भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों अनेक कारणों से चर्चा में हैं. आरोप है कि उन्होंने अपने सहयोगी चुनाव आयुक्तों की अनदेखी कर कई आदेश निकाल दिए. आपत्तियों को अनेक बार अनसुना कर दिया, जिसका लाभ सत्ताधारी दल को मिला. विपक्ष उन्हें लेकर हमलावर है. वह उन्हें पद से हटाए जाने की मांग कर रहा है. मामला कोर्ट में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सस्पेंड करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है.भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों को हटाना एकदम आसान प्रक्रिया नहीं है.

आइए, इसी बहाने समझते हैं कि दुनिया के बड़े लोकतंत्र में चुनावों की कैसी व्यवस्था है? किन देशों में मुख्य चुनाव आयुक्त जैसा पद है? जहां नहीं है वहां कैसे होते हैं चुनाव? जानें दुनिया के दस बड़े लोकतंत्र में चुनावी नेतृत्व किस तरीके से काम करता है?

समान काम, अलगअलग मॉडल

दुनिया के दस बड़े लोकतंत्र में भारत जैसी व्यवस्था बिल्कुल उसी रूप में हर जगह नहीं मिलती. भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रीय चुनाव आयोग के साथ स्पष्ट नेतृत्वकारी पद मौजूद हैं. ब्राजील में राष्ट्रीय चुनावी संस्था का नेतृत्व अदालत के अध्यक्ष के पास है. ऑस्ट्रेलिया में अध्यक्ष और चुनाव आयुक्त की भूमिकाएं साथ चलती हैं. इसके विपरीत अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान में चुनावी काम कई संस्थाओं और प्रशासनिक स्तरों में बंटा है. वहां चुनाव का प्रमुख राज्य, स्थानीय प्रशासन, मंत्रालय या अलग आयोग हो सकता है.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार.

अमेरिका: एक राष्ट्रीय चुनाव प्रमुख नहीं

अमेरिका में भारत जैसा एक राष्ट्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं है. यहां चुनावों का प्रबंधन मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय प्रशासन के हाथ में होता है. राज्य अपने चुनाव अधिकारी और नियम तय करते हैं. संघीय चुनाव आयोग का काम मुख्य रूप से चुनावी धन और राजनीतिक प्रचार के वित्तीय नियमों की निगरानी करना है. वह पूरे देश के मतदान का संचालन करने वाला एकल चुनाव आयोग नहीं है. इस व्यवस्था में चुनाव का व्यावहारिक प्रमुख राज्य के अनुसार बदलता है. कहीं राज्य सचिव, कहीं चुनाव निदेशक और कहीं स्थानीय चुनाव अधिकारी यह जिम्मेदारी निभाते हैं.

यूनाइटेड किंगडम: निर्वाचन आयोग और स्थानीय अधिकारी

ब्रिटेन में इलेक्टोरल कमीशन चुनावों और जनमतसंग्रह से जुड़े नियमों, राजनीतिक दलों के पंजीकरण और चुनावी वित्त की निगरानी करता है. लेकिन मतदान की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर भी चलती है. निर्वाचन क्षेत्रों में रिटरनिंग ऑफिसर चुनाव के संचालन और परिणामों की घोषणा की जिम्मेदारी निभाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस तरह ब्रिटेन में भारत जैसा एक ही अधिकारी पूरे चुनावी तंत्र का प्रमुख नहीं है. आयोग और स्थानीय चुनाव अधिकारी अलगअलग भूमिकाएं निभाते हैं.

जर्मनी: संघीय रिटर्निंग अधिकारी

जर्मनी में संघीय चुनावों के लिए फेडरल रिटरनिंग ऑफिसर का पद है. जिसे जर्मन में बुंडेसवाल्लाइटर कहा जाता है. इस पद पर बैठे व्यक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. यह अधिकारी संघीय चुनाव की तैयारी और प्रशासनिक समन्वय में मदद करता है. राज्यों और स्थानीय निकायों के चुनावी अधिकारियों की भी अपनी जिम्मेदारियां होती हैं. यह पद चुनाव से जुड़ा केंद्रीय प्रशासनिक नेतृत्व देता है. फिर भी इसका ढांचा भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त जैसा नहीं है. जर्मनी में चुनावी काम संघीय और राज्य स्तर पर बंटा हुआ है.

