Himachal Se: कानपुर में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के नए रूट पर ट्रायल के दौरान दो मेट्रो ट्रेनें आमनेसामने आ गईं. हालांकि, दोनों ट्रेनों के पहिए 20 मीटर पहले ही अपने आप थम गए. फिलहाल इस कोलिजन टेस्ट के दौरान मौजूद लोगों के हाथपांव फूल गए, क्योंकि उन्हें इस ट्रायल की जानकारी नहीं थी. अचानक दो ट्रेनें आमनेसामने आती देख लोग दहशत में आ गए थे.

आपको बता दें कि इस रूट पर इससे पहले भी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन मोड पर कई सफल परीक्षण किए जा चुके हैं. बीते मंगलवार कानपुर सेंट्रल से मेट्रो टनल के भीतर फर्राटा भरते हुए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन की ओर बढ़ रही थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। तभी इसी ट्रैक पर ट्रांसपोर्ट नगर की दिशा से दूसरी मेट्रो ट्रेन भी 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सामने आ गई.
आमनेसामने आते ही 20 मीटर पहले दोनों ट्रेनों के पहिए खुद थम गए. कॉरिडोर1 के नवनिर्मित कानपुर सेंट्रल स्टेशन से नौबस्ता तक किए गए इस कोलिजन टेस्ट के दौरान मेट्रो के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे.
कानपुर मेट्रो की आधुनिक CBTC सिग्नल प्रणाली और ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन मोड की विश्वसनीयता जांचने के लिए यह टेस्ट किया गया था.
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक Sushil Kumar ने जानकारी देते हुए बताया कि परीक्षण के दौरान टक्कर जैसी स्थिति जानबूझकर बनाई गई थी, ताकि यह जांचा जा सके कि आपात स्थिति में ट्रेन का ऑटोमेटिक सुरक्षा तंत्र कितनी तेजी और सटीकता से काम करता है.
फिलहाल पूरे परीक्षण में निर्धारित दूरी पर पहुंचते ही दोनों ट्रेनों का ब्रेकिंग सिस्टम स्वतः सक्रिय हो गया और ट्रेनें रुक गईं. टेस्ट के दौरान ट्रैक पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार पर हाईस्पीड टेस्ट और स्पीड ब्रेक टेस्ट भी पूरे किए गए.
इसके अलावा, प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बताया कि विदेशी एजेंसी द्वारा पूरे रूट का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन भी कराया गया, जिसमें सिग्नल और सुरक्षा मानकों को संतोषजनक पाया गया है. उन्होंने कहा कि यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार के परीक्षण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं.
फिलहाल कानपुर मेट्रो के नए रूट पर कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो सेवा जल्द शुरू होने वाली है. यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत तमाम तरह के परीक्षण लगातार किए जा रहे हैं. इसके साथ ही नए स्टेशनों पर सुरक्षा मानकों की भी जांचपरख की जा रही है.



