
जब तय हो गया कि कौरव और पांडवों के बीच युद्ध होगा, तो दोनों ही पक्ष के लोग अपनी-अपनी सेना की ताकत बढ़ाने में जुट गए. सभी ने अपने-अपने मित्र राजाओं को युद्ध में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रण भेजा. वहीं भगवान कृष्ण के पास कौरव और पांडव दोनों ही मदद मांगने के लिए पहुंचे. जब अर्जुन और दुर्योधन अपनी ओर से श्रीकृष्ण को युद्ध में लड़ने का प्रस्ताव देने के लिए द्वारिका नगरी पहुंचे तो भगवान विश्राम कर रहे थे.
वे पहले अपना प्रस्ताव दे सकें इसलिए दोनों भगवान श्रीकृष्ण के कक्ष में पहुंच गए. वहां जाकर दुर्योधन के मन में अहंकार जागा कि मैं इस ग्वाले के पैरों के पास क्यों बैठूं? यह सोचकर वह श्रीकृष्ण के सिरहाने बैठकर उनके जागने का इंतजार करने लगा. वहीं अर्जुन भगवान कृष्ण के चरणों के पास बैठे.
दुर्योधन ने मांगी सेना
भगवान कृष्ण जब जागे तो दुर्योधन और अर्जुन ने उन्हें युद्ध में लड़ने का प्रस्ताव दिया. इस पर भगवान कृष्ण बोले कि मैं युद्ध में शस्त्र नहीं उठाऊंगा. तब दुर्योधन ने उनसे उनकी चतुरंगिनी सेना मांग ली, जिसे नारायणी सेना भी कहते हैं. वहीं अर्जुन ने भगवान कृष्ण से उनका साथ मांगा. भगवान कृष्ण तो सभी के दिलों का हाल जानते थे, उन्होंने दुर्योधन से कहा कि ठीक है मेरी 1 अक्षौहिणी सेना कौरवों की ओर से युद्ध करेगी और मैं स्वयं पांडवों की ओर से रहूंगा लेकिन शस्त्र नहीं उठाऊंगा.
अजेय थी नारायणी सेना
भगवान श्रीकृष्ण की नारायणी सेना अजेय थी, उसने कभी कोई युद्ध नहीं हारा था. इसलिए दुर्योधन ने वह सेना मांगी, फिर भी युद्ध हारा और मृत्यु को प्राप्त हुआ. जानिए नारायणी सेना से जुड़े रोचक पहलू.
1. भगवान कृष्ण ने अपनी 1 अक्षौहिणी सेना दुर्योधन को दी थी, जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ी. महाभारत में किए गए वर्णन के अनुसार, इस एक अक्षौहिणी सेना में 21,870 गज, 21,970 रथ, 65,610 अश्व और 10,9350 पैदल सैनिक थे. यानी कि इस सेना में कुल 21,8700 योद्धा थे.
2. भगवान कृष्ण की नारायणी सेना साधारण सेना नहीं थी. इस सेना के हर सैनिक को स्वयं श्रीकृष्ण ने युद्ध कला, कूटनीति और मायावी अस्त्रों का प्रयोग सिखाया था.
3. इतना ही नही इस सेना में भगवान कृष्ण के 18 हजार से ज्यादा सगे और चचेरे भाई शामिल थे, जो बेहद पराक्रमी थे.
4. यह 1 अक्षौहिणी सेना मिलने के बाद महाभारत युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी और पांडवों के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी.
5. वैसे तो भगवान कृष्ण की नारायणी सेना के मुख्य सेनापति बलराम थे लेकिन उन्होंने खुद को इस युद्ध से अलग रखा था इसलिए कृतवर्मन के अंतर्गत आने वाली 1 अक्षौहिणी सेना ही महाभारत युद्ध में उतरा थी.
6. भगवान कृष्ण की सेना में 10 लाख से ज्यादा पराक्रमी योद्धा थे. हर योद्धा इतना पराक्रमी था कि अकेले हजारों लोगों से लड़ सकता था.
7. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। महाभारत युद्ध जब खत्म हुआ तो कौरवों की ओर से लड़े नारायणी सेना की पूरी 1 अक्षौहिणी सेना जीवित थी. चूंकि दुर्योधन मारा गया था इसलिए युद्ध समाप्त हो गया.




