
Iran India Hormuz News: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागजी ने हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से टेलीफोन पर बातचीत की थी. इसके बाद ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह नई दिल्ली पहुंचे और जयशंकर से मुलाकात की. जयंशकर के साथ हुई इस बात-मुलाकात के बाद ईरान की ओर से संकेत मिले हैं कि होर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाज़ों को निशाना नहीं बनाया जाएगा.
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग आज नौंवे दिन भी जारी है. इस युद्ध के चलते खाड़ी में इस बढ़ते तनाव के बीच भारत के दो मालवाहक जहाज़ होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते देखे गए हैं. समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ नाम के ये दोनों जहाज़ हाल ही में इस अहम समुद्री मार्ग से होकर गुजरे.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई वैश्विक शिपिंग कंपनियां इस मार्ग का इस्तेमाल करने को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं.
बेहद अहम समुद्री मार्ग है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्यदुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है. यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक भारतीय जहाज पुष्पक और परिमल इस जलडमरूमध्य से तेज़ी से गुजरते हुए देखे गए. क्षेत्र में बढ़े सुरक्षा जोखिमों के कारण इन जहाज़ों की आवाजाही पर खास ध्यान दिया जा रहा है.
भारतीय जहाजों को निशाना न बनाने के संकेत
कई रिपोर्टों में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि ईरान की ओर से संकेत मिले हैं कि मौजूदा तनाव के दौरान भारतीय ध्वज वाले जहाज़ों को निशाना नहीं बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि यह भारत और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्कों का परिणाम हो सकता है.
इन घटनाक्रमों के बीच भारत और ईरान के बीच हाल ही में उच्च स्तर पर बातचीत भी हुई है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागजी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से टेलीफोन पर बातचीत की थी.
इसके बाद ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह नई दिल्ली पहुंचे और जयशंकर से मुलाकात की. रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात पर भी चर्चा हुई.
अमेरिका को IRGC की चेतावनी
इस बीच ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प (आईआरजीसी) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. दरअसल अमेरिका ने कहा था कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है. इसके जवाब में आईआरजीसी ने कहा कि वह ‘अमेरिका का इंतजार कर रहा है.’
आईआरजीसी ने 1987 की उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें ब्रिजेटन नाम का एक सुपरटैंकर हमले का शिकार हुआ था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संगठन का कहना है कि अमेरिका को ऐसे फैसले लेने से पहले इतिहास से सबक लेना चाहिए.
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि हाल ही में श्रीलंका के पास एक ईरानी जहाज़ से जुड़ी घटना भी सामने आई थी. बताया गया कि आइरिस दीना नाम का जहाज़ भारतीय नौसेना के मिलन अभ्यास से लौटते समय डूब गया था. इसके बाद भारत ने मानवीय आधार पर उस जहाज़ के ईरानी नाविकों को कोच्चि बंदरगाह पर शरण दी.
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा हर दिन इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी पड़ सकता है.




