
Nepal Gen Z Protest: नेपाल में बीते साल सितंबर 2025 में हुए जेन जी प्रदर्शन को लेकर सरकारी समर्थित आयोग की ओर से जांच की जा रही है. आयोग ने अब इस जांच में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश की है.
पूर्व पीएम के खिलाफ मकुदमा?
8-9 सितंबर 2025 में हुए इस हिंसक विरोध प्रदर्शन में कम से कम 77 लोग मारे गए थे. सोशल मीडिया पर लगे बैन को लेकर शुरु हुए इस विरोध ने देशभर में फैले भ्रष्टाचार की समस्या को लेकर फैले गुस्से को और हवा दी. ‘AFP’के पास आई रिपोर्ट की एक कॉपी में कहा गया,’ नेपाल सरकार को तुरंत कार्यपालिका प्रमुख, पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ जांच, पूछताछ और मुकदमा चलाने की सिफारिश करने का फैसला लिया गया है.’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग की भी जांच कर उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए.
विरोध प्रदर्शन में लापरवाही
रिपोर्ट में कहा गया कि रमेश लेखक और ओली ने इस विरोध प्रदर्शन में जानमाल को होने वाले नुकसान को रोकने के लिएस कोई कोशिश नहीं की, जबकि उनपर सुरक्षा एजेंसियों और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी. रिपोर्ट में कहा गया कि गोली चलाने का आदेश साबित नहीं हुआ है, लेकिन यह भी कहा गया कि गोलीबारी को रोकने या कंट्रोल करने के लिए भी कोई कोशिश नहीं की गई. इसे लापरवाही के चलते नाबालिगों की भी जान चली गई.
जांच को लेकर रिपोर्ट
बता दें कि नेपाल में विरोध प्रदर्शन के चलते संसद और सरकारी दफ्तरों में आग लगा दी गई, जिसके चलते पूरे देश में अशांति फैल गई और ओली की सरकार भी गिर गई. इसके कुछ ही दिनों बाद नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया. उनका सबसे पहले काम हिंसा की जांच के लिए एक आयोग का गठन करना था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसको लेकर पीड़ित रिपोर्ट की मांग कर रहे हैं. आयोग के सदस्य बिग्यान राज शर्मा ने बताया कि टीम ने 200 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है और 900 पन्नों की रिपोर्ट जमा की है, जिसमें 8,000 से ज्यादा एडिशनल पन्ने शामिल हैं.






