
नई दिल्ली: ईरान में जारी भयंकर युद्ध के बीच अमेरिका से कच्चे तेल संकट को दूर करने को लेकर एक और बड़ा संकेत दिया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इशारा किया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से जो कच्चे तेल की किल्लत पैदा हुई है, उससे निपटने के लिए रूस समेत अन्य विकल्पों से इसे बाजार में उपलब्ध करवाने के उपाय किए जा रहे हैं। इससे भारत और अमेरिकी संबंधों में थोड़ी और मजबूती आ सकती है।
पहले ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संकेतों में यह बयान दिया गया कि यह अभी भारतीय जहाजों के लिए बंद नहीं है। दूसरी तरफ अमेरिका ने भारत को रूस से बिना रुकावट तेल खरीदने का रास्ता दिखाकर हमारा काम आसान किया। अभी फिर से अमेरिका ने जो संकेत दिया है, उससे भारत पर कच्चे तेल को लेकर बढ़ रहा दबाव और कम हो सकता है।
तेल की उपलब्धता में स्थिरता पर अमेरिकी पहल
रविवार को अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक ट्वीट करके बिना रूस या अन्य तेल सप्लायर देश का नाम लिए लिखा, ‘…’ट्रंप की लीडरशिप में हम दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक, उपभोक्ता और रिफाइनरों के साथ काम कर रहे हैं, ताकि दुनिया के तेल बाजार में स्थिरता बनी रहे, जब तक कि हम अपनी सेफ्टी और सिक्योरिटी खतरों को खत्म करते हैं।….’
पहले रूस से 30 दिनों तक तेल खरीदने की छूट दी थी
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी का ताजा बयान भारत को रूस से 30 दिनों तक कच्चा तेल खरीदने की छूट वाली टिप्पणी से बिल्कुल अलग तरह का है, जिसको लेकर भारत में बहुत बड़ी सियासी फसाद शुरू है और विपक्ष ने संसद में भी इसपर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
अमेरिका का दावा-ट्रंप नीति से दुनिया को फायदा
इतना ही नहीं, बेसेंट ने फॉक्स न्यूज से यहां तक कहा कि कच्चे तेल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति से दुनिया को फायदा मिलेगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत में हमारे सहयोगी रूस से तेल खरीदना शुरू कर दें, जो पहले से ही समुद्र में है’ और इसपर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग सहमत है।
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ताजा अपडेट
मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बनाए गए हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं।
ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के पहले दिन मारे गए थे अयातुल्ला अली खामेनेई।
अयातुल्ला अली खामेनेई के 6 बच्चों में से एक हैं 8 सितंबर, 1969 मोजतबा खामेनेई।
अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान में लगभग 1,332 लोगों की मौत, लेबनान में करीब 339 की जान जा चुकी है।
ईरानी हमले में बहरीन में एक, यूएई में तीन, ओमान में एक, सऊदी अरब में दो, इजरायल में 13, कुवैत में 6 लोगों की गई जान। अबतक सात अमेरिकी सैन्य कर्मियों की जा चुकी है जान।





