जम्मूकश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष के सुर सुनाई देने लगे हैं. मंगलवार को चार नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, लेकिन मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी भी सामने आई. अनंतनाग पश्चिम से विधायक अब्दुल मजीद लारमी अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए भावुक हो गए, तो ईदगाह के विधायक मुबारक गुल के समर्थकों ने भी सवाल उठाए. शपथ ग्रहण समारोह में 11 विधायकों की गैरमौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है.

इस फेरबदल में जम्मू संभाग के चंब से निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया, जबकि नए शामिल किए गए चारों मंत्री कश्मीर घाटी से हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर मंत्रिपद को लेकर असंतोष के साथसाथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठ रहा है. सवाल है कि क्या उमर अब्दुल्ला इस नाराजगी को बातचीत से संभाल पाएंगे या मंत्रिमंडल विस्तार नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए नई राजनीतिक चुनौती बन सकता है?

चार नए मंत्री, सतीश शर्मा की छुट्टी

जम्मूकश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के गठन के करीब दो साल बाद मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार हुआ. 27 अक्टूबर को श्रीनगर के लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चार विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. नए मंत्रियों में अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ अहमद वानी उर्फ अल्ताफ कालू शामिल हैं. चारों नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हैं और कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व करते हैं.

इस विस्तार के साथ मंत्रिमंडल की संख्या मुख्यमंत्री समेत नौ हो गई. वहीं, चंब से निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया. उनके बाहर होने के बाद जम्मू के मैदानी इलाकों का प्रतिनिधित्व मंत्रिमंडल में नहीं रहा. जम्मू संभाग से अब उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मंत्री जावेद अहमद राणा प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे कुछ वरिष्ठ नेताओं के लिए यह फैसला निराशाजनक रहा.

11 विधायक समारोह से नदारद

मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान करीब 11 विधायकों की गैरमौजूदगी चर्चा में रही. इनमें बिजबेहारा से डॉ. बशीर अहमद वीरी, गुरेज से नजीर अहमद गुरजी, करनाह से जावेद अहमद मीरचल, कंगन से मियां मेहर अली, थन्नामंडी से मुजफ्फर इकबाल खान, बुधल से जावेद इकबाल चौधरी, गुलाबगढ़ से इंजीनियर खुर्शीद अहमद, पुंछ से एजाज अहमद जान, रामबन से अर्जुन सिंह राजू, इंदरवाल से प्यारेलाल शर्मा और बनी से डॉ. रमेश्वर सिंह के नाम शामिल हैं.

इन विधायकों की गैरमौजूदगी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व और पार्टी के भीतर असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है. खास तौर पर पीर पंजाल क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठे हैं. अब सरकार के लिए चुनौती यह है कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज नेताओं और सहयोगी विधायकों के साथ संवाद बनाए रखा जाए, ताकि असंतोष किसी बड़े संगठनात्मक विवाद में न बदले.

अब्दुल मजीद लारमी की नाराजगी खुलकर आई सामने

अनंतनाग पश्चिम से विधायक और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मजीद लारमी को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद थी, लेकिन नए मंत्रियों की सूची में उनका नाम नहीं आया. शपथ ग्रहण के बाद लारमी ने अपनी निराशा जाहिर की. उन्होंने कहा कि उन्हें मंत्री बनने की उम्मीद थी और मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से उनका दिल टूटा है. लारमी की नाराजगी इसलिए अहम है क्योंकि वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं.

मुबारक गुल के समर्थकों ने उठाए सवाल

ईदगाह से विधायक मुबारक गुल को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. इसके बाद उनके समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय और उनके आवास के बाहर प्रदर्शन किया. समर्थकों ने सवाल उठाया कि छह बार विधायक रह चुके और पार्टी के पुराने नेताओं में शामिल मुबारक गुल को मंत्री बनने का अवसर क्यों नहीं मिला. मुबारक गुल की नाराजगी के बीच पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी देने का कदम उठाया. नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया. यह फैसला ऐसे समय आया, जब गुल के समर्थक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर विरोध जता रहे थे.

आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के ऐलान से बढ़ी दिलचस्पी

नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही खींचतान के बीच श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का मामला भी चर्चा में है. वह पहले ही पार्टी नेतृत्व से वैचारिक मतभेदों के चलते 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा से इस्तीफा देने की घोषणा कर चुके हैं. उनका मतभेद मुख्य रूप से जम्मूकश्मीर के विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व के रुख से जुड़ा रहा है.