Thursday, February 19, 2026
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कटे-फटे नोटों केˈ साथ क्या किया जाता है? आधे इंडिया को नहीं पता इसका सही जवाबˌ

कटे-फटे नोटों केˈ साथ क्या किया जाता है? आधे इंडिया को नहीं पता इसका सही जवाबˌ

क्या आपने कभी सोचा है कि बैंक में जमा किए गए कटे-फटे नोटों का आखिर क्या होता है? आधे से ज़्यादा भारत को इसका सही जवाब नहीं पता है! RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) इन पुराने नोटों को जलाता या फेंकता नहीं है, बल्कि उन्हें एक खास चीज़ में बदल देता है। जानिए, आपके बेकार हो चुके नोटों का इस्तेमाल किस चौंकाने वाले काम के लिए किया जाता है!

कटे-फटे नोटों केˈ साथ क्या किया जाता है? आधे इंडिया को नहीं पता इसका सही जवाबˌ

क्या कभी आपने सोचा है कि बैंक पुराने और कटे-फटे नोटों का क्या करता है। कई लोग सोचते है कि RBI इन्हे जला देता है या फेंक देता है। लेकिन ऐसा नहीं है। RBI इन पुराने और कटे-फटे नोटों को रीसायकल करके फर्नीचर बनाते है। इस तरीके से पुराने नोटों का फिर से रीसायकल हो जाता है।

RBI अब पुराने नोटों का करेगा बेहतर निपटान

आपको जानकर हैरानी होगी कि RBI के पास हर साल 15,000 टन से भी ज़्यादा पुराने और खराब नोट जमा होते है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पहले बैंक इन नोटों को नष्ट करने के लिए उन्हें जलाता था या फिर मिट्टी में दबाता था। लेकिन ऐसा करना महंगा होने के साथ -साथ हानिकारक भी होता था। इस समस्या को देखते हुए अब RBI पुराने नोटों का निपटारा करने के लिए एक बेहतर और पर्यावरण-अनुकूल तरीका अपनाया है।

पुराने नोटों से बनेंगे पार्टिकल बोर्ड

पुराने और खराब नोटों का फिर से उपयोग करने के लिए एक नई योजना शुरू की गई है। अब इन नोटों को बारीक कतरनों में बदलकर पार्टिकल बोर्ड बनाने वाली कंपनियों को दिया जाएगा। इस पहल से कंपनियों को सस्ता और टिकाऊ कच्चा माल मिलेगा, जिससे फर्नीचर आदि बनाए जाते है। ऐसा करने से RBI को इन नोटों का निपटारा करने में खर्च कम आता है, साथ ही बैंक की इससे अतिरिक्त कमाई हो जाती है।

पुराने नोटों से बनेगा फर्नीचर

नोटों को जलाने या ज़मीन में दबाने से से प्रदूषण होता है और हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। इस समस्या को देखते हुए RBI ने पर्यावरण मंत्रालय के अधीन आने वाले वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान से एक अध्ययन करवाया। इस अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला कि बेकार हो चुके इन नोटों की कतरन का इस्तेमाल आसानी से फर्नीचर बनाने में किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक असर कम होगा।

me.sumitji@gmail.com

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