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की रिपोर्ट के मुताबिक, छह राज्यों में किए गए सर्वे में करीब 52% को स्मार्ट मीटर ऐप के बारे में जानकारी थी, जबकि सिर्फ 45% लोगों ने इसके इस्तेमाल की बात कही. सर्वे में यह भी सामने आया कि ऐप का इस्तेमाल प्रीपेड मीटर वाले कंज्यूमर्स में पोस्टपेड मीटर वालों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था.
स्मार्ट मीटर ऐप इस्तेमाल करने के क्या फायदे हैं?
स्मार्ट मीटर ऐप लोग यूज करने से क्यों बचते हैं उस पर तो बात कर ली. आइए आपको इसके कुछ फायदे भी बताते हैं, जो आपका काम आसान कर सकते हैं. पहली बात तो स्मार्ट मीटर ऐप का मकसद सिर्फ बिजली का बिल दिखाना नहीं है. इसका इस्तेमाल करके उपभोक्ता अपनी बिजली की खपत पर नजर रख सकते हैं और जरूरत के मुताबिक खर्च को कंट्रोल करने की कोशिश कर सकते हैं. बिजली मंत्रालय के मुताबिक, इन ऐप के जरिए उपभोक्ता लगभग रियल टाइम में बिजली की खपत देख सकते हैं. इसके अलावा, प्रीपेड मीटर का बैलेंस चेक करने, रिचार्ज करने और कम बैलेंस होने पर अलर्ट पाने जैसी सुविधाएं भी मिल सकती हैं.
गलत बिजली बिल आए तो शिकायत कहां करें?
एक सवाल उस हर कंज्यूमर के मन में जरूर उठता है कि अगर स्मार्ट मीटर लगने के बाद उसका बिजली बिल ज्यादा आया है या ऐप में दिखाई जा रही खपत और बिल की जानकारी में अंतर है तो वह क्या करे? अगर आपके साथ ऐसा हो तो आपको सीधे शिकायत दर्ज करनी चाहिए.
- बिजली वितरण कंपनी में शिकायत करें अपने DISCOM के कस्टमर केयर, बिलिंग विभाग, स्थानीय बिजली कार्यालय या आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत माध्यम पर संपर्क करें. शिकायत में कंज्यूमर नंबर, बिल की अवधि, मीटर रीडिंग और समस्या का स्पष्ट विवरण दें. शिकायत का नंबर जरूर सुरक्षित रखें.
- कंज्यूमर शिकायत निवारण फोरम में जाएं अगर बिजली वितरण कंपनी से समस्या का समाधान नहीं होता, तो संबंधित उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत की जा सकती है. बिजली वितरण कंपनियों के लिए ऐसे फोरम का प्रावधान विद्युत कानून और संबंधित नियमों के तहत किया गया है.
- इलेक्ट्रिसिटी ओम्बड्समैन से संपर्क करें CGRF के फैसले से संतुष्टि नहीं होने या लागू प्रक्रिया के तहत शिकायत का समाधान नहीं होने पर संबंधित राज्य के इलेक्ट्रिसिटी ओम्बड्समैन के पास अपील या शिकायत की जा सकती है. इसकी प्रक्रिया और समयसीमा राज्य के नियमों के मुताबिक अलग हो सकती है.
इससे बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं
- लोबैलेंस अलर्ट चेक करें: ऐप और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले एसएमएस या नोटिफिकेशन पर ध्यान दें. अलर्ट की सुविधा और उसकी सीमा अपने DISCOM से पता करें.
- समय पर रिचार्ज करें: बैलेंस कम होने पर बिजली बंद होने का इंतजार न करें. पहले से रिचार्ज करने से परेशानी से बचा जा सकता है.
- रिचार्ज की रसीद रखें: ऑनलाइन भुगतान करने के बाद ट्रांजैक्शन आईडी और रसीद संभालकर रखें. रकम कटने के बावजूद बैलेंस अपडेट न हो तो इससे शिकायत करने में मदद मिलेगी.
- इमरजेंसी क्रेडिट की जानकारी लें: कुछ मीटर या DISCOM व्यवस्था में इमरजेंसी क्रेडिट की सुविधा हो सकती है. यह हर जगह उपलब्ध हो, ऐसा जरूरी नहीं है. इसकी शर्तें पहले पता कर लें.
- बैलेंस और खपत का मिलान करें: अगर बैलेंस उम्मीद से ज्यादा तेजी से घट रहा है, तो ऐप में उपलब्ध खपत और कटौती का रिकॉर्ड देखें. जरूरत पड़ने पर DISCOM से संपर्क करें.
कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी अगर 80% से ज्यादा उपभोक्ता संबंधित ऐप का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो यह डिजिटल सुविधा को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मौजूद अंतर की ओर इशारा करता है. इसके पीछे जागरूकता की कमी, तकनीकी दिक्कतें, पुराने बिलिंग तरीकों पर निर्भरता और ऐप की उपयोगिता से जुड़ी चिंताएं हो सकती हैं. इस अंतर को दूर करने के लिए मीटर लगाने के साथसाथ उपभोक्ताओं को ट्रेनिंग देना, ऐप की सुविधाओं को आसान बनाना और शिकायतों का समय पर समाधान करना भी उतना ही जरूरी है.



