ईरान ने अमेरिका की दो सबसे बड़ी ताकतों पर एक साथ चोट की है। बता दें कि दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट F35 जिसे निशाना बनाए जाने का दावा है। वहीं दूसरा अमेरिका का सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड युद्ध के बीच से पीछे हट गया है और अगर यह दोनों ही बातें सच है तो बता दें कि यह सिर्फ एक खबर नहीं है बल्कि सुपर पावर अमेरिका को सीधी-सीधी चुनौती ईरान ने दी है। बता दें कि F35 पर हमले की सच्चाई आखिरकार क्या है? एयरक्राफ्ट कैरियर आखिरकार पीछे क्यों हटाना पड़ा और क्या वाकई अमेरिका पर दबाव बढ़ रहा है? ईरान ने यह दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर F35 को टारगेट किया है और इसका वीडियो भी ईरान ने जारी किया। लेकिन वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का जो एयरक्राफ्ट कैरियर है यानी कि यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड जो इजराइल के पास तैनात था और अब यह दावे सामने आ रहे हैं कि अचानक इसे पीछे हटा दिया गया है और जैसे ही यह पीछे हटा इजराइल के हाईफा के पास में जो ऑयल रिफाइनरी थी उस पर हमला हो गया।
यह जो टाइमिंग है, यह टाइमिंग बहुत कुछ कहती है और इस टाइमिंग ने ही इस पूरे घटनाक्रम को और भी ज्यादा संदिग्ध बना दिया है। अब आप समझिए इस पूरे घटनाक्रम को। यह कैरियर इतना अहम क्यों है उसे भी। बता दें कि यह कैरियर जो है यह दुनिया के सबसे बड़े और एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर में से एक है। करीब बता दें कि इसकी इसका जो वजन है वो 1 लाख टन है और 90 तक फाइटर जेट ये अपने साथ में ले जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह न्यूक्लियर पावर से चलता है। और इस जैसे जहाज का युद्ध के बीच से हटना सिर्फ एक टेक्निकल खबर नहीं बल्कि यहां पर एक स्ट्रेटेजिक संकेत देने की भी कोशिश की गई है। जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं और जो रिपोर्ट्स यहां पर दावा करती है, जो रिपोर्ट्स यहां पर कहती है उसके मुताबिक जहाज में आग लगने और टेक्निकल समस्या की वजह से इसे रिपेयर के लिए हटाया गया। अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर। F35 पर ईरान का हमला और ईरान का दावा।
ईरान ने यह दावा किया है कि हमने इसे मिसाइल से टारगेट किया और इसका वीडियो भी ईरान ने जारी किया। अमेरिका ने क्या कुछ रिएक्ट करा? तो बता दें कि अमेरिका का मानना है कि F35 को इमरजेंसी लैंडिंग जरूर करनी पड़ी। लेकिन अमेरिका ने यह नहीं माना कि उसे गिराया गया। यानी डैमेज बिल्कुल कंफर्म है। लेकिन F35 का शूटडाउन कंफर्म नहीं किया गया। वहीं F35 बता दें कि कोई आर्म फाइटर जेट नहीं है। यह फिफ्थ जनरेशन का स्टेल्थ फाइटर है। रडार इसे पकड़ नहीं पाती है और यह दुश्मन को बिना दिखे हमला करने में सक्षम है। अगर यह जेट सच में टारगेट हुआ है तो यह अमेरिका की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी पर सीधा-सीधा ईरान का वार है।
अब सबसे दिलचस्प सवाल अगर F35 इनविज़िबल है। यह दुश्मन के रडार पे नहीं पकड़ा जाता तो फिर ईरान ने इसे कैसे ट्रैक किया और फिर कैसे निशाना बनाया? एक थ्योरी यह कहती है कि ईरान ने हीट ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल जरूर किया होगा इसे ट्रैक करने के लिए। अब ये सिस्टम क्या है? इसका मतलब यह है कि रडार से आप जरूर बच सकते हो लेकिन आपकी गर्मी से नहीं। और अगर सच में अगर इसे निशाना बनाया है तो आने वाले समय में स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की पूरी परिभाषा जो है वो ही बदल सकती है। अब आप इस पूरे घटनाक्रम से बड़े खेल को समझिए। ईरान ये चाहता है कि युद्ध लंबा खींचे और अमेरिका को बहुत बुरी तरह से थकाया जाए। वहीं अमेरिका क्या कर रहा है? अमेरिका अपने कैरियर्स को जो है वो यहां पर रिप्लेस कर रहा है। नई फोर्सेस को मिडिल ईस्ट में भेज रहा है। मतलब अमेरिका जो है वो पीछे नहीं हट रहा बल्कि वो यहां पर अपनी युद्ध की जो रणनीति है उसे ही बार-बार बदल रहा है। अब सबसे अहम सवाल तो क्या अमेरिका की ताकत सच में कमजोर पड़ रही है? क्या F35 अब सुरक्षित नहीं रहा?
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