
कनाडा के विंडसर में रह रही मशहूर पंजाबी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नैन्सी ग्रेवाल की एक घर के बाहर बेरहमी से हत्या कर दी गई. मूल रूप से लुधियाना के नारंग गांव की रहने वाली 45 वर्षीय नैन्सी पेशे से नर्स थीं. अब इस मामले में बड़ी खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि गैंगस्टर आकाश हरिके ने नैन्सी की हत्या का जिम्मा लिया है. एक पोस्ट कर कहा कि वो खालिस्तान के खिलाफ बोलती थी, इसलिए उसे निपटा दिया. हालांकि, इस पोस्ट की पुष्टि Tv9 भारतवर्ष नहीं करता. वहीं, उनकी हत्या के पीछे की वजहें और मां द्वारा किए गए खुलासे भी बेहद चौंकाने वाले हैं.
आकाश हरीके और सुखा संधू ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली है. इंस्टाग्राम पर आकाश हरीके नाम से बनी आईडी पर लिखा है- वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह. जो विंडसर, ओंटारियो (कनाडा) में नैंसी ग्रेवाल का कत्ल हुआ है, ये काम हमारे भाइयों ने किया है. इसकी जिम्मेदारी मैं आकाश हरीके और सुखा संधू लेते हैं. ये महिला धर्म और खालिस्तान के बारे में गलत बोलती थी, और उसे इसका परिणाम मिल गया है. बाकी हमारी किसी भी धर्म के साथ कोई दुश्मनी नहीं है. लेकिन जो भी इसके जैसे कौम के खिलाफ बोलेगा, उसका यही हाल होगा.
नैन्सी ग्रेवाल की हत्या के पीछे सबसे बड़ा एंगल निहंग सिंहों और स्थानीय गुरुद्वारा कमेटी के साथ उनका पुराना विवाद बताया जा रहा है. नैन्सी की मां शिंदर पाल ग्रेवाल के अनुसार, ये दुश्मनी तब शुरू हुई जब नैन्सी ने गुरुद्वारा साहिब में राशन चोरी की शिकायतों के बाद वहां सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे.
निहंगों ने मदद तो की, मगर…
नैन्सी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके घर की दीवार पर एक धार्मिक स्थल ने कब्जा कर लिया था. इसे हटाने के लिए उन्होंने कुछ निहंगों से मदद मांगी. निहंगों ने कब्जा तो हटवा दिया, लेकिन बदले में पैसों की मांग की. 10000 का सौदा 5100 रुपये और ढाबे पर खाने पर तय हुआ.

सोशल मीडिया पर वार-पलटवार
इस घटना के बाद कुछ निहंगों ने सोशल मीडिया पर नैन्सी और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कीं, जिसका नैन्सी ने मुंहतोड़ जवाब दिया नैन्सी का कहना था कि वो गुरु की लाडली फौज (असली निहंगों) का सम्मान करती हैं, लेकिन जो अपराधी चोला पहनकर नशा और गुंडागर्दी करते हैं, वह उनके खिलाफ हैं.
खालिस्तानियों को भेड़िया कहती थी नैन्सी
नैन्सी अपने वीडियो में निहंगों के साथ-साथ कट्टरपंथी खालिस्तानियों को भी टारगेट करती थीं. उनकी मां ने बताया कि नैन्सी उन लोगों को भेड़िया कहती थी जो धर्म की आड़ में नफरत फैलाते थे. हालांकि, वो लोकतांत्रिक तरीके से मांग रखने वालों के खिलाफ नहीं थी, लेकिन गालियां देने वालों को वह सोशल मीडिया पर कड़ा जवाब देती थी. इसी कारण वह कट्टरपंथियों की आंखों में चुभने लगी थीं.
18 बार घोंपा चाकू, काट दी जुबान
नैन्सी की मां ने जो खुलासे किए हैं, वे रूह कंपा देने वाले हैं. उन्होंने बताया कि यह एक सोची-समझी साजिश थी. मंगलवार देर शाम नैन्सी एक मरीज को देखने गई थीं. जैसे ही वो घर से बाहर निकलीं, हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया. नैन्सी के पेट में 18 बार चाकू घोंपा गया. मां का आरोप है कि हमलावरों ने उनकी जुबान भी काट दी थी ताकि वो चीख न सकें. जिस जगह हत्या हुई, वहां कोई कैमरा नहीं था, जबकि नैन्सी के खुद के घर पर कैमरे होने के कारण हमलावर वहां हमला करने से डरते थे.

पहले घर जलाया, फिर दी जान से मारने की धमकी
यह पहली बार नहीं था जब नैन्सी पर हमला हुआ. 2 महीने पहले एक गरीब परिवार की मदद करने और सोना दिलवाने के विवाद में कुछ लोग उनके खिलाफ हो गए थे. 2 महीने पहले सुबह 4 बजे नैन्सी के घर को आग लगा दी गई थी. मां का आरोप है कि पुलिस को बार-बार शिकायत देने और धमकी भरे पत्र सौंपने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पुलिस केवल गुरुद्वारे में बैठे लोगों को चेतावनी देकर छोड़ देती थी.
नैंसी ने क्यों बदला था अपना असली नाम?
नैंसी ने बताया था कि उनके पिता ने उनका नाम मोनीप्रीत रखा था. लेकिन स्कूल में उन्हें मोनी कोनी कहकर चिढ़ाया जाता था. इसलिए उन्होंने घर पर बिना बताए अपना नाम और स्कूल दोनों बदल लिए थे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। नैन्सी ने बचपन से ही जगरातों और स्टेज शो में गाना शुरू कर दिया था. 2012 में आम आदमी पार्टी से जुड़ीं, लेकिन 2015 में राजनीति छोड़ नर्सिंग की पढ़ाई के लिए कनाडा चली गईं. उनका विवाह एक इंजीनियर से हुआ था. नैंसी का कहना था कि पति सभी धर्मों को गाली देता था. उन्हें घर पर भी पैसा नहीं भेजने देता था. इसलिए दोनों के बीच तलाक हो गया.



