Share Market Open India : वैश्विक मोर्चे पर गहराते भूराजनीतिक तनाव और मिलेजुले अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सोमवार को बेहद सुस्त और सपाट देखने को मिली है। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर रुझानों के कारण घरेलू निवेशकों ने भी फूंकफूंक कर कदम रखा, जिससे शुरुआती कारोबार में बाजार का रुख अनिर्णायक बना रहा। इस सुस्त शुरुआत के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स महज 45 अंक की मामूली कमजोरी के साथ 77,055 अंक के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 5 अंक की नाममात्र बढ़त के साथ 24,061 के स्तर पर टिकने की जद्दोजहद करता नजर आया। बाजार के इस ठंडे रुख के बावजूद फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली है, जिसने बाजार को भारी गिरावट के गर्त में जाने से बचा लिया।

बाजार के सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो शुरुआती कारोबार में चौतरफा उतारचढ़ाव का माहौल साफ दिखाई दे रहा था। इस अनिश्चितता के दौर में निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांक सबसे बड़े गेनर्स के रूप में उभरकर सामने आए और उन्होंने बाजार को सहारा दिया। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक के शेयरों में भी हरे निशान यानी तेजी के साथ कारोबार दर्ज किया जा रहा था। इसके विपरीत, रक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिसके चलते निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी आईटी, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी पीएसई, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी ऑटो के सूचकांक लाल निशान के साथ गिरावट की चपेट में आ गए।
दिग्गज शेयरों की बात करें तो सेंसेक्स पैक में इटरनल, सन फार्मा, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसी कंपनियां मुनाफा कमाने वाले शीर्ष शेयरों की सूची में शामिल रहीं। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, इन्फोसिस, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारती एयरटेल और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों को शुरुआती कारोबार में भारी नुकसान उठाना पड़ा और ये प्रमुख लूजर्स के रूप में दर्ज किए गए। एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का मिलाजुला और अनिश्चित रुख बना रहा, जहां टोक्यो, सोल और जकार्ता के बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, तो वहीं शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक के बाजारों में मामूली तेजी का रुख देखा गया। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स में 0.09 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों में इस उठापटक और मिलाजुला कारोबार होने की मुख्य वजह मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव और युद्ध जैसी स्थिति का पैदा होना है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों से आ रही ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब दोनों देश एकदूसरे पर सीधे हमले रोकने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं और तनाव को कम करने के उद्देश्य से दोनों पक्षों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। इस भूराजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल आ गया है, जिसमें डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 70.07 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.98 प्रतिशत की मजबूती के साथ 73.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व के राजनीतिक हालात आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच कतर में होने वाली प्रस्तावित वार्ता से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन कच्चे तेल का बढ़ता ग्राफ भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट मार्जिन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। निवेशक अब वैश्विक मोर्चे पर होने वाले हर छोटेबड़े बदलावों पर पैनी नजर रख रहे हैं, और कतर बैठक के नतीजों के बाद ही बाजार में किसी बड़े और स्पष्ट रुझान की उम्मीद की जा सकती है, जो यह तय करेगा कि दलाल स्ट्रीट आने वाले सत्रों में रिकवरी के रास्ते पर लौटेगा या फिर वैश्विक दबाव के आगे घुटने टेकेगा।


