HDFC Bank CEO: HDFC बैंक, जो देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है, इन दिनों अपने नए मुखिया की तलाश में है. मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन 26 अक्टूबर को अपने पद से हट रहे हैं. बोर्ड के अनुरोध के बाद भी उन्होंने आगे काम करने से मना कर दिया है. इसके बाद से ही नए बॉस को लेकर हलचल तेज हो गई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बैंक ने 14 सितंबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को दो नाम भेजे हैं. इनमें पहला नाम ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के प्रमुख अनूप बागची का है. वहीं दूसरा नाम बैंक के ही डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का है. इस पद के लिए बैंक को शुरुआत में 150 से ज्यादा आवेदन मिले थे. इनमें से करीब 50 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया. अंत में 10 से भी कम लोगों का इंटरव्यू हुआ, जिसके बाद ये दो नाम फाइनल किए गए.

अनूप बागची पर टिकी RBI की नजरें
अनूप बागची इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं. वो 55 साल के हैं. पिछले तीन साल से वो इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर रहे हैं. इससे पहले 2017 से वो ICICI बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे. वहां उन्होंने होलसेल बैंकिंग, ट्रांजैक्शन बैंकिंग मार्केट ग्रुप जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं. RBI अब ये देख रहा है कि क्या तीन साल तक मुख्य बैंकिंग से दूर रहने के बाद बागची नए बदलावों के साथ तेजी से तालमेल बिठा पाएंगे.
इस फैसले तक पहुंचने के लिए RBI ने बीमा रेगुलेटर से फीडबैक मांगा है. साथ ही ICICI बैंक के चीफ संदीप बख्शी से भी उनकी राय ली जा रही है. किसी भी व्यक्ति को इतने बड़े बैंक की कमान सौंपने से पहले रेगुलेटर हर पहलू की बारीकी से जांच करना चाहता है.
अमिताभ चौधरी जैसी हो सकती है वापसी
बीमा सेक्टर से निकलकर सीधे किसी प्राइवेट बैंक का प्रमुख बनना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले RBI ने अमिताभ चौधरी के मामले में ऐसा ही फैसला लिया था. अमिताभ चौधरी लगभग नौ साल तक HDFC लाइफ इंश्योरेंस के प्रमुख थे. इसके बाद 2019 में उन्हें एक्सिस बैंक का MD नियुक्त किया गया था. इसी तर्ज पर अब अनूप बागची की वापसी की भी उम्मीदें लगाई जा रही हैं.
कैजाद भरूचा के सामने क्या है चुनौती
बैंक की तरफ से भेजा गया दूसरा नाम कैजाद भरूचा का है. वो 61 साल के हैं. वो जून 2014 से बैंक में होलटाइम डायरेक्टर के पद पर हैं. RBI के नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति लगातार 15 साल तक ही इस पद पर रह सकता है. ऐसे में अगर वो CEO बनते हैं, तो जून 2029 में उनका 15 साल का समय पूरा हो जाएगा. इसका मतलब है कि वो अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे.
क्या बैंक को मिलेगी नियमों में छूट
HDFC बैंक ने RBI से अपील की है कि भरूचा को नियमों में करीब छह महीने की छूट दी जाए. इससे वो अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर सकेंगे. हालांकि, जानकारों का मानना है कि RBI ऐसी छूट सिर्फ बहुत खास मामलों में ही देता है. रेगुलेटर हमेशा यही चाहता है कि देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक को एक ऐसा लीडर मिले जो लंबे समय तक जिम्मेदारी संभाल सके. बारबार नेतृत्व बदलना बैंक के लिए अच्छा नहीं माना जाता.
अब सबकी निगाहें RBI के फैसले पर टिकी हैं. अमूमन RBI ऐसे मामलों में फैसला लेने के लिए 35 दिन से ज्यादा का समय लेता है. 26 अक्टूबर की डेडलाइन बेहद करीब है. अगर इस तय समय सीमा के भीतर रेगुलेटर का फैसला नहीं आता है, तो बैंक के बोर्ड को कुछ दूसरे आपातकालीन विकल्प भी तैयार रखने होंगे.



