Saturday, August 30, 2025
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धर्मशाला में बड़े भूकंप की आहट, भू-वैज्ञानिक बोले- हो सकती है बड़ी तबाही, बताई असल वजह

धर्मशाला में बड़े भूकंप की आहट, भू-वैज्ञानिक बोले- हो सकती है बड़ी तबाही, बताई असल वजह
धर्मशाला में बड़े भूकंप की आहट, भू-वैज्ञानिक बोले- हो सकती है बड़ी तबाही, बताई असल वजह

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में सोमवार रात को भूकंप आया. सोमवार रात जो भूकंप आया उसका एपिक सेंटर मैक्लोडगंज और खनियारा के बीच स्थित था. केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के ज्योलॉजी विभाग के हैड आफ द डिपार्टमेंट डॉक्टर अंबरीश कुमार महाजन ने कहा कि भूकंप ने अलार्म दिया है कि सतर्क हो जाओ. ये आगामी समय में भूकंप आने की चेतावनी है.

डॉक्टर अंबरीश कुमार महाजन ने कहा कि यहां एक बड़ा भूकंप आ सकता है. अभी तो 4 मैगनीच्यूड का भूकंप आया. यही मैगनीच्यूड एक या दो फीसदी अधिक होता तो धर्मशाला में नुकसान को कोई नहीं रोक सकता था. उन्होंने कहा कि कांगड़ा में भूकंप आना नई बात नहीं है. वर्ष 1968, 1970 और 1986 तक धर्मशाला में 5 मैगनीच्यूड के भूकंप आए, लेकिन 1986 के बाद धर्मशाला में कोई भूकंप नहीं आया.

धर्मशाला और जोशीमठ में दो भिन्नताएं

इसका मतलब है कि यहां पर बहुत सा जमाव हो चुका है. वहीं डॉक्टर महाजन ने कहा कि मैक्लोडगंज एरिया में कैरिंग कैपासिटी से ज्यादा बहुमंजिला भवन निर्माण हो रहे हैं. इस एरिया में भूकंप आने के कई कारण हैं और अगर आगे यहां भूकंप आता है, तो नुकसान को कोई नहीं रोक सकता. बकौल प्रो. महाजन जोशीमठ और धर्मशाला में दो विभन्नताएं हैं.

डॉक्टर महाजन ने कहा कि जोशीमठ में जो दरारें आई थी. उनमें पानी बहुत जमा हो चुका था क्योंकि सीवरेज सिस्टम नहीं था. मैक्लोडगंज से धर्मशाला तक ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज सिस्टम नहीं होगा, दलाईलामा निवास स्थल एरिया में सीवरेज नहीं होगा तो हो सकता है कि आने वाले समय में गमरू भी नीचे आ जाए. फिर धर्मशाला की बहुत बड़ी तबाही हो सकती है, जिसके चलते मकान टूटेंगे.

धराली में नदी किनारे हुए थे निर्माण

डॉक्टर महाजन ने कहा कि उत्तराखंड के धराली में क्या हुआ. वहां लोगों ने संकरी नदी को अपनी तरफ से मोड़ लिया. नदी के किनारों पर निर्माण कर दिए गए. 1978 में वहां आपदा आई थी. कुछ समय तक आपदा नहीं आई तो लोग निश्चिंत हो गए कि अब आपदा नहीं आएगी. वर्ष 2023 में कांगड़ा, चंबा और मंडी में बरसात में बहुत नुकसान हुआ था. उसका कुछ कारण सीवरेज सिस्टम भी था जोकि वहां नहीं था.

इस बार बादल फटने की घटनाएं ज्यादा सामने आई. धर्मशाला की मनूणी खडड बादल फटने की दृष्टि से उपयुक्त मानी जाती है. ऐसे में बादल फटने पर नीचे का एरिया डैमेज होगा ही होगा. पुरानी यादों को ताजा करते हुए डॉक्टर महाजन ने कहा कि बरसात तो 60 और 70 के दशक में होती थी. दो-दो महीने बारिश थमती ही नहीं थी. उस दौर के मुकाबले बरसात बहुत कम हो रही है.

वर्तमान में कई शहरों में पानी एकत्रित हो रहा

वर्तमान में कई शहरों में पानी एकत्रित हो रहा है क्योंकि ड्रेनेज सिस्टम नहीं है. ऐसे में पानी कहां जाएगा. जमीन धंसना आम बात नहीं है. ड्रेनेज सिस्टम न होने की वजह से जमीन धंसती है. डॉक्टर महाजन ने बताया कि पूर्व में जिला कांगड़ा में डीसी रही मनीषा श्रीधर ने आदेश जारी किए थे कि यहां पर जो भी निर्माण होगा, उस पर मोहर प्रो. अंबरीश महाजन लगाएंगे. इसके बिना टीसीपी उसे स्वीकृति नहीं दे सकता.

डॉक्टर महाजन ने बताया कि इसके चलते मैंने वर्ष 1998 तक यहां बहुमंजिला निर्माण नहीं होने दिया. केवल उन्हें ही अनुमति दी गई, जिन्होंने निर्माण में आवश्यक चीजों का ध्यान रखा. वर्तमान में निर्माण बिना रोकटोक धड़ाधड़ हो रहे हैं.

धर्मशाला से राहुल चावला की रिपोर्ट

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me.sumitji@gmail.com

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