Tuesday, February 10, 2026
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आसमान से बरसेगा ‘जहर’, ऊपर मंडरा रहे ‘प्लास्टिक के बादल’, ! रिसर्च में सामने आई भयानक रिपोर्ट!..

आसमान से बरसेगा ‘जहर’, ऊपर मंडरा रहे ‘प्लास्टिक के बादल’, ! रिसर्च में सामने आई भयानक रिपोर्ट!..
आसमान से बरसेगा ‘जहर’, ऊपर मंडरा रहे ‘प्लास्टिक के बादल’, ! रिसर्च में सामने आई भयानक रिपोर्ट!..

Science News In Hindi: हवा में मौजूद प्लास्टिक अब सिर्फ जमीन या पानी तक सीमित नहीं रह गया है. अब यह आसमान तक पहुंच चुका है. चीन के दो बड़े शहरों ग्वांगझोउ और शीआन के ऊपर हवा में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के कण बड़ी मात्रा में पाए गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कण इतने लंबे समय से हवा में मौजूद हैं कि अब ये बादल बनने में भी भूमिका निभा रहे हैं.

आसमान में प्लास्टिक के कण
यह खुलासा चीन की एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने किया है. उन्होंने इन दोनों शहरों के ऊपर वातावरण की गहराई से रिसर्च की. इसमें सामने आया कि हवा में मौजूद प्लास्टिक के बेहद छोटे कण सामान्य धूल और कणों से कहीं ज्यादा हैं. वैज्ञानिकों ने पाया कि हवा में मौजूद कुल कण और गिरने वाली धूल की मात्रा पहले के अनुमान से दो से छह गुना ज्यादा है.

तकनीक से हुआ खुलासा
वैज्ञानिकों ने इस बार आंखों से देखने वाली पुरानी तकनीक की जगह एक नई माइक्रो जांच प्रोसेस को अपनाया. इसके लिए कंप्यूटर से चलने वाली खास स्कैनिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया. इस तकनीक से 200 नैनोमीटर तक के बेहद छोटे प्लास्टिक कण भी पकड़े गए. इसी वजह से पता लग पाया की चीन के आसमानों में क्या हो रहा है.

ट्रैफिक और सड़क की धूल
रिसर्च में यह भी सामने आया, शहरों में ट्रैफिक हवा में प्लास्टिक फैलाने का बड़ा कारण बन रहा है. सड़क की धूल बार-बार उड़कर हवा में जाती है. उसमें मौजूद प्लास्टिक के कण लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं. हवा शांत होने पर भी ये कण नीचे नहीं बैठते है.

बारिश से फैलता प्लास्टिक
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये प्लास्टिक कण सिर्फ हवा में ही नहीं रहते है, जब बारिश होती है तो ये कण पानी के साथ जमीन पर गिरते हैं. उन इलाकों तक पहुंच जाते हैं जहां से ये निकले भी नहीं थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि बारिश भी प्लास्टिक को दूर-दूर तक फैलाने का जरिया बन रही है.

बादल बनने में भूमिका
रिसर्च में सामने आया कि हवा में लंबे समय तक मौजूद ये प्लास्टिक कण बादल बनने की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इससे मौसम या जलवायु पर कितना असर पड़ेगा. हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बड़ी चिंता की बात है.

सेहत और पर्यावरण के लिए खतरा
वैज्ञानिकों ने बताया है कि माइक्रोप्लास्टिक पहले ही समुद्र, खाने और इंसानी शरीर के अंगों तक पहुंच चुका है. हवा में इसकी मौजूदगी अब तक सबसे कम समझी गई थी. इस रिसर्च से पता चलता है कि प्लास्टिक प्रदूषण सिर्फ जमीन और पानी तक सीमित नहीं है बल्कि यह हवा के जरिए पूरी दुनिया में फैल रहा है.

वैज्ञानिकों की चेतावनी
रिसर्च में कहा गया है कि पिछले 20 सालों में प्लास्टिक एक वैश्विक प्रदूषण बन चुका है. यह धरती के हर हिस्से में फैल चुका है. अब जरूरत है कि हवा में मौजूद प्लास्टिक को लेकर भी गंभीर कदम उठाए जाएं. इसका असर पर्यावरण, मौसम और इंसानी सेहत पर पड़ सकता है.

me.sumitji@gmail.com

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