अगर आप घर में खाना पकाने के लिए रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, तो गैस कनेक्शन से जुड़ा एक नया अपडेट आपके लिए बेहद अहम है. हाल ही में सरकार ने ‘वन हाउस, वन गैस कनेक्शन’ नीति के तहत 30 दिन व 90 दिन के सख्त नियम तय किए हैं. यह बदलाव मुख्य रूप से उन शहरी क्षेत्रों के लिए है, जहां पाइप्ड नैचुरल गैस की लाइन पहुंच चुकी है. अब एक ही पते पर एलपीजी व पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ चालू नहीं रखे जा सकेंगे. इस पूरी कवायद का सीधा लक्ष्य डुप्लीकेट गैस कनेक्शनों को जड़ से खत्म करना है, जिससे सरकारी सब्सिडी की लीकेज रुके व इसका लाभ केवल वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सके. लेकिनअगर आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं या आपके क्षेत्र में अब तक पाइप वाली गैस की सुविधा नहीं पहुंची है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. बिना PNG वाले क्षेत्रों के उपभोक्ता बेफिक्र होकर अपना LPG कनेक्शन पहले की तरह जारी रख सकते हैं.

30 दिन की डेडलाइन

पेट्रोलियम मंत्रालय व तेल कंपनियों ने दोहरे गैस कनेक्शन की व्यवस्था को पूरी तरह से बंद करने का स्पष्ट खाका तैयार कर लिया है. नए नियमों के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता अपने घर में नया पीएनजी कनेक्शन लगवाता है, तो उसे एक तय समयसीमा के भीतर अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य होगा. इसके लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया है. इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है. मान लीजिए कि किसी उपभोक्ता के घर में 1 जून को पीएनजी की लाइन चालू हो जाती है, तो उसे हर हाल में 30 जून तक अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन संबंधित गैस एजेंसी में जाकर वापस करना होगा. यह कदम सुनिश्चित करता है कि ट्रांजिशन पीरियड खत्म होने के बाद कोई भी उपभोक्ता दोहरे विकल्प का गैरजरूरी फायदा न उठाए.

90 दिन का अल्टीमेटम

उन इलाकों में जहां पीएनजी की पाइपलाइन पहले से बिछ चुकी है व गैस की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है, वहां के लिए नियम थोड़े अलग हैं. ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले जिन उपभोक्ताओं ने अब तक पीएनजी कनेक्शन नहीं लिया है, उन्हें तेल कंपनियों की तरफ से शिफ्ट होने के लिए 90 दिन का समय दिया जा रहा है. गैस एजेंसियों ने इस बाबत ग्राहकों को नोटिस भेजना भी शुरू कर दिया है. अगर कोई उपभोक्ता इस 90 दिन की नोटिस अवधि के बीत जाने के बाद भी पीएनजी नेटवर्क पर शिफ्ट नहीं होता है, तो उसका मौजूदा एलपीजी कनेक्शन अस्थायी रूप से सस्पेंड या पूरी तरह से रद्द किया जा सकता है. यह फैसला लोगों को सुरक्षित, सस्ते व पाइप के जरिए मिलने वाले पीएनजी विकल्प की तरफ तेजी से मोड़ने के लिए लिया गया है.

किन इलाकों में लागू नहीं होगी यह पाबंदी?

इस पूरे मामले के बीच यह समझना भी जरूरी है कि रसोई गैस सिलेंडर पूरी तरह से बाजार से गायब नहीं होने वाले हैं. जो उपभोक्ता ग्रामीण परिवेश में रहते हैं या जिन शहरी कॉलोनियों में अभी तक पीएनजी का बुनियादी ढांचा नहीं पहुंचा है, वहां पुराने नियमों के तहत ही एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी जारी रहेगी. इन उपभोक्ताओं पर 30 या 90 दिन की डेडलाइन का कोई भी असर नहीं पड़ेगा. सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है. महानगरों व बड़े शहरों में पीएनजी जैसे स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना प्राथमिकता है, ताकि गैस सिलेंडर की भारी भरकम ढुलाई से निजात मिल सके. जहां पाइपलाइन की पहुंच नहीं है, वहां LPG सिलेंडर के नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है.