Sunday, March 22, 2026
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गर्भधारण नहीं हो रहा तो आप इसˈ पोस्ट को पढने से ना चूके और शेयर ज़रूर करें ताकि और लोग भी फायदा उठा सकेंˌ

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गर्भधारण न हो पाना एक समस्या बनी हुई है जिसकी वजह से शादीशुदा जिंदगी दुर्भर होने लगती है। समाज के ताने सुनने पड़ते हैं जैसी कई बातों का सामना नव विवाहित जोड़ों को करना पड़ता है।

आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी, समय का आभाव, उचित खान पान पर ध्यान न देना कई वजह एैसी है जिससे शादीशुदा जिंदगी में तनाव आने लगता है। आइए  आपको गर्भधारण न हो पाने की समस्या से अवगत करवाते हैं और इसके उपचार के तरीकों को भी इस लेख के माध्यम से बताते हैं।

समस्या

1.पुरुषों में शुक्राणुओं का प्रयाप्त मात्रा में न बन पाना, इसका मतलब यह होता है की पुरुष में आवश्यकता से कम शुक्राणु होना यानी इनफरटिलिटि, और दूसरा कारण  पुरुषों में प्रयाप्त मात्रा में शुक्राणु तो हाते हैं लेकिन स्त्री के अंडाणुओं तक प्रयाप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाते।

2. उम्र का अधिक होना भी एक प्रमुख कारण होता है स्त्रीयों का 30 वर्ष या इससे अधिक उम्र का होना जिसमें उनका गर्भधारण करने का संयोग कम अथवा न के बराबर हो जाता है।

3.स्त्रीयों की योनी का फैलाव होना यानी वीर्य का योनी से बाहर निकलना जिससे सन्तान नहीं हो पाती ।

4. शीघ्रपतन में पुरुष का वीर्य पहले की झड जाता है उस समय स्त्री के गर्भशाय की नली का छेद चिकना नहीं हुआ होता और गर्भ नहीं ठहर पाता ।

5. अत्याधिक दवाइयों का सेवन करना भी एक बड़ी बाधा है चिकित्सक की सलह पर ही दवाइयों का प्रयोग करें ।

6. तनाव यानी डिप्रेशन का होना भी एक प्रमुख समस्या है।

7. पुरुषों में लिंग के टेढ़ेपन की समस्या होना भी एक कारण है।

8. गर्भाशय नली का शुष्क होना।

उपचार

1. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। शीध्रपतन को दूर करने के लिए दूध में सोंठ उबालकर रात को सोने से पहले पीयें।

2. लिंग में टेढ़ेपन की समस्या को दूर करने के लिए तिल के तेल में लहसुन पकाकर पुरुष प्रतिदिन लिंग की मालिश करें ।

3. यदि मासिकधर्म में कोई दोष उत्पनन हो तो चावल और मछली का सेवन करे ।

4. योनि के फैलाव को रोकने के लिए भांग के पत्तों को पीसकर उसे बारीक बनायें और पतले कपड़े में एक छोटी सी पोटली बनाकर योनी में 20 दिनों तक प्रति रात रखें ।

5. गर्भ की स्थिरता के लिए शंख भस्म को गर्म दूध के साथ मिलाकर पीयें ।

6. शुक्राणु यदि दुर्बल हैं या पतले है तो दूध में बकरे का अंडकोष को पकाकर 21 दिनों तक पीयें ।

उपरोक्त उपचार करने से पहले अपने चिकित्सक से भी परामर्श अवश्य लें।

me.sumitji@gmail.com

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