आगरा. आगरा में पेट्रोल पंप के पास पति बेहोश पड़ा मिला था। उसका गुप्तांग कटा हुआ था। मामले में पुलिस ने पत्नी, फूफा समेत तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। कोर्ट ने आरोपी फूफा को बरी कर दिया है।

भतीजी से अवैध संबंधों के चलते उसके पति का गुप्तांग काटने के मामले में घटना के 12 साल बाद एडीजे-8 संजय के लाल ने थाना सदर क्षेत्र के कमांडर कॉलोनी मधुनगर निवासी आरोपी फुफेरे ससुर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। पत्रावली के उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार विवेचक की लापरवाही सामने आई और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास देखने को मिला।

थाना सदर में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार थाना सैंया क्षेत्र के गांव तेहरा निवासी पिता ने तहरीर में आरोप लगाया था कि उनके पुत्र का घटना से 6 महीने पहले जिला एटा के थाना अवागढ़ क्षेत्र के गांव भूर का गड्ढा निवासी युवती की 50 हजार रुपये में धरेजा (शादी) की थी। पुत्रवधू के पास आए दिन एक शख्स् आने जाने लगा। विरोध पर पुत्रवधू ने उसे फूफा बताया। बात बढ़ने पर उसने बताया कि फूफा से अवैध संबंध हैं। 17 मई 2014 को पुत्रवधू अपने पिता और फूफा के साथ घर आई।

पुत्रवधू और पुत्र को लेकर आगरा आ गए। 22 मई 2014 की सुबह 6 बजे श्याम पेट्रोल पंप के पास पुत्र बेहोश पड़ा मिला। देखा तो उसका गुप्तांग कटा हुआ था। वादी के दूसरे पुत्र ने मौके से पुत्रवधू को भागते हुए देखा था। पुलिस ने फूफा, पत्नी समेत तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद फूफा और पुत्रवधू के खिलाफ अलग-अलग आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस कारण दोनों की पत्रावली अलग हो गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से वादी, पीड़ित सहित 8 गवाह अदालत में पेश किए गए।

विवेचक की लापरवाही आई सामने
विवेचक ललित भाटी ने जांच में लापरवाही बरती। घटना स्थल से खून और मिट्टी बरामद नहीं की। पीड़ित के कपड़ों को भी जांच के लिए नहीं भेजा। पीड़ित की पत्नी द्वारा बनाए गए नशीले खाने को भी बरामद कर जांच के लिए नहीं भेजा। अभियुक्ता को मौके से भागते हुए देखने वाले चश्मदीद गवाह को गवाही के लिए अदालत में पेश नहीं किया गया।