महाराष्ट्र के परेशान सिविल कॉन्ट्रैक्टरों यानी ठेकेदारों के एक ग्रुप ने अमरावती में लोक निर्माण विभाग के दफ्तर के बाहर सरकार का प्रतीकात्मक ‘तेरहवीं संस्कार’ किया. इसके जरिए उन्होंने सरकारी भुगतान अटके होने के कारण अपनी परेशानी जाहिर की. महाराष्ट्र स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि पिछले डेढ़ साल में सरकारी भुगतान अटके होने की वजह से नौ ठेकेदार अपनी जान गंवा चुके हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के अमरावती जिले में इस साल 8 अक्टूबर को सुनील वाघाड्रे , नवी मुंबई में 25 अगस्त को गजानन देवकट्टे , नागपुर में 1 सितंबर 2025 को पीवी वर्मा और सांगली में 23 जुलाई 2025 को हर्षल पाटिल ने सुसाइड कर लिया था. इनके परिवारों का कहना है कि इन सभी मामलों में एक बात समान थी. महाराष्ट्र सरकार के लिए किए गए काम का भुगतान नहीं मिलने की वजह से वे भारी आर्थिक दबाव में थे. वाघाड्रे के 2.5 करोड़ रुपए, वर्मा के 40 करोड़ रुपए, पाटिल के 60 लाख रुपए और देवकट्टे के 2.5 करोड़ रुपए के बिल बकाया थे. अब इन चारों परिवारों के सामने एक ही सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा?
ठेकेदारों से 10 फीसदी लिया जाता है ‘कमीशन’
MSCA के मुताबिक, सरकार पर ठेकेदारों का करीब 90 हजार करोड़ रुपये बकाया है. इसमें ज्यादातर भुगतान उन प्रोजेक्ट से जुड़े हैं, जिन्हें 202223 और 202324 में मंजूरी दी गई थी. वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि वह इस समस्या को सुलझाने के लिए काम कर रही है. सरकार के मुताबिक, कुल बकाया रकम 17 हजार करोड़ रुपए है, जिसमें से 6200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.
स्टेट इंजीनियर्स एसोसिएशन के अमरावती जिला अध्यक्ष उज्ज्वल पांडे के मुताबिक, नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले महाराष्ट्र सरकार ने उपलब्ध फंड से चार गुना ज्यादा रकम के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि हर ठेकेदार को काम का वर्क ऑर्डर तभी मिलता है, जब वह उसकी कुल रकम का करीब 10 फीसदी ‘कमीशन’ देता है.
सरकार कर रही है गुजरातआंध्र के ठेकेदारों का भुगतान
ठेकेदारों ने सरकार की ओर से चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई प्रमुख ‘लाडकी बहिन’ योजना पर किए जा रहे खर्च पर भी सवाल उठाए हैं, जबकि उनके अपने बकाया भुगतान को नजरअंदाज किया जा रहा है. NCPSP के विधायक रोहित पवार जैसे विपक्षी नेताओं ने भी दावा किया है कि सरकार गुजरात और आंध्र प्रदेश के ठेकेदारों के बिल तो चुका रही है, लेकिन स्थानीय मराठी ठेकेदारों का बकाया अभी भी नहीं दिया गया है.
महाराष्ट्र के PWD मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने कहा, ‘सरकार मुख्य ठेकेदारों को भुगतान करती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सबकॉन्ट्रैक्टर्स हमारे पास रजिस्टर नहीं होते हैं. PWD के पास 17000 करोड़ रुपए के बिल लंबित थे. इनमें से हमने अब तक 6200 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि 1 करोड़ रुपए से कम के लंबित बिल वाले सभी छोटे ठेकेदारों को उनका बकाया मिल जाए.’
19 अक्टूबर को सरकार की शव यात्रा निकाली
हालांकि, ठेकेदारों का कहना है कि अभी और बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है. 19 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अमरावती में राज्य सरकार की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली और महाराष्ट्र को आर्थिक रूप से “मृत” राज्य करार दिया. सोमवार को इसकी “तेरहवीं” की रस्म भी निभाई गई.



