
Gulf Conflict : ईरान में चल रहे संघर्ष से खाड़ी देशों से भारत को मिलने वाले बड़े रेमिटेंस (पैसे के प्रवाह) पर खतरा मंडरा रहा है. भारत को खाड़ी देशों से हर साल मिलने वाली अरबों डॉलर की रेमिटेंस पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान के साथ जारी युद्ध से क्षेत्र में व्यापार और यात्रा गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं. इसका असर केरल और महाराष्ट्र जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है. ये राज्य इन पैसों पर बहुत अधिक निर्भर हैं. हालांकि, अभी कारोबारी गतिविधियां स्थिर हैं. लेकिन, अगर ये संघर्ष लंबा खिंचता है, तो मजदूरों की नौकरियां जा सकती हैं और पेशेवरों की कमाई कम हो सकती है.
ईरान की ओर से UAE पर हमले की नई धमकियों के बीच कुछ प्रोफेशनल्स अपने-अपने देशों लौट रहे हैं और कई कंपनियां रिमोट वर्क की ओर शिफ्ट हो रही हैं. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर ये संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत को आने वाली रेमिटेंस पर असर पड़ सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत को मिलने वाली कुल रेमिटेंस का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा खाड़ी देशों से आया. इसकी कुल रकम करीब 3.74 लाख करोड़ रुपये (40 अरब डॉलर) रही है. इसमें UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान जैसे देश शामिल हैं.
UAE में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है. वित्त वर्ष 2024 में भारत को विदेश से आने वाले पैसों में UAE दूसरे नंबर का सबसे बड़ा सोर्स रहा और इसका हिस्सा करीब 19.2% था. वहीं, अगर सभी खाड़ी देशों को मिलाकर देखें तो भारत में आने वाले कुल पैसे में उनका हिस्सा लगभग 38% है. विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में आने वाली रेमिटेंस वित्त वर्ष 2025 में 15% बढ़कर 138 अरब डॉलर हो गई है. ये वित्त वर्ष 2024 में 119 अरब डॉलर थी.
केरल पर अधिक असर
खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस पर सबसे ज्यादा निर्भर राज्यों में केरल शामिल है. राज्य के लगभग 80% प्रवासी भारतीय (NRI) खाड़ी देशों में रहते हैं. भारत में आने वाली कुल रेमिटेंस में केरल का हिस्सा करीब 19.7% है यानी लगभग 1.94 लाख करोड़ रुपये. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ये देश के कुल रेमिटेंस का करीब पांचवां हिस्सा है. केरल के जिन क्षेत्रों में खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है. वहां, इस दबाव का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जा सकता है.
कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ी
खाड़ी क्षेत्र में पर्यटन पहले से ही धीमा पड़ रहा है. ऐसे में टैक्सी ड्राइवर और फूड डिलीवरी का काम करने वाले कई लोग (जिनमें बड़ी संख्या केरल से है) अपनी कमाई में तेज गिरावट की शिकायत कर रहे हैं. खाड़ी देशों में जमीनी स्तर पर भी चिंता साफ दिखाई दे रही है. दुबई में काम करने वाले एक लॉजिस्टिक्स प्रोफेशनल ने बताया कि बंदरगाहों पर माल की आवाजाही अटक रही है और कारोबार की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है.




