Himachal Se: Ancestor Worship In Malmas : बीते 17 मई 2026 से मलमास यानी अधिकमास की शुरुआत हो चुकी है और आगामी 15 जून तक रहने वाली है। सनातन धर्म में मलमास का बड़ा महत्व बताया गया है। धर्म शास्त्रों में इस महीने में शुभ एवं मांगलिक कार्य जैसे शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों की मनाही होती है। वही इस मास में जहां भगवान विष्णु की पूजा, जप और दानपुण्य के लिए जाना जाता है।

मलमास पितरों को समर्पित
धर्म शास्त्रों में मलमास को अपने करने और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भी शुभ समय बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र महीने में कुछ विशेष उपाय करने से पूर्वज बेहद तृप्त होते हैं और वंशजों को सुखसमृद्धि का आशीर्वाद देते है।
पितरों को तृप्त के लिए क्या उपाय करें?
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पितरों के नाम से दान करें
मलमास में पितरों के नाम से दान करने की परंपरा को बहुत शुभ माना जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, जल, छाता, फल और दक्षिणा दान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
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गाय, कौवा और कुत्ते को भोजन कराएं
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में कौवे को पितरों का प्रतीक माना गया है। मलमास में गाय, कौवा और कुत्ते को भोजन कराना पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली कई परेशानियां दूर होने लगती है।
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पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार मलमास में सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ में जल अर्पित करना और दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे पितृ दोष की शांति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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जरूरतमंदों, बुजुर्गों और गरीबों की सेवा करें
मलमास में जरूरतमंदों, बुजुर्गों और गरीबों की सेवा को बहुत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति सच्चे मन से दूसरों की सहायता करता है, उस पर पितरों और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
मलमास में क्यों खास होता है पितरों
मलमास में पितरों का स्मरण, दान और सेवा विशेष शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए सत्कर्मों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुखशांति बनी रहती है।



