अगर आप पेप्सी स्टिंग, रेड बुल, मॉन्स्टर, कैम्पा एनर्जी या हेल एनर्जी जैसी ड्रिंक पीते हैं, तो जल्द ही इनकी बोतलों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ लिखा हुआ दिखाई नहीं देगा. भारत सरकार ने इन कंपनियों को अपने उत्पादों से एनर्जी ड्रिंक या इससे मिलतेजुलते शब्द हटाने का आदेश दिया है. यह फैसला भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने लिया है.

FSSAI का कहना है कि भारत में अभी तक एनर्जी ड्रिंक नाम की कोई ऑफिशियल कैटेगरी तय नहीं की गई है. इसलिए किसी पेय को खुद से एनर्जी ड्रिंक कहना या यह दावा करना कि इससे शरीर और दिमाग को तुरंत ऊर्जा मिलती है या कमजोरी दूर होती है, ग्राहकों को गुमराह कर सकता है.
किन कंपनियों पर होगा असर?
इस फैसले का असर पेप्सी, रेड बुल, मॉन्स्टर बेवरेज, कैम्पा एनर्जी और हेल एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा. इन सभी कंपनियों को अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग में बदलाव करना होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों ने इस फैसले का विरोध किया था. उनका कहना था कि एनर्जी ड्रिंक शब्द हटाने से उनके ब्रांड की पहचान और बिक्री पर असर पड़ेगा. हाल ही में हुई एक बंद कमरे की बैठक में FSSAI ने साफ कर दिया कि अगर कंपनियों को आपत्ति है तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि बाद में उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों ने नियम मानने पर सहमति जताई और उन्हें 90 दिनों के भीतर लेबल बदलने का समय दिया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
दुनिया के कई देशों में हाई कैफीन वाले पेय पदार्थों को लेकर पहले से चिंता जताई जा रही है. इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा अधिक होती है. इसी वजह से इंग्लैंड ने अगले साल अप्रैल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों को हाई कैफीन एनर्जी ड्रिंक बेचने पर रोक लगाने का फैसला किया है. भारत में एनर्जी ड्रिंक का बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. खासकर Pepsi Sting के 2017 में लॉन्च होने के बाद इसकी लोकप्रियता काफी बढ़ी. सिर्फ 20 रुपये की कीमत वाली Sting की बोतलें खासकर 15 से 19 साल के युवाओं और ग्रामीण इलाकों में खूब पसंद की जाती हैं.



