US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जंग ने नया मोड़ ले लिया है. डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा सीजफायर के ऐलान ने साफ कर दिया है कि अब वो हथियारों से जंग नहीं लड़ना चाहते हैं. वहीं शांतिवार्ता के लिए ईरान की मनाही इशारा कर रही है कि वो अमेरिका की ताकत के आगे झुकने वाला नहीं है. ऐसे में ईरान को घुटनों पर लाने के लिए अब अमेरिका ने नई रणनीति बना ली है. वो ईरान को उसी के तेल में डुबाकर हराना चाहता है. ऐसी प्लानिंग कर ली है कि ईरान सामने से आकर युद्ध को खत्म करने की पेशकश कर सकता है. ईरान की सबसे बड़ी ताकत पर अमेरिका ने चोट कर दी है.

ईरान को हराने के लिए अमेरिका का सीक्रेट प्लान क्या है ?
डोनाल्ड ट्रंप ने इधर युद्धविराम का ऐलान किया और उधर अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक पोस्ट के जरिए युद्ध को लेकर अमेरिका की नई रणनीति के संकेत दे दिए. युद्धविराम के बावजूद अमेरिका ने ब्लॉकेड नहीं हटाया है. ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखकर वो ईरान की सबसे बड़ी ताकत को ही उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनाना चाहते हैं.

अमेरिका का अगला निशाना खार्ग आईलैंड है, जहां ब्लॉकेड को और मजबूत करके अमेरिका ईरान के तेल को ही अपना हथियार बनाने की प्लानिंग कर रहा है. अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान ना तो कोई आयात कर पा रहा है और ना ही अपना तेल निर्यात कर पा रहा है. इसी तेल से होने वाली कमाई से IRGC की भी फंडिंग होती है. आयात रुकने से खाने-पीने की दिक्कत हो रही है. खार्ग आईलैंड, जहां से ईरान के 90 फीसदी तेल का उत्पादन और निर्यात होता है, अमेरिका ने वहां घेराबंदी कर दी है. ईरान में तेल का उत्पादन तो हो रहा है, लेकिन निर्यात नहीं होने से स्टोरेज सबसे बड़ी समस्या बनने वाला है. ईरान चाहकर भी तेल का प्रोडक्शन रोक नहीं सकता है, क्योंकि तेल के कुओं को बंद करना पानी के नल बंद करने जैसा नहीं होता है. अगर कुएं एक बार बंद हुए तो उन्हें दोबारा शुरू करना बेहद मुश्किल है.

ना बम, ना मिसाइल, बस तेल ही कर देगा अमेरिका का काम आसान
ईरान के लिए तेल के कुएं बंद करना एक कॉम्प्लेक्स और बेहद खर्चीला प्रोसेस हैं. तेल के कुओं का दबाव कम होता है, इसे बंद करने पर उसके अंदर पानी आ सकता है. चट्टानों की संरचना हमेशा के लिए खराब हो सकती है और कच्चा तेल भारी होने की वजह से पाइपलाइन को जाम कर उसे बंद कर सकता है. यानी अगर कुएं एक बार बंद किए गए, तो उसे दोबारा शुरू करना बेहद मुश्किल है और अगर शुरू हो भी गया तो प्रोडक्शन पहले ही तरह नहीं होगा.

ईरान के पास कितनी है तेल स्टोरेज की क्षमता ?
ईरान के पास तेल का बड़ा खजाना है. करीब 208.6 अरब बैरल वेरिफाइड तेल भंडार है. दुनिया के कुल तेल भंडार में उसकी हिस्सेदारी 12 फीसदी की है. मौजूदा समय में ईरान रोजाना 30 से 45 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है. साल 2025-2026 में उसका रोजाना निर्यात लगभग 15 लाख बैरल का रहा है, लेकिन अमेरिका के ब्लॉकेड की वजह से अब वो तेल का निर्यात नहीं कर पा रहा है. ईरानी जहाजों को अमेरिकी नौसेना रोक रही है. ऐसे में जो तेल कुओं से निकाले जा रहे हैं, उन्हें स्टोर करना ईरान के लिए सबसे बड़ी समस्या है. ईरान के पास तेल भंडारण के सीमित साधन है. जमीन पर 50 से 55 मिलियन बैरल तेल भंडारण की क्षमता है, जिसमें से 60 फीसदी स्टोरेज पहले से भरे हैं. उसके पास करीब 2 करोड़ बैरल अतिरिक्त स्टोरेज की कैपासिटी बची है. जबकि ईरान रोजाना 1.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन कर रहा है.

स्टोरेज फुल होने के बाद क्या होगा ?
ईरान की मजबूरी को समझिए. तेल निकालना जारी है, जिसे ईरान बंद नहीं कर सकता है. स्टोरेज टैंक भरने वाले है और निर्यात पर अमेरिका की नाकेबंदी है, यानी अमेरिका ने उसे चारों ओर से घेर दिया है. ऐसे में ईरान के पास सिर्फ दो विकल्प बचेंगे. पहला ये कि वो तेल का उत्पादन बंद कर दे, जिसके लिए तेल के कुएं बंद करने होंगे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दूसरा उसे अमेरिका की शर्त मानकर स्टेट ऑफ होर्मुज को खोलना होगा. दोनों ही शर्त मानना ईरान के लिए आसान नहीं है. तेल का प्रोडक्शन रोके या होर्मुज खोले, दोनों का मतलब अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है. तेल ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और होर्मुज को बंद कर उसने अमेरिका को युद्ध में पछाड़ रखा है. होर्मुज पर टोल वसूली के जरिए वो युद्ध में हुए अपने नुकसान की भरपाई कर रहा है. करोड़ों-अरबों रुपये की कमाई कर रहा है.

अमेरिका के सीजफायर की मिस्ट्री डिकोड
अमेरिका ने भले ही एकतरफा सीजफायर का ऐलान किया हो, लेकिन उसके पीछे उसकी मंशा अब डिकोड हो गई है. वो नाकेबंदी के जरिए ईरान की कमर तोड़ना चाहता है. बिना तेल बेचे ईरान ज्यादा दिन का युद्ध में टिक नहीं पाएगा. ऐसे में उसे थक हारकर युद्ध से पीछे हटना पड़ेगा.