
Can we do vrat in periods: व्रत-त्योहार के बीच पीरियड्स आने की समस्या से हर महिला कभी न कभी दो चार जरूर होती है. ऐसे में पहला सवाल यह ही होता है कि व्रत करें या ना करें? साथ ही पीरियड्स के किस दिन से पूजा करें? कुछ व्रत ऐसे होते हैं जिन्हें छोड़ना संभव नहीं होता है या छोड़ने का मन नहीं करता है. तब असमंजस ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा भी पीरियड्स को लेकर व्रत और पूजा-पाठ से जुड़े कई कंफ्यूजन लड़कियों और महिलाओं में रहते हैं.
चूंकि चैत्र नवरात्र शुरू हो गई हैं और इस दौरान पीरियड्स आ जाते हैं तो क्या करें, या जिन महिलाओं का पहले से मासिकधर्म चल रहा है, वे किस दिन से मां दुर्गा की पूजा कर सकती हैं, इनके सही जवाब जानिए, ताकि धार्मिक मान्यताओं और मर्यादा का सही तरीके से पालन हो सके.
नवरात्र के दौरान पीरियड्स को लेकर नियम
सवाल : यदि पहले से पीरियड्स चल रहे हैं तो नवरात्र में किस दिन से पूजा-पाठ कर सकते हैं?
जवाब : धर्म-शास्त्रों के अनुसार पीरियड्स के चौथे या पांचवें दिन जब रक्तस्राव पूरी तरह रुक जाए, तब बाल धोकर स्नान करें और फिर शुद्ध होकर सामान्य रूप से पूजा-पाठ में शामिल हो सकती हैं और मंदिर जा सकती हैं. यदि 5 दिन तक ब्लीडिंग होती है तो छठवें दिन पूजा-पाठ करें.
सवाल : यदि नवरात्र व्रत के बीच में पीरियड्स आ जाएं तो व्रत जारी रखें या नहीं?
जवाब : यदि नवरात्र व्रत का संकल्प लिया है और बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो व्रत को बीच में न तोड़ें. बेहतर होगा कि व्रत जारी रखें. इस दौरान आप मानसिक पूजा कर सकती हैं. भगवान हमारे प्रेम और भक्ति को विशेष महत्व देते हैं. यदि ज्यादा अस्वस्थता महसूस हो और व्रत रख पाना संभव न हो तो भगवान से माफी मांगते हुए व्रत छोड़ दें.
सवाल : घर में कलश स्थापना की है या अखंड ज्योत जलाई है तो पीरियड्स के दौरान क्या करें?
जवाब : 4 से 5 दिन तक पूजा स्थल के पास जाने से बचें. कलश और अखंड ज्योत को स्पर्श न करें. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पति-बच्चों या अन्य किसी सदस्य से दोनों समय देवी मां को भोग अर्पित करवाएं. ताजा भोग बनाने में कोई सक्षम ना हो तो सूखे मेवे और फलों का भोग लगवाएं. साथ ही आरती करवाएं.
सवाल : पीरियड्स में कन्या भोजन करवा सकते हैं या नहीं?
जवाब : कन्याओं को देवी मां का रूप माना गया है. लिहाजा पीरियड्स में कन्या पूजन भी ना करें. न ही कन्याओं के लिए भोजन बनाएं, न उनके पैर छुएं. बल्कि दूर से ही उन्हें प्रणाम करके आशीर्वाद ले लें दान-दक्षिणा भी किसी अन्य व्यक्ति से दिलवाएं.




