Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना की शर्तें तय कर दी गई हैं. ये योजना इसलिए शुरू की गई है, ताकि गोवंश पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिल सके. योजना के तहत उस गाय के पालक को प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिसकी गाय एक दिन में छह लीटर या इससे अधिक दूध देगी. इसके बाद की श्रेणी में 50 हजार और फिर 25 हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा.

दूध के उत्पाद के हिसाब से मैरिट लिस्ट बनाई जाएगी और वही पहले तीन प्रतिभागियों के चयन का आधार होगा. इसके लिए बकायदा 313 ब्लॉक में प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जो दो दिनों तक चलेगी. सरकार प्रतियोगिता का आयोजन करने के लिए 50000 रुपये खर्च करेगी. प्रतियोगिता वाली राशि से दो दिन तक हिस्सा लेने वालों की गायों को चारापानी दिया जाएगा. टेंटपंडाल में समेत अन्य खर्चे होंगे.

हर ब्लॉक में एक वृंदावन गांव

हर ब्लॉक में सरकार ने एक वृंदावन गांव का चयन किया है. इसी गांव के लोग प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे. जिस गांव की आबादी 2000 हो और गांव में कम से कम 500 गोवंश पलाता हो, उसे सरकार ने वृंदावन गांव माना है. प्रतियोगिता से पहले गोपालकों का रजिट्रेशन भी कराया जाएगा. मध्य प्रदेश में इस समय 1.57 करोड़ गोवंश हैं. अभी ये प्रतियोगिता सिर्फ सीमित वृंदावन गांवों तक कराई जाएगी.

सीएम मोहन यादव ने किया था ऐलान

प्रतियोगिता के बाद पुरस्कार बांटे जाएंगे. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सीएम मोहन यादव ने तीन अक्टूबर को इसकी घोषणा की थी. सरकार गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना हर साल कराने की तैयारी में है. इसके लिए पांच साल का बजट 35 करोड़ रखा गया है. ये योजना 203031 तक चलेगी. एक साल में इस योजना पर 7.05 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. ईनाम के साथ इस योजना पर खर्च होने वाले 50 हजार भी इस राशि में शामिल हैं.

गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना का मकसद

वर्तामान में राज्य में दूध का उत्पादन 9 फिसदी है, जिसको बढ़ाकर 20 फिसदी करना है. एनडीडीबी के आने के बाद दूध का संकलन 50 लाख लीटर तक ले जाना है, जोकि अभी 10 लाख लीटर है. उन्नत गायों को बढ़ावा देना है, ताकि किसान अधिक से अधिक दूध पा सकें. किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है.