नई दिल्ली: पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर दुनियाभर में दिखने लगा है। ईरान से सटा समुद्री गलियारा होर्मुज जहां लगभग बंद हो चुका है, वहीं इस तनाव के असर से सऊदी अरब और यमन से लगते लाल सागर में भी जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है। पहले यूरोप और एशिया के बीज जहाज स्वेज नहर के जरिये सीधे और कम समय में पहुंचते थे, अब वे इस रास्ते से भी बच रहे है और अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाते हुए लंबा रास्ता ले रहे हैं।

70% माल ढुलाई अब अफ्रीका के रास्ते
लाल सागर में ईरान समर्थक यमन के हूती विद्रोहियों के डर से 70% मालवाहक जहाज अब अफ्रीका के रास्ते जा रहे है।
‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते में जहाज तीन साल में तीन गुना तक बढ़ गए है। इसी साल 1 मार्च से 24 अप्रैल के बीच रोज 20 जहाज गुजरे है, 2023 में 6 ही गुजरते थे।
लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते पहले 18 जहाज रोज गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर 5 रह गई है। इससे स्वेज पर निर्भर देशों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
2 हफ्ते और लग रहे हैं
स्वेज नहर के जरिये माल पहले 21 दिन में पहुंच जाता था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर जाने में 50 से 55 दिन लग सकते हैं।
इजिप्ट को बड़ा नुकसान हुआ है। स्वेज से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स मिलता था, जिसमें लगातार कमी आ रही है। 2023 की तुलना में 2024 में रेवेन्यू 60% तक घटा है।

50% ज्यादा तेल खर्च
जहाजों की आवाजाही में समय के साथ तेल का खर्च भी 30% से 50% तक ज्यादा लग रहा है।
सामान की आवाजाही में निरंतरता बनाए रखने के लिए 10-20% तक ज्यादा जहाज लगाने पड़ रहे हैं।
अफ्रीकी पोर्ट्स को फायदा
मोरक्को के टैगियर मेड पोर्ट ने 2025 में 1.1 करोड़ कंटेनर संभाले हैं, जो पिछले साल से 8.4% ज्यादा है।
सऊदी का जेद्दा पोर्ट नए हब के रूप में उभरा है। जहाज जेद्दा तक सामान ला रहे हैं और वहां से यह हाइवे के जरिए शारजाह, बहरीन और कुवैत पहुंच रहा है।