फ्रांस: प्रशासन और संवैधानिक निगरानी

फ्रांस में चुनावों का आयोजन मुख्य रूप से गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन करते हैं. राष्ट्रपति चुनाव और जनमतसंग्रह जैसे मामलों में संवैधानिक परिषद की भी अहम भूमिका होती है. परिषद चुनाव प्रक्रिया और नतीजों से जुड़े कुछ विवादों की जांच करती है. इस व्यवस्था में भारत की तरह चुनाव आयोग का एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त पूरे चुनावी प्रबंधन का नेतृत्व नहीं करता. प्रशासनिक संचालन और कानूनी निगरानी अलगअलग संस्थाओं के बीच बंटी है.

जापान: स्थानीय चुनाव प्रबंधन आयोग

जापान में चुनाव प्रबंधन का बड़ा हिस्सा स्थानीय चुनाव प्रबंधन आयोगों के जिम्मे है. राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनावों के समन्वय से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं. लेकिन मतदान का संचालन स्थानीय प्रशासन के जरिए होता है. यहां भारत जैसा एक अकेला राष्ट्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं है. अलगअलग स्तरों की चुनाव प्रबंधन संस्थाएं अपनेअपने क्षेत्र में काम करती हैं.

ब्राजील: सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट

ब्राजील में चुनावी व्यवस्था का प्रमुख संस्थान सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट है. यही संस्था चुनावों का प्रशासन, चुनावी नियमों की निगरानी और चुनावी विवादों से जुड़े काम करती है. इसकी अध्यक्षता अदालत के एक न्यायाधीश करते हैं. भारत की तरह यहां भी राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख संस्था है. लेकिन ब्राजील का मॉडल न्यायिक प्रकृति का है. इसलिए इसके प्रमुख का पद भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से पूरी तरह समान नहीं है.

इंडोनेशिया: जनरल इलेक्शन कमीशन का अध्यक्ष

इंडोनेशिया में जनरल इलेक्शन कमीशन चुनावों का आयोजन करती है. आयोग में कई सदस्य होते हैं और इनमें से एक अध्यक्ष होता है. आयोग राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों के प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है. इस कमीशन का अध्यक्ष भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलताजुलता पद है. फिर भी दोनों देशों के कानून, आयोग की संरचना और चुनावी अधिकार अलग हैं.

दक्षिण अफ्रीका: स्वतंत्र चुनाव आयोग

दक्षिण अफ्रीका में स्वतंत्र इलेक्टोरल कमीशन चुनावों का आयोजन और निगरानी करता है. आयोग का नेतृत्व एक अध्यक्ष करता है. यह संस्था मतदाता पंजीकरण, मतदान की तैयारी और चुनावी प्रक्रिया के संचालन में भूमिका निभाती है. दक्षिण अफ्रीका का मॉडल भारत के करीब दिखता है, क्योंकि वहां भी चुनावों के लिए स्वतंत्र राष्ट्रीय आयोग और उसका अध्यक्ष है. हालांकि पदनाम और संवैधानिक व्यवस्था अलग है.

ऑस्ट्रेलिया: चुनाव आयुक्त और अध्यक्ष

ऑस्ट्रेलिया में आस्ट्रेलियन इलेक्टोरल कमीशन संघीय चुनावों का संचालन करती है. आयोग में अध्यक्ष और चुनाव आयुक्त सहित सदस्य होते हैं. चुनाव आयुक्त चुनावी प्रशासन और आयोग के दैनिक कामकाज में प्रमुख भूमिका निभाता है. राज्यों और क्षेत्रों के अपने चुनावी निकाय भी हैं. इसलिए ऑस्ट्रेलिया में चुनाव का नेतृत्व केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय आयोग और राज्य स्तरीय संस्थाएं मिलकर काम करती हैं.

भारत: मुख्य निर्वाचन आयुक्त

भारत में निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है. यह संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाता है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त आयोग का प्रमुख होता है. आयोग में अन्य निर्वाचन आयुक्त भी शामिल होते हैं. इस तरह भारत में एक स्पष्ट राष्ट्रीय पद है, जो चुनाव आयोग के नेतृत्व से जुड़ा है.