मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान से एक बेहद बड़ी और अहम खबर सामने आई है। ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का ऐलान कर दिया है। अब ईरान के नए सुप्रीम लीडर होंगे आया अली खामिनई के दूसरे बेटे मुस्तबा खामेनेई। मुस्तबा को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है और इस फैसले का ऐलान ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने एक विशेष बैठक में किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आया खामेनेई की मौत के बाद से पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी थी कि अब ईरान की कमान किसके हाथों में जाएगी। अब ईरान की तरफ से इस सस्पेंस पर विराम लगा दिया गया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ईरान ने मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है। नए सुप्रीम लीडर की घोषणा आया अली खामेनेई के आधिकारिक मीडिया के हैंडल से की गई। जहां पर एक फोटो साझा की गई। इस तस्वीर में आईने के सामने खड़े आया अली खामेनेई का प्रतिबिंब आईने में मोजतबा खामेनेई दिखते हैं जो कि ईरान का झंडा हाथों में लिए हुए हैं।
मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से ईरान की राजनीति का बेहद प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। लेकिन मुस्तबा को हमेशा से पर्दे के पीछे से काम करने वाला एक चेहरा माना गया। उनका जन्म साल 1969 में ईरान के पवित्र शिया शहर मशहद में हुआ था। वे ऐसे समय में बड़े हुए जब उनके पिता शाह के खिलाफ चल रहे आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे और युवावस्था में मुस्तफा ने ईरान और इराक के युद्ध में भी हिस्सा लिया था। जिसने उन्हें कट्टर राष्ट्रवादी विचारधारा के और भी करीब ला दिया था। बात करें धार्मिक शिक्षा की तो मोजतबा खामनेई ने ईरान के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र कौम के इस्लामिक सेमिनरियो में पढ़ाई की है। जहां उन्हें शिया इस्लामी परंपरा में होजतुल इस्लाम का धार्मिक दर्जा हासिल है। हालांकि उन्होंने कभी भी ईरान की सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला है। लेकिन इसके बावजूद सत्ता के गलियारों में उनका प्रभाव बेहद अहम माना जाता है।
मोजतबा खामने अपने पिता के बेहद करीबी सलाहकारों में से एक थे। कई बड़े फैसलों में उनकी भूमिका मानी जाती आई है। उन्हें अक्सर उनके पिता अली खामने का गेटकीपर कहा जाता था क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों और शक्तिशाली सैन्य संगठन जैसे कि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत बताए जाते हैं। खास बात यह है कि ईरान के सुप्रीम लीडर का पद देश का सबसे बड़ा पद होता है। इस पद पर बैठा नेता देश की विदेश नीति, रक्षा नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम फैसलों का अंतिम निर्णय लेता है। पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी चिंता भी यही है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम किस दिशा में जाएगा। हालांकि मुस्तबाक खामने की ताजपसी इतनी आसान नहीं होगी। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के भीतर कुछ वर्गों में उनके नेतृत्व को लेकर विरोध देखने को मिल सकता है।
फिलहाल ईरान के असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सर्वसम्मति से उन्हें देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है और इस ऐलान के साथ साफ हो गया है कि ईरान की सत्ता में कट्टरपंथी धारा अभी भी मौजूद है। और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका और इजराइल की प्रतिक्रिया इस पर क्या होती है। इजराइल तो पहले ही घोषणा कर चुका है कि अगला सुप्रीम लीडर जो भी बनेगा वो उनका टारगेट होगा। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि मोजतबा खामनेई के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति में क्या बदलाव देखने को मिलता है। खास करके अमेरिका इजराइल के साथ चल रहे तनाव में आगे क्या होता है।
The representatives of the Assembly of Experts appointed and introduced Ayatollah Sayyid Mojtaba Hosseini Khamenei (may God protect him) as the Third Leader of the Sacred Islamic Republic of Iran under Article 108 of the Constitution.
— Khamenei Media (@Khamenei_m)




