
Indian States Debt: बढ़ता कर्ज भारतीय राज्यों के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है. 2025-26 के लेटेस्ट डेटा से ऐसा पता चलता है कि यह स्थिति काफी ज्यादा गंभीर है. भारतीय रिजर्व बैंक और राज्य बजट के दस्तावेजों के मुताबिक कई बड़े और छोटे राज्यों पर काफी ज्यादा कर्ज है. यह अब डेवलपमेंट खर्च, वित्तीय स्थिरता, और लंबे समय की आर्थिक ग्रोथ पर असर डाल रहा है. 2026 की शुरुआत में राज्यों द्वारा भारी कर्ज लेने का अनुमान लगाया जा रहा है. आइए जानते हैं की भारत के राज्यों पर कितना ज्यादा कर्ज है.
तमिलनाडु सबसे ऊपर
कुल बकाया कर्ज के मामले में तमिलनाडु फिलहाल सबसे ज्यादा कर्ज वाला भारतीय राज्य है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 2024 में राज्य का कर्ज ₹8.34 लाख करोड़ से ज्यादा का हो गया है और 31 मार्च 2026 तक इसके 9 लाख करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है. बड़ी कल्याणकारी योजना, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और बार-बार होने वाले रेवेन्यू दबाव की वजह से राज्य की देनदारियां लगातार बढ़ रही हैं.
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का हाल
उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है जिसका बकाया कर्ज 2025-26 के अनुमानों के मुताबिक लगभग 8.2 लाख करोड़ से 8.5 लाख करोड़ पहुंच सकता है. 2024-25 में उत्तर प्रदेश का कर्ज लगभग 7.69 लाख करोड़ था. इसकी बड़ी आबादी और बड़े सामाजिक खर्च को देखते हुए पिछले कुछ सालों में कर्ज का स्तर लगातार बढ़ा है. वहीं अगर महाराष्ट्र की बात करें तो 2024-25 में इसका कर्ज लगभग 7.22 लाख करोड़ था.
पश्चिम बंगाल और कर्नाटक टॉप 5 में शामिल
पश्चिम बंगाल लगभग ₹6.58 लाख करोड़ के कर्ज के साथ चौथे स्थान पर है. इतना ही नहीं बल्कि राज्य का कर्ज से जीएसडीपी अनुपात भी ज्यादा रहा है. वहीं कर्नाटक की बात करें तो वह 5.97 लाख करोड़ कर्ज के साथ 5वें स्थान पर है.
टॉप 10 की लिस्ट में बाकी राज्य
अगर राजस्थान की बात करें तो इस राज्य पर 5.62 लाख करोड़ का कर्ज है. आंध्र प्रदेश का कुल कर्ज भार 4.90 लाख करोड़ है. अगर गुजरात की बात करें तो इस राज्य पर कुल कर्ज 4.67 लाख करोड़ रुपए का है. इसी के साथ केरल का कुल कर्ज 4.29 लाख करोड़ रुपए हो गया है. वहीं मध्य प्रदेश का कुल कर्ज 4.18 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है.
कर्ज से जीएसडीपी अनुपात
हालांकि कुल कर्ज के आंकड़े ध्यान खींचते हैं लेकिन कर्ज से जीएसडीपी अनुपात को वित्तीय सेहत का ज्यादा सटीक संकेतक माना जाता है. पंजाब सबसे खराब स्थिति में है जहां कर्ज उसके जीएसडीपी का लगभग 44.5% हो गया है. जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश ने खतरनाक 50% का आंकड़ा पार कर लिया है. इसी के साथ पश्चिम बंगाल और केरल 35 से 38% की रेंज में हैं.
इन राज्यों ने कर्ज को बेहतर तरीके से मैनेज किया
कुल मिलाकर तनाव के बावजूद भी कुछ राज्यों ने काफी अच्छा वित्तीय प्रबंधन दिखाया है. गुजरात, महाराष्ट्र और उड़ीसा ने अपने कर्ज से जीएसडीपी अनुपात को 20% के करीब या उससे नीचे रखने में कामयाबी हासिल की है.
जनवरी 2026 के अनुमानों के मुताबिक राज्यों से ऐसी उम्मीद है कि वह वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में लगभग 5 लाख करोड़ का कर्ज लेंगे. 16वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय मजबूती पर जोर देने के साथ लक्ष्य 2031 तक केंद्र और राज्य के संयुक्त कर्ज को जीडीपी के 50% तक कम करना है.

