Himachal Se: कार्बेट टाइगर रिजर्व से राहत भरी खबर सामने आई है. जंगली हाथियों के साथ लापता हुईं वन विभाग की पालतू हथनियां कपिला और तुंगा सुरक्षित वापस लौट आई हैं. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के झिरना जोन से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह बेहद राहत भरी खबर है.

पिछले दो दिनों से लापता वन विभाग की दो बेहद समझदार और प्रशिक्षित हथनियां, कपिला और तुंगा सुरक्षित अपने कैंप में वापस लौट आई हैं. इनके लौटने से पिछले 48 घंटों से तनाव में चल रहे वन प्रशासन ने आखिरकार चैन की सांस ली है.
जंगली झुंड के साथ निकल गई थीं हथनियां
मामला बिजनौर की अमानगढ़ टाइगर रिजर्व सीमा से सटे कॉर्बेट के झिरना जोन का है. 19 मई की शाम को वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम का हिस्सा रहीं कपिला और तुंगा को रोजाना की तरह जंगल में घास चरने के लिए छोड़ा गया था. इसी दौरान वहां से गुजर रहे जंगली नर हाथियों के एक झुंड को देखकर दोनों हथनियां उनकी तरफ आकर्षित हो गईं और घास चरतेचरते अचानक उसी झुंड के साथ घने जंगलों में ओझल हो गईं.
वन विभाग की सांसें फूलीं
गश्त दल की रीढ़ मानी जाने वाली इन दोनों हथनियों के अचानक गायब होने से वन अधिकारियों के हाथपांव फूल गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कॉर्बेट प्रशासन ने आननफानन में कपिला और तुंगा की खोजबीन के लिए वनकर्मियों की कई टीमें गठित कीं. घने जंगलों और जंगली हाथियों के मूवमेंट के बीच रातदिन सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद भी टीमों को कोई सफलता हाथ नहीं लग रही थी. विभाग की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी.
देर रात खुद ही कैंप वापस लौटीं
जब वन विभाग की टीमें भारी तनाव में थीं, तभी 20 और 21 मई की दरमियानी रात को एक चमत्कार हुआ. घने अंधेरे के बीच कपिला और तुंगा चुपचाप खुद ही चलकर अपने पुराने कैंप में वापस लौट आईं. कैंप के कर्मचारियों ने जैसे ही दोनों को सुरक्षित देखा, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. तुरंत आला अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, जिससे महकमे ने बड़ी राहत महसूस की.
हाथियों के झूंड का वीडियो
2016 से पेट्रोलिंग बेड़े की शान हैं कपिला और तुंगा
वन अधिकारियों के मुताबिक, कपिला और तुंगा बेहद समझदार, शांत और इंसानी निर्देशों का पालन करने वाली हथनियां हैं. साल 2016 में वन विभाग ने इन्हें कड़ा प्रशिक्षण देकर अपने पेट्रोलिंग बेड़े में शामिल किया था. तब से लेकर आज तक दोनों ने कठिन और दुर्गम रास्तों पर वन्यजीवों की सुरक्षा और तस्करों पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाई है.
अधिकारियों का मानना है कि जंगली हाथियों के झुंड के साथ जाने के बाद भी उनकी पुरानी ट्रेनिंग और कैंप के प्रति वफादारी भारी पड़ी, जिसके चलते वे खुद ही सुरक्षित रास्ते से वापस आ गईं. फिलहाल दोनों हथनियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं.



