Police Gender Guidelines: देश के ज्यूडिसियल सिस्टम और पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, पूर्वाग्रहमुक्त और मानवीय बनाने की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। जिसके अनुसार सभी कोर्ट और थानों में चरित्रहीन जैसे अपमानजनक शब्द को प्रयोग नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने नई हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स के ड्राफ्ट को मंजूर कर दिया है। यह ड्राफ्ट भोपाल की नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में तैयार हुआ है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिए हैं कि सभी अदालतें और पुलिस FIR और चार्जशीट में इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।
नई गाइडलाइन के अनुसार अब कोर्ट, पुलिस एफआई और चार्जशीट में कॉल गर्ल की जगह सेक्स वर्कर और रखैल की जगह पार्टनर शब्द का इस्तेमाल करना जरूरी होगा।
कोर्ट और पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने नई हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। यह ड्राफ्ट भोपाल की नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में तैयार हुआ है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिए हैं कि सभी अदालतें और पुलिस FIR और चार्जशीट में इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।
नई जेंडर गाइडबुक: प्रमुख बदलावों में ये भी शामिल
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गाइडलाइन का उद्देश्य न्याय प्रणाली को अभियुक्त केंद्रित से बदलकर पीड़ित केंद्रित बनाना है। इसके लिए कई प्रावधान किए गए हैं।
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बच्चों के बयान दर्ज करते समय यह सुनिश्चित करना कि वे आरोपी के सामने न आएं और उनके लिए सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति की जाए।
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अच्छी महिला और बुरी महिला के भेदभाव को पूरी तरह खारिज किया गया है।
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लस्ट या हवस जैसे शब्दों से बचना चाहिए, क्योंकि ये अपराध की गंभीरता को कम कर सकते हैं।
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न्यायाधीश और पुलिस का कर्त्तव्य है कि पीड़ित को शुरुआत से ही कानूनी सहायता और वकील उपलब्ध कराया जाए।
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सुनवाई के दौरान पीड़ित को दोबारा मानसिक आघात न पहुंचे, इसके लिए संवेदनहील सवालों पर रोक लगाने के निर्देश।
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no hue and cry ऐसे शब्दों से बचें, जो पीड़ित को दोषी ठहराते हों।
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परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है के बजाय पीड़ित को हुए नुकसान पर ध्यान दिया जाए।
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स्क्रीन के पीछे से गवाही पीड़ित को वीडियो लिंक या स्क्रीन के पीछे से गवाही की सुविधा दी जाए।



