इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार देर रात कहा कि ईरान के पास अब यूरेनियम संवर्धन करने या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता नहीं है।
ईरान ने अपने एक प्रमुख गैस फील्ड पर इजराइल के हमले के जवाब में बृहस्पतिवार को खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ा दिए और इस तरह युद्ध की स्थिति गहराती जा रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है।
नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर इजराइल ईरान के विशाल प्राकृतिक गैस फील्ड पर किसी भी और हमले को रोक देगा।
ट्रंप ने आश्वासन दिया कि इजराइल ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ पर और हमले नहीं करेगा लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि अगर ईरान ने कतर पर फिर हमला किया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा और उस ‘‘पूरे क्षेत्र को तबाह कर देगा।
इससे पहले बृहस्पतिवार को पेंटागन में हुई एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी और इजराइली सैन्य नेतृत्व ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की।
एक ओर जहाँ इजराइल ने ईरान की परमाणु और मिसाइल संवर्धन क्षमता के खत्म होने का दावा किया है, वहीं अमेरिकी सैन्य जनरलों ने आगाह किया है कि ईरान के पास अभी भी जवाबी हमला करने की “कुछ क्षमताएं” शेष हैं।
ईरान की युद्धक क्षमता पर पेंटागन का आकलन
अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन (Dan Caine) ने स्पष्ट किया कि हालांकि ईरान को भारी नुकसान पहुँचाया गया है, लेकिन उसे पूरी तरह से अक्षम मानना जल्दबाजी होगी। जनरल केन के अनुसार, “ईरान इस लड़ाई में हथियारों के एक बहुत बड़े भंडार के साथ उतरा था।” यही कारण है कि अमेरिका अभी भी ईरानी मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों पर आक्रामक हमले जारी रखे हुए है। ईरान अभी भी मध्य पूर्व में अमेरिकी संपत्तियों और सहयोगियों, विशेष रूप से तेल प्रतिष्ठानों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
इजराइली सेना (IDF) का कैस्पियन सागर में बड़ा हमला
इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार कैस्पियन सागर (Caspian Sea) में ईरानी नौसेना के बुनियादी ढांचे पर हमला किया है। खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए इन हमलों में ईरानी नौसेना के बंदरगाहों, मिसाइल जहाजों, और सुरक्षा नौकाओं (Guard boats) को निशाना बनाया गया। यह हमला दर्शाता है कि इजराइल की पहुँच अब ईरान के उन सुदूर क्षेत्रों तक भी हो गई है जिन्हें पहले सुरक्षित माना जाता था। IDF के अनुसार, दर्जनों सैन्य जहाज और रखरखाव केंद्र (Maintenance facilities) इस कार्रवाई में नष्ट कर दिए गए हैं।
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